जनवरी से मई तक 3483 नए टीबी मरीजों की हुई पहचान

Updated at : 06 Jun 2024 9:35 PM (IST)
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जनवरी से मई तक 3483 नए टीबी मरीजों की हुई पहचान

प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत वर्ष 2025 तक टीबी को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है. कार्यक्रम को लेकर जिला अस्पताल स्थित मॉडल अस्पताल के सभागार में गुरुवार को मासिक समीक्षा बैठक हुई.

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मधुबनी. प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत वर्ष 2025 तक टीबी को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है. कार्यक्रम को लेकर जिला अस्पताल स्थित मॉडल अस्पताल के सभागार में गुरुवार को मासिक समीक्षा बैठक हुई. बैठक में सीडीओ डॉ. जीएम ठाकुर ने कहा कि सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग अपने स्तर से टीबी मरीजों की लगातार पर्यवेक्षण एवं निगरानी कर रहा है. जिले में वर्ष 2023 में जनवरी से दिसंबर तक 6876 नए टीबी मरीजों की पहचान की गई है. वहीं वर्ष 2024 में जनवरी से मई तक 3483 नए टीबी के मरीजों की पहचान की गयी है. उन्होंने कहा कि जिले में टीबी मरीजों की संख्या बढ़ने का मुख्य कारण टेस्टिंग, ट्रैकिंग एवं कांटेक्ट ट्रेसिंग पर विशेष फोकस किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि पहले ओपीडी में आने वाले 2 से 3 प्रतिशत मरीजों का ही बलगम जांच हो पाता था. वहीं अब जांच का आंकड़ा बढ़कर 5 प्रतिशत हो गया है. टीबी स्क्रीनिंग अब वृहद पैमाने पर हो रही है. विभाग द्वारा जिले में 8 ट्रूनेट मशीन उपलब्ध कराई गई है. जिससे बलगम जांच होने से मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है. बैठक में शामिल सभी एसटीएस, एसटीएलएल को टीबी मुक्त पंचायत अभियान को सफल बनाने के लिए विशेष रणनीति के तहत कार्य करने का निर्देश दिया गया है. सभी कर्मियों को प्रत्येक 1 लाख की जनसंख्या पर कम से कम 3000 लोगों की जांच करने का निर्देश दिया गया है. टीबी मरीज के संपर्क में रहने वाले व्यक्ति को टीबी प्रीवेंटी ट्रीटमेंट ड्रग दिया जाएगा. डब्ल्यूएचओ कंसलटेंट डॉ उमर अकील ने यक्ष्मा कार्यक्रम के सभी इंडिकेटर पर विस्तृत जानकारी पीपीटी के माध्यम से सभी कर्मी को दिया.

जिले के सभी प्रखंड में लगाई जाएगी ट्रूनेट मशीन

डीपीसी पंकज कुमार ने कहा कि वर्तमान में जिले के आठ स्वास्थ्य संस्थान यथा डीटीसी मधुबनी, एसडीएच झंझारपुर, पीएचसी पंडौल, सीएचसी बिस्फी, एसडीएच बेनीपट्टी, एसडीएच जयनगर, सीएचसी बाबूबरही, एसडीएच फुलपरास में टीबी जांच ट्रूनेट मशीन से हो रही है. शेष सभी प्रखंडों के लिए राज्य स्तर से जल्द ही ट्रूनेट मशीन उपलब्ध कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि जिले में टीबी की जांच सीबीनट मशीन, ट्रूनेट मशीन एवं माइक्रोस्कोप से की जा रही है. जिस मरीज में टीबी के बैक्टीरिया की संख्या कम होती है, उसे माइक्रोस्कोप से टीबी की पुष्टि करना कठिन हो जाता है. वहीं सीबीनट या ट्रूनेट मशीन से कम बैक्टीरिया में भी टीबी मरीज की पहचान आसानी से की जा सकती है. साथ ही सीबीनट या ट्रूनेट मशीन से रिफैंपिसिन ड्रग सेंसिटिविटी की भी जानकारी प्राप्त होता है.

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