टीबी के उपचार में पोषण की भूमिक अहम, सहायता राशि हुआ एक हजार

Published by :Kumar Ashish
Published at :20 Apr 2026 7:11 PM (IST)
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टीबी के उपचार में पोषण की भूमिक अहम, सहायता राशि हुआ एक हजार

जिले को क्षय रोग (टीबी) मुक्त बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है

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मधेपुरा जिले को क्षय रोग (टीबी) मुक्त बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है. “टीबी हारेगा, देश जीतेगा ” के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए सोमवार को सदर अस्पताल की ओपीडी में एक विशेष कैंप का आयोजन किया गया. इस दौरान स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अब टीबी मरीजों को पोषण के लिए मिलने वाली सहायता राशि को 500 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है. जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में जांच, दवा और परामर्श पूरी तरह मुफ्त है. -अधिकारियों ने खुद बढ़ाया मदद का हाथ- कैंप में स्वास्थ्य समिति के प्रबंधक प्रिंस कुमार, सदर अस्पताल प्रबंधक कुमार नवनीत चंद्रा सहित एएनएम दीप्ति चंद्रा, रोशन कुमार, संजय कुमार और रिक्की कुमारी जैसे स्वास्थ्य कर्मियों ने मरीजों के पौष्टिक आहार के लिए जागरूकता फैलायी. अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान 100 दिनों का है. … उपचार में पोषण की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है. इसीलिए सरकार ने मासिक सहायता राशि को दोगुना करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है. अब प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत मरीजों के परिजनों को भी सामाजिक समर्थन के दायरे में लाया जाएगा. प्रिंस कुमार, प्रबंधक, जिला स्वास्थ्य समिति जिले में टीबी के खिलाफ जंग के आंकड़े इस प्रकार हैं : कुल नए मरीज : 2000 स्वस्थ हुए मरीज : 800 इलाज रत्न मरीज : 2000 -इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज- गैर संचारी रोग विशेषज्ञ डॉ फूल कुमार ने बताया कि टीबी जानलेवा नहीं है, बशर्ते सही समय पर इलाज शुरू हो. यदि आपको या किसी परिचित को निम्नलिखित लक्षण दिखें, तो तुरंत जांच कराएं : 1. लगातार बुखार रहना 2. अनवरत खांसी का आना 3. शरीर में अत्यधिक थकान महसूस होना -निजी अस्पतालों को भी निर्देश- संचारी रोग पदाधिकारी ने बताया कि केवल सरकारी ही नहीं, बल्कि प्राइवेट अस्पतालों को भी टीबी मरीजों की जानकारी साझा करने के निर्देश दिए गए हैं. लक्ष्य यही है कि कोई भी मरीज इलाज से वंचित न रहे और समय रहते इस बीमारी को मात दी जा सके. – जीवन की गुणवत्ता में सुधार- इस योजना का मुख्य उद्देश्य तपेदिक के बोझ को कम करना और मरीजों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है. इलाज पूरा होने तक हर महीने मिलने वाली 1000 रुपये की यह राशि सीधे मरीज के खाते में जाएगी, ताकि वे अपनी शारीरिक ताकत बनाए रख सकें.

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