वख्यिात है परसाधाम सूर्य मंदिर

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विख्यात है परसाधाम सूर्य मंदिर परसाधाम सूर्य मंदिर में भगवान के दर्शन को आते हैं नेपाल के श्रद्धालु पर्यटन विभाग के द्वारा तीन बार किया गया है महोत्सव फोटो: 1परिचय: परसाधाम स्थित सूर्य मंदिर झंझारपुर . आस्था का महान पर्व छठ की धूम हर ओर है. लोग भगवान सूर्य के आराधना आस्था के साथ करने […]

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विख्यात है परसाधाम सूर्य मंदिर परसाधाम सूर्य मंदिर में भगवान के दर्शन को आते हैं नेपाल के श्रद्धालु पर्यटन विभाग के द्वारा तीन बार किया गया है महोत्सव फोटो: 1परिचय: परसाधाम स्थित सूर्य मंदिर झंझारपुर . आस्था का महान पर्व छठ की धूम हर ओर है. लोग भगवान सूर्य के आराधना आस्था के साथ करने में जुटे हैं. इस पर्व की महत्ता भगवान सूर्य के पूजा से है. स्वभाविक है कि इसमें लोग भगवान भाष्कर के पूजा करने की कोशिश करते हैं. भगवान भाष्कर के पूजा आराधना की बात हो और परसाधाम सूर्य मंदिर की बात ना हो यह बेमानी ही है. नेपाल के श्रद्धालु भी आते हैं दर्शन को अनुमंडल के परसा पंचायत के परसाधाम स्थित सूर्य की बहुमुल्य प्रतिमा वर्षो से स्थापित है. परसाधाम की महत्ता इतनी है कि दूर दराज के लोगों समेत परोसी देश नेपाल के लोग भी इस प्रतिमा के दर्शन करने पहुंचते हैं. छठ के मौके पर भी लोग दर्शन के लिए आते हैं. राज्य सरकार ने भी इस स्थान की महत्ता को देखते राज्य पर्यटन विभाग के संबंद्ध कर लिया. तथा सूर्य महोत्सव के रूप में सरकार की ओर से समारोह भी मनाया जाने लगा. कुछ दिनो बाद समारोह का नाम बदलकर मातंर्ड महोत्सव कर दिया गया. सूर्य मंदिर व प्रतिमा की स्थापन तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्र एवं तत्कालीन डीएम अशोक कुमार सिंह के सार्थक प्रयास से किया गया था. बाद में इस स्थान को बढावा दिये जाने के दिशा में तत्कालीन स्थानीय विधायक नीतीश मिश्रा ने काफी पहल किया. इनके द्वारा इस स्थान को राज्य स्तर पर समारोह में शामिल किये जाने की पहल भी की गयी. पहली बार सूर्य महोत्सव के रूप में समरोह का आयोजन किया गया. वहीं दूसरे व तीसरी वार मातंर्ड महोत्सव के रूप में समारोह मनाया गया जा चुका है.कब व कैसे हुई स्थापना1983 ई. में परधामधाम में सूर्य की प्रतिमा को भव्य मंदिर बनवाकर स्थापना करायी गयी. उस समय यह क्षेत्र फुलपरास थाना क्षेत्र में था. साथ ही उक्त स्थल पर महादलित समुदाय के लोग यहां निवास करते थे. फुलपरास थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष अलिहसन के पहल पर मूर्ति को इन समुदाय के लेगों से मुक्त कराया गया. बताया जाता है. कि रात को इस स्थल पर प्रकाश होता था. थाना के सुरक्षा गार्डों द्वारा कई बार रेड किया गया. लेकिन उस स्थल पर पहुंचते ही प्रकाश गायब हो जाती थी. काफी प्रयास के बाद पता चला कि यहां पर सूर्य की मूर्ति रखी हुई है. ग्रामीणों को पता चलते ही मूर्ति को अपने कब्जे में कर तत्काल महादलित समुदाय के गबहर में स्थापित की गयी. मंदिर में दो हैं पुजारीपरसाधाम स्थित सूर्य की मंदिर में दो पुजारी है. श्याम मिश्र एवं उनके पुत्र सुमन मिश्र 1983 से ही श्याम मिश्र मंदिर की सेवा दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओ को मन से मांगी गयी मुराद पूरी होती है. जिसका नतीजा है कि लगभग एक हजार घंटा चढ़ावा के तौर पर मंदिर प्रबंंधन को प्राप्त हो चुका है. साथ ही सोने चांदी के आभूषण भी मंन्नत मांगने वाले श्रद्धालुओं द्वारा दिया जा चुका है. श्री मिश्र ने बताया कि उस समय से मंदिर का पूजा अर्चना करते आ रहे हैं, जिस समय उन्हें पूजा के लिये मासिक 1 रूपया 60 पैसे दिये जाते थे. आज दोनो को मिलाकर 551 रूपया दिया जाता है. अपनी दर्द बयां करते हुए श्याम मिश्र ने बताया कि सरकार के स्तर से मंदिर के पुजारी को वेतन मिलना चाहिए. जिससे दोनों पुजारी को परिवार चल सके.सुविधा का अभावइस मंदिर की इतनी अधिक महत्ता रहने के बाद भी यह सुविधा की कमी से जूझ रहा है. इस मंदिर प्रांगण में मंगनी लाल मंडल द्वारा दो दो सामुदायिक दलान जरूर दिया गया. जिसमें एक सामुदायिक दलान में पंचायत सरकार भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, उद्दिपिका केंद्र संचालित होती है. वहीं उसी दलान में छह सुरक्षा गार्ड भी रहते हैं. साथ ही एनएच 57 से पहुचने वाली सड़क का हाल भी खास्ता है. उस सड़क से मंदिर तक पहुंचने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है. सड़क जर्जर हो चुकी है. साथ ही बाउंड्रीबाल भी मंदिर को नसीब नहीं है.11 सदस्यीय कमेटी मंदिर की करता है देखरेखसूर्य मंदिर के देख रेख के लिए 11 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है. जिसमें अध्यक्ष भुवनेश्वर मंडल, सचिव विभूति सिंह एवं कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह को बनाया गया है. इस कमेटी का काम मंदिर के सभी कार्यो को देखरेख करना है.क्या कहते हैं मुखियामुखिया गंगाराम साह ने बताया कि मंदिर की महत्ता को देखते स्थानीय विधायक, सांसद का कई बार सड़क की मांग कर चुके हैं. जिसके आलोक में प्रधानमंत्री सड़क योजना में इस सड़क को डाला गया. लेकिन दो बार टेंडर के बावजूद सड़क का जीर्णोद्वार नहीं हो पाना दुखद है.

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