पंचायत ने शिक्षक-शिक्षिका को सुनाया गांव छोड़ने का फरमान सप्ताह भर पहले दोनों हुये थे गायब

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Sep 2016 6:05 AM

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सकरा (मुजफ्फरपुर) : जिले में हाल के दिनों में पंचायतों की ओर से फरमान सुनाने के मामले बढ़े हैं. ताजा मामला सकरा थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां के एक शिक्षक-शिक्षिका को गांव छोड़ने का आदेश पंचायत ने पारित किया है. दोनों पर आरोप है कि वे एक सप्ताह साथ में रहे. इसको लेकर दोनों […]

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सकरा (मुजफ्फरपुर) : जिले में हाल के दिनों में पंचायतों की ओर से फरमान सुनाने के मामले बढ़े हैं. ताजा मामला सकरा थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां के एक शिक्षक-शिक्षिका को गांव छोड़ने का आदेश पंचायत ने पारित किया है. दोनों पर आरोप है कि वे एक सप्ताह साथ में रहे. इसको लेकर दोनों ने पंचायत को दलील दी, लेकिन पंचायत ने दलीलों को स्वीकार नहीं किया और फैसला सुना दिया. फैसले पर तुरंत अमल भी हो गया. शिक्षिका को लेकर उसके परिजनों ने गांव छोड़ दिया है, जबकि शिक्षक गांव के सरपंच की देखरेख में है, जो अपने बच्चों के नाम जमीन लिख कर गांव छोड़ देगा.

जानकारी के मुताबिक शिक्षक व शिक्षिका स्थानीय निजी स्कूल में पढ़ाते हैं. शिक्षक शादी?हो चुकी है. उसका परिवार है, जबकि शिक्षिका की शादी नहीं हुई है. बताया जाता है कि दोनों आपस में रिश्तेदार भी हैं. सप्ताह भर पहले दोनों गायब हो गये थे. इसके बाद गुरुवार की शाम वापस लौटे, तो दोनों को देखते ही ग्रामीण आक्रोशित हो गये. दोनों को पकड़ लिया गया और ग्रामीणों के साथ शिक्षक की पत्नी भी थाने पहुंची.
थाने पर कोई आवेदन नहीं दिया गया, लेकिन मामले को लेकर बात हुई. थाने पर मौजूद अधिकारियों ने पूरी बात सुनी और दोनों पक्षों को समझाया. इसके बाद दोनों को लेकर ग्रामीण गांव लौट गये, लेकिन मामला शांत नहीं हुआ. शुक्रवार को मामले को लेकर पंचायत बुलायी गयी. पंचायत में गांव के लोग जुटे. पंचायत में बैठे लोगों ने दोनों के बीच प्रेम-प्रसंग होने का आरोप लगाया, लेकिन इससे दोनों ने इनकार किया, लेकिन पंचायत में शामिल लोगों ने उनकी बात नहीं मानी.
बताया जाता है कि शिक्षक-शिक्षिका की ओर से इसको लेकर दलील दी गयी और कहा गया कि वो दोनों किसी दूसरे काम से बाहर गये थे, लेकिन दोनों की दलीलों को पंचायत ने खारिज कर दिया. पंचायत में बैठे लोगों ने दोनों को गांव छोड़ने का फैसला सुना दिया. शिक्षिका के
पंचायत ने शिक्षक…
परिजनों से कहा गया कि जब तक उसकी शादी नहीं हो जाती है, तब तक वो गांव में नहीं रह सकते हैं. पंचायत के फैसले के बाद शिक्षिका को लेकर उसके परिजन गांव से चले गये.
वहीं, शिक्षक को गांव के सरपंच की देखरेख में रखा गया है. शिक्षक को अपने हिस्से के जमीन बच्चों के नाम लिखने को कहा गया है, ताकि उनका काम चले. साथ ही पत्नी को हर माह तीन हजार रुपये का गुजारा भत्ता देने का आदेश भी पंचायत की ओर से पारित किया गया है. शिक्षक अपनी जमीन बच्चों के नाम लिखेगा. साथ ही पत्नी को लिखित देगा कि वो हर माह उसे तीन हजार रुपये देगा. इसके बाद वह भी गांव छोड़ देगा.
पंचायत के फैसले के बाद शिक्षिका ने परिजनों के साथ छोड़ा गांव
शिक्षक को सरपंच की अभिरक्षा में रखा गया है गांव में
पुत्र के नाम संपत्ति कर शिक्षक को भी छोड़ देना है गांव
शिक्षक को हर माह पत्नी को देना होगा तीन हजार रुपया
थाने तक पहुंचा था मामला
लेकिन नहीं दिया गया था आवेदन
थाने से दोनों पक्षों को भेज दिया गया था गांव
गांव में पंचायत कर दोनों को सुनायी गयी सजा
फैसले को लेकर होती रही चर्चा
पंचायत की ओर से किये गये फैसले को लेकर सकरा इलाके में शुक्रवार को दिन भर चर्चा होती रही. पंचायत के अधिकार को लेकर लोग बात कर रहे थे. साथ ही इनका कहना था कि इस तरह का फैसला कैसे सुनाया जा सकता है? अगर फैसला सुनाया जा रहा था, तो पंचायत को शिक्षक व शिक्षका की दलीलों की जांच करनी चाहिये थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया ?
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