शिक्षा विभाग का चार करोड़ 36 लाख सरेंडर

-कोषागार द्वारा विपत्र अस्वीकार किये जाने के कारण नहीं हो सकी निकासी मधुबनीः जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के योजना लेखा विभाग से लगभग चार करोड़ 36 लाख रुपये सरेंडर कर दिये गये. कुछ राशि विभाग को वापस किया गया और कुछ राशि विपत्र कोषागार में स्वीकार नहीं किये जाने के कारण निकासी नहीं हो सकी. […]
-कोषागार द्वारा विपत्र अस्वीकार किये जाने के कारण नहीं हो सकी निकासी
मधुबनीः जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के योजना लेखा विभाग से लगभग चार करोड़ 36 लाख रुपये सरेंडर कर दिये गये. कुछ राशि विभाग को वापस किया गया और कुछ राशि विपत्र कोषागार में स्वीकार नहीं किये जाने के कारण निकासी नहीं हो सकी.
सर्वाधिक एक करोड़ 33 लाख 65 हजार रुपये जो उच्च माध्यमिक विद्यालयों के अर्धनिर्मित भवन को पूर्ण करने के लिये आवंटित थे की निकासी कोषागार से नहीं हो सकी. इसी तरह छात्र छात्र परिभ्रमण के लिये आवंटित एक करोड़ 16 लाख 80 हजार रुपये का विपत्र कोषागार में स्वीकार नहीं किये जाने के कारण राशि की निकासी नहीं की गई.
कक्षा 11 और 12 की बालिका पोशाक योजना की 89 लाख रुपये भी विभाग को वापस कर दिये गये. बालक साइकिल योजना के 69 लाख रुपये और बालिका साइकिल योजना के 62 हजार रुपये भी विभाग को वापस कर दिये गये.
बालिका प्रोत्साहन योजना का 19 लाख रुपये भी विभाग को वापस कर दिया गया. बच्चों को नि:शुल्क एवं शिक्षा के अधिकार कानून के अंतर्गत मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों को आवंटित सात लाख 37 हजार 181 रुपये का विपत्र कोषागार में स्वीकार नहीं किये जाने के कारण राशि की निकासी नहीं हो सकी.
वित्तीय वर्ष 2013-14 में मदवार आवंटन दिया गया था. वित्त विभाग के प्रधान सचिव से विभागीय स्तर से शिथिलीकरण के आदेश की मांग की गई पर तत्संबंधी आदेश प्राप्त नहीं होने के कारण मदवार कोषागार में विपत्र प्राप्त नहीं किये जाने के कारण राशि निदेशक प्राथमिक शिक्षा को वापस कर दी गई. जिला शिक्षक अपीलीय प्राधिकार संचालन के लिये आवंटित 89 हजार 918 रुपये भी विभाग को वापस कर दिये गये.
क्या कहते हैं अधिकारी
डीपीओ योजना एवं लेखा रामाश्रय प्रसाद ने बताया कि प्राप्त आवंटन के विरुद्ध व्यय की गई राशि के बाद अवशेष बचे राशि को भी विभाग को वापस किया गया है.
डीपीओ श्री प्रसाद ने बताया कि शिथिलीकरण का आदेश प्राप्त नहीं होने के कारण मदवार कोषागार में विपत्र प्राप्त नहीं किये जाने के कारण अव्यवहृत राशि प्रत्यर्पित की गई.
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