स्वतंत्रता सेनानी अमर शहीद वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव दिवस के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा

Published by : Kumar Ashish Updated At : 23 Apr 2026 6:32 PM

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80 वर्ष की उम्र में भी आदम्य साहस एवं अद्भुत युद्ध कौशल से अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिये थे.

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मधेपुरा.

महान स्वतंत्रता सेनानी अमर शहीद वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव दिवस के अवसर पर आज यहां वेदव्यास महाविद्यालय मधेपुरा में वीर कुंवर सिंह विचार मंच के तत्वावधान में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गयी. इस अवसर पर उनके तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर लोगों ने श्रद्धांजलि दी. मौके पर विचार मंच के अध्यक्ष एवं प्राचार्य डॉ आलोक कुमार ने कहा कि वीर कुंवर सिंह 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक थे, उन्होंने 80 वर्ष की उम्र में भी आदम्य साहस एवं अद्भुत युद्ध कौशल से अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिये थे. उनका साहस, नेतृत्व क्षमता और देशभक्ति की भावना हमें विशेष रूप से प्रभावित करती है. विचार मंच के संरक्षक एवं भाकपा नेता प्रमोद प्रभाकर ने कहा कि आज का दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में वीर कुंवर सिंह की साहस वीरता और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में उनके योगदान को याद करने की है. 1858 में आज के हीं दिन 80 वर्षीय कुंवर सिंह घायल अवस्था में जगदीशपुर के पास ब्रिटिश सेना को करारी शिकस्त दी थी एवं जगदीशपुर किले से यूनियन जैक का झंडा उतार कर अपना विजय पताका फहराया था. पूर्व वार्ड पार्षद एवं विचार मंच के उपाध्यक्ष ध्यानी यादव ने कहा कि 1857 के संग्राम में वीर कुंवर सिंह जगदीशपुर में ब्रिटिश सेना को पराजित करते हुये रामगढ़ आजमगढ़ ,गाजीपुर ,बलिया लखनऊ होते दिल्ली पहुंच गये. उन्हें गुरिल्ला युद्ध की महारत हासिल थी. उनकी युद्ध योजना की जानकारी अंग्रेजों को नहीं मिल पाती थी, इस कारण वे कभी पकडे नहीं गये. विचार मंच के महासचिव युवा अधिवक्ता राहुल कुमार ने कहा कि वीर कुंवर सिंह एक अद्वितीय योद्धा के साथ-साथ सामाजिक न्याय एवं सांप्रदायिक सद्भाव के प्रतीक थे, उनके सेना में सभी जाति एवं धर्म के लोग महत्वपूर्ण पदों पर थे. उन्होंने अपने राज में मंदिर एवं मस्जिद दोनों बनबाए, कुएं एवं तालाब खुदवाए. विचार मंच के उपाध्यक्ष अधिवक्ता दिलीप कुमार सिंह ने कहा कि वीर कुंवर सिंह की वीरता और बलिदान हमारी सबसे बड़ी विरासत है. अंग्रेजी सेना की गोली हाथ में लगने से हाथ हीं काट कर फेंक दिया परंतु अपने रण कौशल से अंग्रेजों को पराजित कर जगदीशपुर किला पर विजय पताका फहरा दिया. छात्र नेता निशांत यादव एवं वसीमउद्दीन उर्फ नन्हें ने कहा कि वीर कुंवर सिंह की शोर्य गाथा सदैव ही हमें प्रेरित करती रहेगी. 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में उनका युद्ध कौशल और साहस अद्वितीय था. वार्ड सदस्य संघ के जिलाध्यक्ष प्रतिनिधि रमेश कुमार शर्मा एवं विचार मंच के उपाध्यक्ष वीरेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में वीर कुंवर सिंह का रणकौशल, वीरता एवं शहादत भूलया नहीं जा सकता. समाजसेवी बाबाजी सिंह एवं दिलीप पटेल ने कहा कि 80 बरस की हड्डी में जागा जोश पुराना था, सब कहते हैं वीर कुंवर सिंह बड़ा वीर मर्दाना था. इस अवसर पर दिवाकर कुमार, नरेश सिंह, रणधीर कुमार, गोपाल सिंह, रजनीश उर्फ बमबम कुमार, विभाश कुमार ,अमर कुमार, सलमान खान ,चंदन कुमार, श्याम सुंदर मंडल आदि बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे.

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