मधेपुरा. महिला सशक्तिकरण के लिए पुरुष प्रधान समाज की सोच में बदलाव लाना आवश्यक है. यह बदलाव जागरूकता फैलाने के माध्यम से ही संभव हो सकता है. उक्त बातें बीएनएमयू कुलपति प्रो विमलेंदु शेखर झा ने शनिवार को भूपेंद्र नारायण मंडल वाणिज्य महाविद्यालय मधेपुरा में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सेमिनार के दौरान उक्त बातें कही. सेमिनार का विषय “21वीं सदी में महिला की दशा और दिशा ” था. कुलपति ने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सबसे पहले उन्हें शिक्षित होना पड़ेगा. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक लड़के के पढ़ने से एक व्यक्ति शिक्षित होता है, तो एक महिला के पढ़ने से पूरा परिवार शिक्षित होता है. महिला ही अपने बच्चों की प्रथम गुरु होती है. महिलाओं पर कभी नहीं थोपनी चाहिये अपनी इच्छाएं कुलपति ने कहा कि महिलाओं को हर दृष्टि से सम्मान देना चाहिए और वर्किंग प्लेसेज में महिलाओं को वह सम्मान नहीं मिलता, जो उन्हें मिलना चाहिये. कुलपति ने कहा कि महिलाओं के लिए हर वर्किंग प्लेस में स्पेशल सेल की व्यवस्था होनी चाहिये और महिलाओं के लिए अलग शौचालय और बैठने की व्यवस्था की जाये. उन्होंने कहा कि हमें 2047 तक भारत को विश्व गुरु और एक विकसित राष्ट्र बनाना है, तो निश्चित रूप से महिलाओं को सशक्त बनाना होगा. महिलाओं को पूरी आजादी दीजिये, वह अपने पैरों पर खड़ी होंगी. कुलपति ने जोर देकर कहा कि महिलाओं पर अपनी इच्छाएं कभी नहीं थोपनी चाहिये. उनका सशक्तिकरण तभी संभव है जब उन्हें उनके अनुसार शिक्षा मिले. उन्होंने कहा कि जितना अधिक महिलायें शिक्षित होंगी, उतना उनका मस्तिष्क विकसित होगा और उनकी विश्लेषणात्मक क्षमता भी बढ़ेगी. महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए शिक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण कुलसचिव प्रो विपिन कुमार राय ने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए शिक्षा महत्वपूर्ण है. उन्हें अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलना चाहिये, ताकि वह आत्मनिर्भर बन सके और अपने निर्णय खुद ले सके. विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए रमेश झा महिला कॉलेज सहरसा की प्राचार्या प्रो उषा सिन्हा ने कहा कि महिलाओं का शिक्षित होना और आगे बढ़ना समाज के ऊपर निर्भर करता है. पुरुषों को भी महिला का साथ देना होगा. कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय प्राचार्य डाॅ संजीव कुमार व संचालन अर्चना सहाय व अनामिका ने किया. मौके पर डॉ सत्येंद्र कुमार, एनएसएस पदाधिकारी डॉ शंभु राय, डॉ कमलेश कुमार, डॉ शेफालिका, डॉ मीरा कुमारी, डॉ प्रभाकर कुमार आदि मौजूद थे.
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