Madhubani News : बिना निबंधन के संचालित निजी क्लिनिक पर 50 हजार रुपये का अर्थ दंड

Published by : GAJENDRA KUMAR Updated At : 04 Jun 2025 10:14 PM

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बिना निबंधन के जयनगर में संचालित निजी क्लिनिक के संचालक डॉ शैलेंद्र कुमार से सिविल सर्जन डाॅ. हरेंद्र कुमार ने जवाब तलब कर 50 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया है.

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मधुबनी.

बिना निबंधन के जयनगर में संचालित निजी क्लिनिक के संचालक डॉ शैलेंद्र कुमार से सिविल सर्जन डाॅ. हरेंद्र कुमार ने जवाब तलब कर 50 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया है. साथ ही संस्थान को पूर्णतया बंद करने का निर्देश दिया. संस्थान खुले पाये जाने की स्थिति में द्वितीय कार्रवाई में एक लाख रुपए का आर्थिक दंड लगाया जा सकता है. पिछले दिनों जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉक्टर जीएम ठाकुर व जिला वैक्टर बोर्न रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉक्टर डीएस सिंह प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने जयनगर में निजी क्लिनिक की जांच की थी. सिविल सर्जन को सौंपें जांच प्रतिवेदन में निजी क्लिनिक का निबंधन नहीं पाया गया. इसके आलोक में सीएस ने 50 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया है. इसके साथ ही संचालक को नर्सिंग होम बंद कर डिस्टिक रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी के नाम से इस राशि का बैंक ड्राफ्ट जमा कर अनियमितताओं के संबंध में स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है.

क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट रेगुलेशन किया गया है लागू :

इस आशय की की जानकारी देते हुए सिविल सर्जन डा. हरेंद्र कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा राज्य में क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट रेगुलेशन लागू किए जाने के बाद अब सभी प्रकार के क्लिनिकों, नर्सिंग होम, अस्पताल, लैबोरेट्री, रेडियोलॉजी केंद्र का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो गया है. इसके लिए जिला स्तर पर जिला प्राधिकार के गठन की अधिसूचना जारी कर दी गई है. अगर कोई क्लिनिक अस्पताल या नर्सिंग होम बिना रजिस्ट्रेशन कराये, संचालित किया जाता है, तो पहली बार उल्लंघन करने पर 50 हजार रुपए तक जुर्माना हो सकता है. दूसरी बार उल्लंघन करने पर 2 लाख तक और उसके बाद निबंधन नहीं कराने पर 5 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. राज्य सरकार ने क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट रजिस्ट्रीकरण और विनियमन अधिनियम 2010 में ही विधानमंडल के दोनों सदनों में पास कर लिया है. इसे प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा बिहार नैदानिक स्थापना रजिस्ट्रीकरण एवं विनियमन नियमावली 2013 को अधिसूचित कर दिया है. अब इसे प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से नैदानिक स्थापना राज्य परिषद और जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकार का गठन कर दिया है. इस रेगुलेशन के प्रभावी होने के बाद अब राज्य के सभी प्रकार के इलाज करने वाले संस्थान का निबंधन का रास्ता साफ हो गया है.

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