सार्वजनिक पुस्तकालय के नाम पर 1.25 करोड़ की गड़‍बड़ी!

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Mar 2019 8:21 AM

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रमण कुमार मिश्रा, मधुबनी : रहिका थाना क्षेत्र के कैटोला में सार्वजनिक पुस्तकालय के नाम पर करीब 1.25 करोड़‍ रुपये की गड़बड़ी किये जाने का मामला सामने आया है. इस संबंध में भाकपा माले के जिला सचिव ध्रुव नारायण कर्ण, अनिल सिंह, प्रेम कुमार झा व शंकर पासवान ने लोक शिकायत निवारण विभाग में आवेदन […]

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रमण कुमार मिश्रा, मधुबनी : रहिका थाना क्षेत्र के कैटोला में सार्वजनिक पुस्तकालय के नाम पर करीब 1.25 करोड़‍ रुपये की गड़बड़ी किये जाने का मामला सामने आया है. इस संबंध में भाकपा माले के जिला सचिव ध्रुव नारायण कर्ण, अनिल सिंह, प्रेम कुमार झा व शंकर पासवान ने लोक शिकायत निवारण विभाग में आवेदन देकर मामले की जांच की मांग की थी. जिस पर जिलाधिकारी के आदेश पर गठित दो सदस्यीय अधिकारियों की टीम ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट सौंप दी है.

इस जांच रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि पुस्तकालय निर्माण के नाम पर गड़बड़ी बरती गयी है. हालांकि इसमें किस किस लोगों की सहभागिता है और कौन अधिकारी इसमे शामिल है यह तो खुलासा नहीं किया जा सका है पर इसमें स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्यपालक अभियंता की कार्यशैली पर जरूर संदेह जताया है.
जांच रिपोर्ट में सदर अनुमंडल पदाधिकारी व उप समाहर्ता भूमि सुधार सदर मधुबनी ने कहा है कि जिस जगह सार्वजनिक पुस्तकालय के नाम पर विधान पार्षद के कोष से करीब 1 करोड़ 25 लाख पचासी हजार रुपये आये, उस जगह पर पुस्तकालय का नामों निशान तक नहीं है.
उस जगह पर एक निजी विद्यालय संचालित हो रहा है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर बार बार पैसे किस प्रकार मंगाये गये और बिना स्थल जांच के कैसे पैसे खर्च किये गये.
क्या है मामला . जिला पदाधिकारी व लोक शिकायत निवारण विभाग में दिये आवेदन में भाकपा माले नेता ध्रुव नारायण कर्ण व अन्य ने शिकायत किया था कि कैटोला स्थित जमीन को पुस्तकालय के नाम पर महंथ ने साल 2008 में राज्यपाल के नाम दान कर दिया.
जमीन का रकबा दो कठ्ठा है. जमीन की चौहद्दी में इस बात का जिक्र है कि दक्षिण दिशा में खड़ंजा सड़क है. इसके बाद विधान पार्षद के मद से सार्वजनिक पुस्तकालय के नाम पर पहली किस्त 2008 में 20 लाख का आया. दूसरा किस्त चेक लिस्ट के अनुसार खरंजा के लिये दिया गया. जो 85 हजार था.
यहां गौर करने वाली बात यह है कि जमीन के दान के समय ही चौहद्दी में दक्षिण दिशा में खरंजा दिया गया था. इसका मतलब यह हुआ कि जो खरंजा पहले से ही था उस पर दुबारा गलत तरीके से 85 हजार रुपये ले लिया गया. तीसरा किस्त भी नवंबर 2009 में दिया गया. रकम दस लाख रुपये थी. जो पुस्तकालय निर्माण के लिये दिया गया.
रकम एनआरईपी के कार्यपालक अभियंता के द्वारा खर्च किया गया. इसके बाद किस्त 40 लाख रुपये अगस्त 2010 में आया. फिर चौथा किस्त 25 लाख रुपये था. इसके बाद अंतिम किस्त पुस्तकालय के विकास,उपरी मंजिल, खरंजा, चहारदीवारी के निर्माण के नाम पर तीस लाख रुपये आया.
ढूंढ़ते रह जाआेगे पुस्तकालय. जिस पुस्तकालय के लिये 1 करोड़ 25 लाख 25 हजार रुपये दिया गया, वह धरातल पर नजर नहीं आ रहा है. इस संबंध में कैटोला के स्थानीय लोगों तक को पता नहीं है कि पुस्तकालय कहां पर है. चेक लिस्ट पर एनआरइपी के कार्यपालक अभियंता, कनीय अभियंता एवं सहायक
अभियंता का हस्ताक्षर है. यहां गौरतलब बात यह है कि पांच किस्त में पैसे आये पर पैसे कहां खर्च हुए इसकी जांच नहीं की गयी.
अधिकारी की जांच रिपोर्ट उन्हीं की भाषा में
जांच अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए कहा है कि मामले में अनियमितता बरती गयी है. तथा सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया है. जिसे देखकर हतप्रभ रह जाना पड़ता है. पर अभिलेश के विधिवत संधारित नहीं होने तथा प्राक्कलन एवं मापी पुस्तिका के अध्ययन के लिये जांच अधिकारियों के तकनीकी रूप से समर्थ नहीं होने के कारण अनियमितता में शामिल कुल राशि एवं अनियमितता में संलिप्त वास्तविक दोषी व्यक्ति को चिन्हित कर पाने में कठिनाई महसूस हो रही है. यह पता नहीं चल पा रहा है कि कितनी राशि सामग्री मद में व्यय की गयी और कितने श्रमिक मद में. इसमें कई व्यक्तियों की संलिप्तता से इंकार नहीं किया जा सकता.
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