अावास योजना पर लगा अनियमितता का ग्रहण

मधुबनी : नगर परिषद में आवास योजना अबुझ पहेली बन गयी है. इस योजना में गड़बड़ी खुल कर सामने आ रही है. नगर परिषद के पास सही आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. किस फेज के कितने लाभुकों को आवास योजना का लाभ मिला है इसका उत्तर कोई देने के लिए तैयार नहीं है. नगर विकास व […]
मधुबनी : नगर परिषद में आवास योजना अबुझ पहेली बन गयी है. इस योजना में गड़बड़ी खुल कर सामने आ रही है. नगर परिषद के पास सही आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. किस फेज के कितने लाभुकों को आवास योजना का लाभ मिला है इसका उत्तर कोई देने के लिए तैयार नहीं है. नगर विकास व अवास विभाग व हाल ही में विधान सभा को भेजी गयी रिपोर्ट में भी अंतर है. कारण यह हो सकता है कि बिना डीपीआर के मिलान के ही लाभुकों का चयन कर लिया गया हो.
आवास योजना का प्रभार किसे है इसकी भी सही जानकारी किसी को नहीं है. पिछले 8 महीने से आलमीरा में बंद आवास योजना की फाइल इंवेंटरी के बाद बाहर निकली है. ऐसे में नगर विकास को पिछले आठ महीनों में जितनी बार रिपोर्ट भेजी गयी है वह सिर्फ कल्पना पर ही आधारित है. 31 जनवरी 2019 तक जितनी रिपोर्ट भेजी गयी है उसमें और अभी के रिपोर्ट में काफी भिन्नता है.
सूत्रों के अनुसार नगर विकास को भेजी गयी रिपोर्ट में इन तीन वर्षों में आवास योजना में 29 करोड़ रुपये लाभुकों को दिये गये हैं. जबकि नगर विकास व आवास विभाग के अनुसार डीपीआर देखने पर पता चलता है कि सही लाभुकों को सिर्फ 13 करोड़ रुपये ही मिले हैं. अब सवाल उठता है कि आखिर 16 करोड़ रुपये किन लाभुकों के खाते में गया.
रिपोर्ट में अंतर. जनवरी 2019 में नगर विकास को भेजी गयी रिपोर्ट के अनुसार प्रथम फेज के 305 लोगों को तीनों किस्त का, दूसरे फेज में 736 लोगों को प्रथम किस्त, तथा 749 को प्रथम एवं द्वितीय किस्त की राशि दी गयी है. वहीं तीसरे फेज में सिर्फ 524 को प्रथम किस्त का भुगतान हुआ है. जबकि अद्यतन भेजी गयी रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ 246 लाभुकों को तीनों किस्त का भुगतान किया गया है. दोनों ही रिपोर्ट में 59 लाभुकों का अंतर है. जबकि दूसरे फेज में 1485 लाभुकों को प्रथम किस्त का, 760 को द्वितीय किस्त का व 50 लाभुकों को तीसरे किस्त का भुगतान दिखाया जा रहा.
वहीं तीसरे फेज में 1055 को लाभ दिया गया है. जनवरी में भेजी गयी रिपोर्ट व अद्यतन भेजी गयी रिपोर्ट में काफी अंतर है. सबसे चौंकाने वाले रिपोर्ट यह है कि अभी नगर विकास को जो रिपोर्ट भेजी गयी है उसमें चौथे फेज के 702 लाभुकों का सिर्फ वर्क आर्डर दिखाया गया है. जबकि नगर परिषद द्वारा बैंक के माध्यम से 110 लाभुकों के खाते में फंड ट्रांसफर किया गया है. जबकि इन 8 महीनों में एक भी लाभुकों को किसी भी किस्त का भुगतान नहीं किया गया है.
डीपीआर में अंतर : नगर परिषद द्वारा जिन लाभुकों को आवास योजना का लाभ दिया गया है उन में से सैकड़ों लोगों का डीपीआर में नाम शामिल नहीं है. बिना डीपीआर में नाम शामिल हुए लाभ देना अनियमितता को दर्शाता है. सूत्र बताते है कि आवास योजना में अब तक करीब 29 करोड़ रुपये दिये गये हैं. जबकि नगर विकास सिर्फ 13 करोड़ ही दिखाता है. आखिर 16 करोड़ की राशि किसे दी गयी.
प्रक्रिया की होगी जांच
कार्यपालक पदाधिकारी आशुतोष आनंद चौधरी ने कहा है कि आलमारी में बंद पड़े शहरी आवास योजना की संचिकाओं की इंवेंटरी की प्रक्रिया पूरी की जा रही है. प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इस संबंध में कुछ कहा जा सकता है.
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