किराया निर्धारित नहीं, हो रहा नुकसान
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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मामला जिला परिषद के मार्केट कॉम्प्लेक्स का फुलपरास : वर्ष 2002 में जिला परिषद की ओर से 52 कमरों का मार्केट कांप्लेक्स बनाया गया, लेकिन विभागीय लापरवाही की वजह से आज तक इस मार्केट से किराया नहीं वसूला गया. अनुमंडल मुख्यालय में प्रखंड कार्यालय के समीप बने इस कांप्लेक्स का किराया 13 वर्षो से नहीं […]
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मामला जिला परिषद के मार्केट कॉम्प्लेक्स का
फुलपरास : वर्ष 2002 में जिला परिषद की ओर से 52 कमरों का मार्केट कांप्लेक्स बनाया गया, लेकिन विभागीय लापरवाही की वजह से आज तक इस मार्केट से किराया नहीं वसूला गया. अनुमंडल मुख्यालय में प्रखंड कार्यालय के समीप बने इस कांप्लेक्स का किराया 13 वर्षो से नहीं वसूले जाने से विभाग को प्रति वर्ष लाखों रुपये के राजस्व का घाटा हो रह है.
इस मार्केट कांप्लेक्स के भवन के निर्माण का नींव का आधार तत्कालीन डीएम निधी खरे और तत्कालीन विधायक देवनाथ यादव ने रखा था.
दुकानदारों ने बताया कि बाढ़ में इस मार्केट कांप्लेक्स के कई कमरा ध्वस्त हो गया था. वहीं, अनुमंडल प्रशासन ने आज तक इन कमरों का माहवारी किराया निर्धारित नहीं किया है.
इस वजह से हम लोगों ने कभी भी आवंटित कमरा का किराया नहीं दिया. प्रखंड पंचायत समिति के बैठक के बाद इस मार्केट कांप्लेक्स का माहवार किराया निर्धारित करने का प्रस्ताव जिला परिषद को भेजा गया, लेकिन कई वर्ष गुजरने के बाद भी जिला परिषद और अनुमंडल प्रशासन ने दुकानदारों से किराया वसूलने की कोई कार्रवाई नहीं की है. इससे राजस्व को 13 वर्षो से नुकसान हुआ है.
लापरवाही से नुकसान
जिला परिषद और अनुमंडल प्रशासन की लापरवाही के कारण ही सरकारी राजस्व का घाटा हो रहा है. पिछले साल डीडीसी राजकुमार ने प्रखंड कार्यालय निरीक्षण के दौरान तत्कालीन एसडीओ विजय कुमार को निर्देश दिया कि सभी आवंटित मार्केट कांप्लेक्स दुकानदारों को नोटिस तामिला करके माह वार भाड़ा का निर्धारण कर राशि प्रखंड कार्यालय के नजारत में जमा किया जाये, लेकिन डीडीसी के आदेशके बावजूद भी अनुमंडल पदाधिकारी एक वर्ष गुजरने के बाद भी माह वार किराया वसूलने की कोई कार्रवाई नहीं की.
डीडीसी ने वसूली का दिया था आदेश
पिछले वर्ष डीडीसी ने तत्कालीन एसडीओ को निर्देश दिया था कि सभी दुकानदारों से आवंटन के दिन से भाड़ा वसूल कर प्रखंड नजारत में जमा करें, लेकिन एक वर्ष गुजर जाने के बाद भी अनुमंडल प्रशासन ने इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की है.
ज्ञात हो कि निर्माण के बाद अनुमंडल पदाधिकारी ने दस हजार रुपये प्रति कमरा जमा लेकर दुकानदारों को दुकान आवंटित किया था. सभी दुकानदारों ने उसी वर्ष से ही सभी कमरों में दुकान प्रारंभ कर दिया. लगभग 13 वर्षो से इस सभी आवंटितकमरों का भाड़ा वकाया है.
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