कराटे में कस्तूरबा की छात्राओं का दबदबा

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मधुबनी : शहर के सहुआ गांव स्थित कस्तूरबा बालिका विद्यालय की छात्राओं ने परचम लहराया है. इस विद्यालय की छात्राएं विभिन्न मध्य विद्यालयों में जाकर छात्राओं को कराटे का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्म सुरक्षा के लिये प्रेरित कर रही है. कक्षा सात की छात्रा ने दिखाया दम : कक्षा सात की छात्रा खुशी कुमारी शहर […]

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मधुबनी : शहर के सहुआ गांव स्थित कस्तूरबा बालिका विद्यालय की छात्राओं ने परचम लहराया है. इस विद्यालय की छात्राएं विभिन्न मध्य विद्यालयों में जाकर छात्राओं को कराटे का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्म सुरक्षा के लिये प्रेरित कर रही है.

कक्षा सात की छात्रा ने दिखाया दम : कक्षा सात की छात्रा खुशी कुमारी शहर से सटे मध्य विद्यालय लक्ष्मी सागर में कराटे का प्रशिक्षण प्रतिदिन छात्राओं को दे रही है.
वहीं कक्षा आठ की छात्रा खुशी कुमारी फतेपुर मध्य विद्यालय में कराटे सिखा रही है. इसी विद्यालय की अन्नू कुमारी भिठ्ठी मध्य विद्यालय में और पूजा कुमारी उत्क्रमित मध्य विद्यालय सहुआ में कराटे की ट्रेनिंग छात्राओं को दे रही है. कस्तूरबा की पूर्णकालिक शिक्षिका सरिता कुमारी को इन बच्चियों पर नाज है. वे कहती हैं कि इन छात्राओं का चयन उनकी प्रतिभा व कौशल के आधार पर हुई है. इन छात्राओं ने केजीवीबी का नाम रौशन किया है.
गुलाब के फूलों से सजा परिसर :
कस्तूरबा की छात्राओं ने वार्डेन दीपा कुमारी व शिक्षिका सरिता कुमारी के सहयोग से परिसर में गुलाब के फूल की बागवानी की जो अब रंग ला रहा है. लाल,पीले गुलाब के फूलों से परिसर गुलजार है.
हुआ स्किल डिवलपमेंट प्रोग्राम :
कस्तूरबा विद्यालय सहुआ में कक्षा छह,सात व आठ की बालिकाओं को स्किल डिवलपमेंट का चार दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया है. इससे छात्राओं में प्रसन्नता की लहर है. विभिन्न विषयों में छात्राओं का क्षमतावर्द्धन हुआ है.
74 बालिका हैं नामांकित :
केजीवीबी सहुआ में 74 बालिकाएं नामांकित हैं. इसमें 19 मूक बधिर हैं जो न बोल पाती है न सुन पाती है. इनके लिये विशेष प्रशिक्षण पिछले कई महीनों से चल रहा है.
चहारदिवारी की उंचाई कम :
चहारदिवारी की ऊंचाई कम रहने से छात्राओं में रोष है. छात्राओं ने चहारदिवारी की ऊंचाई उपर करने की मांग डीइओ से की है. उन्होंने कक्षा 10 तक की पढ़ाई केजीवी व पीबी में सुनिश्चित कराने की मांग की है. अभी कक्षा आठ तक का ही पढ़ाई होता है. पूर्णकालिक शिक्षिकाओं व वार्डेन का मानदेय साल 2007 से नहीं बढ़ाये जाने के कारण इनमें उदासी है. जबकि बार बार सेवा नियमित करने व मानदेय की जगह वेतन देने की इन्होंने मांग सरकार से की है.
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