नहीं चाहिए राहत, वापस लें अनाज

Published at :09 Dec 2017 5:07 AM (IST)
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नहीं चाहिए राहत, वापस लें अनाज

शिकायत. गोपलखा की महादलित महिलाएं पहुंचीं कलेक्ट्रेट मधुबनी : जिले में जुलाई माह में आये बाढ़ के पीड़ितों को राहत अनुदान समय से नहीं मिलने एवं राहत की राशि खाता में जाने को लेकर मुखिया एवं विकास मित्र द्वारा कथित रूप से रुपये की मांग करने का आरोप लेकर लगभग एक दर्जन महिलाएं डीएम से […]

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शिकायत. गोपलखा की महादलित महिलाएं पहुंचीं कलेक्ट्रेट

मधुबनी : जिले में जुलाई माह में आये बाढ़ के पीड़ितों को राहत अनुदान समय से नहीं मिलने एवं राहत की राशि खाता में जाने को लेकर मुखिया एवं विकास मित्र द्वारा कथित रूप से रुपये की मांग करने का आरोप लेकर लगभग एक दर्जन महिलाएं डीएम से शिकायत करने शुक्रवार को समाहरणालय पहुंची. कोठिया पंचायत के गोपलखा गांव की महिलाओं ने अपने सिर पर राहत के अनाज को लेकर आयी थी. जिला पदाधिकारी का मुख्यमंत्री कार्यक्रम को लेकर व्यस्तता के कारण उन महिलाओं को आपदा प्रबंधन विभाग भेज दिया गया. आपदा प्रबंधन विभाग के मुख्य गेट पर गोपलखा गांव की महादलित महिलाओं ने सिर पर राहत के अनाज को लेकर अपनी आपबीती सुनाई.
कम दिया गया अनाज
महादलित महिलाओं ने कहा कि उन्हें कल (गुरुवार) को मुखिया द्वारा राहत का अनाज दिया गया है वह भी कम है. 7 किलो अनाज के बदले प्रत्येक महिलाओं से 10 रुपए प्रति महिला से परिवहन का खर्च भी कथित तौर पर मुखिया के द्वारा लिया गया है. गोपलखा गांव की महादलित महिलाओं में सुनीता देवी, मरनी देवी, अमोला देवी, संजितिया देवी, मलभोगिया देवी, प्रमिला देवी, सालो देवी, अमेरिकी देवी, सविना देवी, सविता देवी, वार्ड सदस्य हरिश्चंद्र मुखिया वार्ड नंबर 2 के वार्ड सदस्य ने सामूहिक रूप से बताया कि बाढ़ में उनके घर टूट गये हैं पर मुखिया द्वारा कथित रूप से इंदिरा आवास के लिए भी रिश्वत की मांग की जा रही है.
एक लाख दिलाने के बदले लिया एक हजार
बाढ़ पीड़ित दलित महिलाओं ने बताया कि विकास मित्र के पति विपिन सदाय द्वारा बाढ़ पीड़ित महिलाओं से गृह निर्माण के लिए एक लाख रुपये दिलाने के बदले एक हजार रुपया प्रति महिला से कथित रूप से रिश्वत लिया है.
मुखिया ने लिया भाड़ा मद में 10 रुपये
बाढ़ पीड़ित सरिता देवी ने कहा कि जुलाई माह में बाढ़ आया था. तब से लेकर दिसंबर माह तक मुखियाजी दौड़ाते रहे. कल जाकर राहत के 7 किलो अनाज दिये हैं. यह अनाज देने में भी भाड़ा के मद में 10 रुपये लिया है. सविना देवी ने कहा कि मुखिया जी थोड़ा अनाज दिये एवं कहा कि जितना जिला से आया है सब दे दिये है. उपर से 10 रुपये भी लिया. अमेरिकी देवी ने कहा कि बाढ़ राहत में कपड़ा, बर्तन एवं अनाज के लिए मिलने वाला 6 हजार रुपया भी उसे नहीं मिला है. बच्चे भूखे सो रहे हैं. सालो देवी ने भी कहा कि 7 किलो अनाज के लिए छह माह तक दौड़ती रही. गुरुवार को अनाज मिला भी तो कम. बाढ़ में घर टूट चुका है. कोई देखने वाला नहीं है. प्रमिला देवी ने कहा कि बाढ़ में सरकार द्वारा कुछ नहीं मिला. अब तक पॉलीथिन के नीचे ही जीवन बसर हो रहा है. घर नहीं रहने पर बच्चे व बूढ़े कैसे जिंदगी बसर करेंगे ?
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