साल भर बाद भी शबनम का पता नहीं, खोज में जुटी पुलिस

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मधुबनी : नगर थाना क्षेत्र के स्टेडियम रोड निवासी स्व नूर आलम की विवाहिता पुत्री शबनम आरा का अब तक कोई सुराग नहीं लग सका है. उसकी हत्या कर दिये जाने की आशंका अब लोगों को होने लगी है. ससुराल वालों के द्वारा शबनम के नीदरलैंड में होने का दावा भी विफल हो चुका है. […]

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मधुबनी : नगर थाना क्षेत्र के स्टेडियम रोड निवासी स्व नूर आलम की विवाहिता पुत्री शबनम आरा का अब तक कोई सुराग नहीं लग सका है. उसकी हत्या कर दिये जाने की आशंका अब लोगों को होने लगी है. ससुराल वालों के द्वारा शबनम के नीदरलैंड में होने का दावा भी विफल हो चुका है.

विगत दिनों पुलिस बल दिल्ली से जब नीदरलैंड दूतावास से पता किया तो शबनम व उसके पति के नीदरलैंड जाने का कोई भी पुख्ता सबूत हासिल नहीं हो सका. अब सवाल उठने लगा है कि क्या ससुराल वालों ने शबनम की हत्या कर शव को गायब कर दिया है या कोई और मामला है. इसकी जांच जारी है, लेकिन जो तथ्य सामने आए हैं. उससे ससुराल वालों की धोखेबाजी, आपराधिक चरित्र, न्यायालय में गलत बयानबाजी सहित कई गंभीर मामले बन रहे हैं.
अपहरण, हत्या व शव गायब कर देने के संबंध में शबनम के भाई एम आलम ने नगर थाना में 431/14 कांड दर्ज करवा चुके हैं. इस मामले में शबनम के पिता स्व नूर आलम की अपनी पुत्री से बात करने की इच्छा पूरी न हो सकी. इसे लेकर वे पुलिस अधिकारियों के पास गुहार लगाते हुए दम तोड़ गये, लेकिन पुलिस कांड के नामजद आरोपित मो फैयाज व मो नसीम को पर्यवेक्षण रिर्पोट से हटा दिया. पुलिस के उच्चाधिकारी आइजी व डीआइजी से विनती हुई तो मो फैयाज का नाम फिर से मामले में जोड़ दिया गया, लेकिन मो नसीम अब भी पुलिस की जांच का फायदा उठा रहा है.
न्यायालय को गुमराह करने की कोशिश
इस मामले में हैरत की बात तो यह है कि नामजद अभियुक्त न्यायालय में अपने अग्रिय जमानत याचिका में शबनम और इनके पति फिरोज अहमद के नीदरलैंड में रहने का दावा किया, लेकिन पुलिस एक साल से अधिक दिनों में शबनम को उसके मायके वालों से बात नहीं करा सकी. हालांकि आरटीआइ एवं अन्य पहल जो भाई के द्वारा की जाती रही के बाद इन दोनों के नीदरलैंड में नहीं होने की बात सामने आ चूकी है.
इसके बाद जिला जज ने नामजद आरोपितों की जमानत याचिका खारिज कर दी. फिलहाल उच्च न्यायालय में इसी बात का दवा करते हुए आरोपियों द्वारा जमानत की याचिका दाखिल कर रखी है. इस बीच उच्चधिकारीयों के दबाव के बाद पुलिस ने अपने अनुसंधान में तेजी लाई और इससे जो तथ्य सामने आये वह हैरत में डालने वाला है. पुलिस अनुसंधान में शबनम के विदेश में होने की बात लगभग झूठी साबित हो चुकी है. ऐसे में शबनम की हत्या कर शव को ससुराल वालों ने काफी चालाकी से गायब कर देने की आशंका बलबती हो गयी है.
कार्रवाई हुई तो फसेंगे कई
दरअसर, मामले में पुलिस की फजीहत होते देख सदर डीएसपी कुमार इंद्र प्रकाश ने अनुसंधानकर्ता को उच्च न्यायालय में शबनम के जीवित होने के सत्यापन शपथ पत्र दायर करने वाले झंझारपुर के अशरफ अली के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया है. वहीं, मुगलसराय में रेलवे में काम करने वाले सह आरोपित मो नसीम की अभियुक्तीकरण के लिए डीआइजी के द्वारा नए सिरे से कार्रवाई के आदेश दिये गये हैं.
क्या है मामला
स्टेटियम रोड निवासी स्व नूर आलम की पुत्री शबनम आरा की शादी झंझारपुर निवासी मो सैयूम क्युम फिरोज अहमद के साथ जनवरी 2006 में हुई थी. शादी के बाद से ही दहेज की मांग को लेकर शबनम को प्रताड़ित किया जाता रहा. इस बीच मायके आयी शबनम को देवर फैयाज व ननदोसी नसीम ने विदेश ले जाने के बहाने वापस ससुराल ले गये. तब से शबनम की मायके में किसी की कोई बात नहीं हो पायी है.
आखिरकार पिछले वर्ष दाे नवंबर को अपहरण व हत्या कर देने की प्राथमिकी नगर थाना में दर्ज कराई गयी, लेकिन पुलिस आरोपितों के साथ शुरू से मिलीभगत कर सोयी रही. अपनी बहन के लिए दर दर भटक रहे भाई मो आलम ने आरटआइ व अन्य माध्यमों का सहारा लेकर न्याय के लिए गुहार लगा रहे हैं.
क्या कहते है अधिकारी
इस मामले में एसपी मो अख्तर हुसैन ने कहा कि इस मामले में किसी भी दाषी को बख्शा नहीं जाएगा. इधर, बुधवार 23 दिसंबर को डीआइजी के द्वारा भी इस मामले में जांच करने की संभावना है. इसेे लेकर पुलिस अधिकारियों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है.
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