सड़क व बिजली की समस्या नहीं हुई दूर
सड़क व बिजली की समस्या नहीं हुई दूर -चारपाई के सहारे अस्पताल जाते हैं मरीज बाबूबरही. चुनाव का समय आते ही गांवों की गलियां नेताओं के जनसंपर्क और नारेबाजी से गूंज रही है. हर गांव में नेताओं का दौड़ा चल रहा है. ये वे गांव हैं जहां पांच साल पहले ही नेता चुनाव के दौरान […]
सड़क व बिजली की समस्या नहीं हुई दूर -चारपाई के सहारे अस्पताल जाते हैं मरीज बाबूबरही. चुनाव का समय आते ही गांवों की गलियां नेताओं के जनसंपर्क और नारेबाजी से गूंज रही है. हर गांव में नेताओं का दौड़ा चल रहा है. ये वे गांव हैं जहां पांच साल पहले ही नेता चुनाव के दौरान ही गये थे. इन पांच सालों में इन गांवों की समस्या को दूर करने की बात तो दूर नेताओं ने झांंक कर देखा तक नहीं. विकास की बातें भले ही होती हो, लेकिन कई गांव आज भी विकास से दूर है. एक बार फिर गांवों में जा रहे नेता इन गांवों की सड़क को बनानेे, बिजली की समस्या को दूर करने की बातें कर रहे हैं. पर जनता में नेताओं के आश्वासन को लेकर आक्रोश साफ देखा जा रहा है. प्रभात पड़ताल में बाबूबरही प्रखंड के कई गांवों की समस्या सामने है. नहीं बन सकी पक्की सड़कबलानसेर गांव फोटो: 3परिचय: बलानसेर गांव में जाने वाली सड़क प्रखंड मुख्यालय से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित तिरहुता पंचायत के बलान नदी के किछेर में बलानसेर गांव की आबादी लगभग 1200 में है. विकास के नाम पर आजादी के छह दशक बाद भी पक्की सड़क से भी यह गांव नहीं जुड़ सका. ग्रामीण धनीकलाल राउत, महेंद्र राउत ,मनोज राउत आदि ने कहा की गांव में एक प्राथमिक विद्यालय है. बाबूबरही जाने के लिए हमें पगडंडी रास्ता का ही सहारा ही लेना पड़ता है. वहीं भाड़ी वाहन को तिरहुता गांव होते हुए लगभग छह किलोमीटर की दूरी तय कर जाना पड़ता है. रास्ता खराब होने के कारण गांव में कोई बीमार पड़ जाते हैं. तो आज भी रोगी के खटिया के सहारे ही इलाज के लिए बाबूबरही पीएचसी लाना पड़ता है. ग्रामीणों ने कहा कि अबतक कई चुनाव देखा पर पर सड़क, शौचालय आदि के बारे में आज तक सिर्फ आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला. कमला नदी के किनारे बसा गांव फोटो : 4 परिचय: कमला नदी के किनारे बसे गांव की हाल सूबे में राजनीतिक दलों व राजनेता के द्वारा हर ओर विकास की बातें या दावे भले ही किया जा रहा हो, लेकिन हकीकत में कुछ ऐसी बस्ती है जहां विकास की रोशनी तक नहीं पहुंच सकी है. आज भी इन गांवों में लोगों को जाने के लिए सड़क, बिजली, पानी, दवा तक नहीं है. ऐसे में विकास की बातें ही बेमानी है. नेताओं द्वारा विकास की लाख बातें की जाती हो, लेकिन धरातल पर जाने के बाद पता चलता है कि हकीकत क्या है. प्रखंड मुख्यालय से लगभग पांच किलोमीटर पर अवस्थित कमला नदी के किछेर पर अवस्थित बसे गांव की आबादी लगभग दो हजार है, लेकिन गांव में पक्की सड़क के नाम पर एक ईंट भी नहीं लगा है. ग्रामीण दिनेश यादव, मदन यादव, रामचंद्र यादव आदि ने बताया की कमला नदी के किछेर में बसे यह गांव बारिश के मौसम में आजतक कई बड़े -बड़े बाढ़ देख चुका है. बाढ़ हो या चुनाव पदाधिकारी से लेकर नेतागण सिर्फ आश्वासन ही दिये हैं. हल्की