नये साल में जिले में मिले मलेरिया के नये मरीज

Published at :08 Feb 2014 4:37 AM (IST)
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नये साल में जिले में मिले मलेरिया के नये मरीज

मधुबनीः वर्ष 2014 में जिले के कलुआही प्रखंड में मलेरिया का पहला मरीज मिला है. मलेरिया का मरीज मिलते ही विभाग अलर्ट हो गया है. अप्रैल 2013 से जनवरी 2014 तक मलेरिया के 26 रोगी जिले में मिले हैं. इस जिला में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 1992 से लेकर 2011 तक मलेरिया रोगी नहीं […]

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मधुबनीः वर्ष 2014 में जिले के कलुआही प्रखंड में मलेरिया का पहला मरीज मिला है. मलेरिया का मरीज मिलते ही विभाग अलर्ट हो गया है. अप्रैल 2013 से जनवरी 2014 तक मलेरिया के 26 रोगी जिले में मिले हैं. इस जिला में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 1992 से लेकर 2011 तक मलेरिया रोगी नहीं मिले थे.

वर्ष 2012 में अचानक मलेरिया रोगियों का मिलना शुरू हो गया. पंडौल की रामरती देवी, खजाैली के रमेश भंडारी, सुकरित मंडल, भूषण सदाय सहित एक दर्जन से अधिक लोगों को मलेरिया से ग्रसित पाये जाने पर स्वास्थ्य महकमा अलर्ट हो गया था. बीस साल बाद जिले के मलेरिया की चपेट में आने साथ ही स्वास्थ्य विभाग गंभीर हो गया था. तत्कालीन जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ उदय शंकर चौधरी के द्वारा कालाजार प्रभावित गांवों में डीडीटी का छिड़काव कराया गया था. मलेरिया रोगियों की जांच के लिए प्रभावित क्षेत्रों में फीवर सर्वे भी कराया गया. मलेरिया रोगियोंे की खोज के लिए अभियान भी चलाया गया. वर्ष 2014 में मलेरिया के नये मरीज मिलने के साथ ही विभाग सतर्क हो गया है.

जलजमाव वाले क्षेत्र में दहशत

मलेरिया का मच्छर मादा एनोफिलिज गंदा और स्थिर पानी में ब्रीड करता है. यह मलेरिया पीड़ित व्यक्ति का रक्त चूस कर स्वस्थ्य व्यक्ति को काटकर संक्रमित करता है. मलेरिया से ग्रसित व्यक्ति को जाड़े के साथ बुखार खास समय पर होता है. फीवर के साथ साथ सिरदर्द भी होता है. कई अन्य परेशानियां भी होती है. कभी कभी तो बुखार के कारण मरीज कोमा में चला जाता है. उपचार समय से नहीं होने पर मरीजों की मौत हो सकती है. मलेरिया के दो तरह के रोगी होते है. पी भिभेक्स व पी फेल्सीफेरस दो तरह के लक्षण इस जिले के मरीजों में पूर्व में पाये गये हैं. शहर के सड़क किनारे बने मरीजों में पूर्व में पाये गये हैं. शहर में सड़क किनारे बने नाला की समय से सफाई नहीं होने के कारण मलेरिया के मच्छर के ब्रीडिंग की आशंका बनी हुई है. शहर के अधिकांश नालों को स्लैब से ढका नहीं गया है. नाले से बदबू आ रही है. इसी में मलेरिया के मच्छरों का बसेरा है.

जांच के लिए आने लगे मरीज

सदर अस्पताल सहित विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में बुखार से पीड़ित लोग जांच के लिए आने लगे हैं. आरडी किट से मलेरिया रोगी की जांच होती है. सदर अस्पताल और सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आरडी किट के माध्यम से संदिग्ध रोगियों की मलेरिया की जांच की जा रही है. मलेरिया की दवा क्लोरोक्वीन और प्राइमाक्वीन उपलब्ध है. मलेरिया से बचने के लिए लोग मच्छरदानी लगाकर सोने लगे हैं. कई इससे बचाव के लिए कई मेडिकल क्रीम भी लगाने लगे हैं. खिड़कियों में भी लोग जाली लगाने लगे हैं. मलेरिया का लक्षण मिलते ही इसकी जांच के लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर आने लगे हैं. जागरूकता के अभाव में कई लोग मलेरिया रोग को साधारण बुखार मानकर नसीब को कोस रहे हैं.

क्या कहते हैं अधिकारी

जिला मलेरिया विभाग में कार्यरत मलेरिया इंस्पेक्टर धीरेंद्र कुमार मल्लिक ने बताया कि मलेरिया वेक्टर बॉर्न डिजीज है. यह मादा एनोफिलिज मच्छर के काटने से फैलता है. जनवरी 2014 में मलेरिया का पहला मरीज जिले के कलुआही प्रखंड से मिला है. वह लगभग 50 साल का पुरुष है. श्री मल्लिक ने कहा कि मलेरिया का क्लोरोक्वीन और प्राइमाक्वीन दवा उपलब्ध है. जांच के लिए आर डी किट भी पर्याप्त मात्र में उपलब्ध है.

हेल्थ कैंप 14 को

अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अररिया संग्राम (झंझारपुर) में 14 फरवरी 2014 को स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जायेगा. शिविर के सफल संचालन के लिये जिला सामुदायिक उत्प्रेरक जिला स्वास्थ्य समिति नवीन कुमार को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है. सिविल सजर्न डॉ ओम प्रकाश प्रसाद ने स्वास्थ्य शिविर को सफल बनाने के लि ये उपाधीक्षक अनुमंडल अस्पताल को आवश्यक निर्देश जारी कर दिया है. शिविर में मरीजों का नि:शुल्क जांच होगी और उन्हें मुफ्त में दवा दी जायेगी. 33 तरह की दवाएं मिलेंगी. दो एमबीबीएस डॉक्टर और चार एएनएम भी शिविर में रहेंगी.

शिविर में प्रसव पूर्व जांच की व्यवस्था रहेगी. आंखों की जांच कर नि:शुल्क चश्मा वितरित की जायेगी. एक्स रे मशीन, सेमी ऑटो एनलाइजर मशीन लगेगा. पैथोलॉजी सुविधा उपलब्ध उपलब्ध रहेगी. रेडियोलॉजी जांच की भी सुविधा रहेगी. शिविर में आने वाले नेत्र रोगी की जांच दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ करेंगे. राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के कार्यपालक निदेशक सह बिहार सरकार के स्वास्थ्य सचिव संजय कुमार सिंह के निर्देश पर हेल्थ कैंप का आयोजन किया जायेगा. सभी शिविर में आने वाले मरीजों के लाइन लिस्टिंग के लिये डाटा ऑपरेटर कंप्यूटर, प्रिंटर, मोबाइल इंटरनेट कनेक्शन के साथ उपलब्ध रहेंगे. आयुर्वेदिक, होमियोपैथिक, और यूनानी डॉक्टर भी चिकित्सा करेंगे.

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