बारिश होते ही गांव में वाहन आना तो दूर की बात है, पैदल भी चलना मुश्किल हो जाता है. ग्रामीण कई दफा सड़क पर धान के बिचड़े रोप अपना-अपना आक्रोश व्यक्त कर चुके हैं. गांव में एक भी शौचालय नहीं बना है . हालांकि गांव में कुछ जगह बिजली की व्यवस्था है, लेकिन लगभग पांच दर्जन घर भी बिजली से कोसो दूर है. बतादे कि मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना से सड़क बनना शुरू हुआ पर आधे-अधूरे स्थिति में रह गया. बालू के बीच से होती है आवाजाहीमधवापुर फोटो: 5परिचय: मधवापुर गांव जाने वाली सड़क प्रखंड के पिपराघाट कमला-बलान पुल से पश्चिम व दक्षिण कोन में बसा सतघारा पंचायत के मधवापुर गांव की आबादी लगभग दो हजार है. गांव जाने के लिए पक्की सड़क तो दूर एक ईंट भी नहीं लगा है. कमला नदी के किनारे से होकर कमला नदी के बालू होते हुए जाना तो इन ग्रामीणों को आदत सी हो गयी है. वही एक प्राथमिक विद्यालय है जहां गांव के बच्चे पढ़ते है. ग्रामीण विशुनदेव यादव, परिक्षण यादव, तेतर महतो आदि ने कहा की हर चुनाव मे नेता वोट मांगने के वक्त अश्ववासन दे सिर्फ अपना खानापूर्ति करते है. लेेकिन चुनाव जीत कर जाने के बाद पुन: पांच वर्ष बाद ही चुनाव के वक्त नजर आते है. विगत पांच साल पहले भी चुनाव में लोगों ने गांव में आने वाले हर नेता को इन समस्याओं से अवगत कराते हुए इसके निदान की मांग की थी. वोट मांगने आये हर नेता ने आश्वासन तो दिया, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही हर आश्वासन समाप्त. आज तक इन गांवाें के लोगों में इस बात की कसक है. लिहाजा गांव के लोगों में नेता के प्रति आक्रोश व्याप्त है.अरुण शंकर ने किया गांवों का दौराफोटो: 6परिचय: अपने समर्थकों के साथ जनसंपर्क करते अरुण शंकर प्रसाद मधुबनी/खजौली. चुनाव की तपिश हर सुबह बढ़ती जा रही है. गांवों में नेताओं के जाने का कार्यक्रम तेज हो गया है. हर घर के हर मतदाता से मिल कर अपने पक्ष में मतदान करने के लिए मतदाताओं से अपील की जा रही है. इस दौरान खजौली विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी अरुण शंकर प्रसाद अपने क्षेत्र में जनसंपर्क किया. उन्होंने पूर्व मे राज्य में एनडीए द्वारा किये गये कार्यों को लोगों को बताया. उन्होंने परसा, ताराटोल, दुल्लीपट्टी, खैरा टोल सहित दर्जनो गांवों का दौड़ा किया. उन्होंने लोगों से कहा कि महागंठबंधन एक बार फिर बिहार में जंगलराज लाने की दिशा में बढ़ रहा है. यह लालू-नीतीश कुमार की सोची समझी साजिश ही है. जनता यह सब बातें जानती है. जनता अब इस गंठबंधन के झांसे में नहीं आने वाली. कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने हर स्तर पर देश का विकास किया है. अब वही विकास बिहार में भी होगी. इसके लिए यह आवश्यक है कि बिहार में भी भाजपा गंठबंधन की सरकार बनें. कहा कि भाजपा नये बिहार की परिकल्पना के साथ मैदान में है. इसलिए लोगों से अपने पक्ष मेें मतदान करने की अपील की. इस दौरान उधव कुवंर, अजय पूर्वे, पंकज राठौर, विजय प्रसाद, कृष्ण देव साह, शिवजी साह, प्रदीप पासवान, गीता प्रसाद, गब्बर सिंह, विजय झा व नागेश्वर सिंह मौजूद थे.
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