एक शिक्षक की अज्ञानता से कई पीढ़ियां हो जाती है तबाह : पूर्व कुलपति

Updated at : 30 Aug 2024 9:28 PM (IST)
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एक शिक्षक की अज्ञानता से कई पीढ़ियां हो जाती है तबाह : पूर्व कुलपति

एक शिक्षक की अज्ञानता से कई पीढ़ियां हो जाती है तबाह : पूर्व कुलपति

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प्रतिनिधि, मधेपुरा

विश्वविद्यालय शिक्षाशास्त्र विभाग में शुक्रवार को इंडक्शन मीट-2024 का आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन बीएनएमयू के पूर्व कुलपति प्रो ज्ञानंजय द्विवेदी ने किया. पूर्व कुलपति ने कहा कि ज्ञान के बिना डिग्री का कोई मूल्य नहीं है. इसलिए हमारा मुख्य फोकस ज्ञानार्जन व कौशल विकास होना चाहिये. उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं को कक्षाओं में नियमित रूप से आना चाहिये व अपने ज्ञानात्मक, भावात्मक व क्रियात्मक तीनों पहलुओं में सामंजस स्थापित करने की कोशिश करनी चाहिये. उन्होंने कहा कि शिक्षकों का दक्ष होना सबसे जरूरी है. एक चिकित्सक की अज्ञानता से एक व्यक्ति की जान जा सकती है, एक वकील की अज्ञानता से एक व्यक्ति को दोषी ठहराया जा सकता है, एक ड्राइवर की अज्ञानता से एक गाड़ी में सवार कुछ लोगों की जान जा सकती है, लेकिन एक शिक्षक की अज्ञानता से कई पीढ़ियां तबाह हो जाती है. अतः हमें समाज को बेहतर दिशा देने के लिए अपने शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार करना होगा. यदि समय रहते हमने इस पर ध्यान नहीं दिया, तो इसके भयानक परिणाम झेलने होंगे.

शिक्षकों में ज्ञान व चरित्र दोनों का होना है आवश्यक

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व डीएसडब्ल्यू प्रो राजकुमार सिंह ने कहा कि शिक्षक बनना एक जिम्मेदारी का काम है. शिक्षकों में ज्ञान व चरित्र दोनों का होना आवश्यक है. विशिष्ट अतिथि जिला कल्याण पदाधिकारी राम कृपाल प्रसाद ने कहा कि मानव जीवन में शिक्षक का सबसे अधिक महत्व है. शिक्षक हमें अज्ञानता रूपी अंधकार से बाहर निकालते हैं. सम्मानित अतिथि के रूप में बोलते हुए आइक्यूएसी निदेशक प्रो नरेश कुमार ने बताया कि बीएड में प्रवेश विशेष योग्यताधारी छात्र-छात्राओं का ही होता है. यह पाठ्यक्रम हमें सामान्य नागरिकों से विशिष्ट नागरिक बनाने में मदद करती है.

छात्रों की सफलता से जुड़ी है शिक्षक की पहचान

ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय मधेपुरा में दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डाॅ सुधांशु शेखर ने कहा कि शिक्षा मानव को पशु बनने से रोकती है और उसे देवत्व की ओर ले जाती है. कार्यक्रम के अंत में बीएड विभागाध्यक्ष डाॅ सुशील कुमार ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया. उन्होंने बीएड पाठ्यक्रम के बारे में छात्र-छात्राओं को अवगत कराते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर भी प्रकाश डाला. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शिक्षाशास्त्र विभाग के प्रोफेसर इंचार्ज प्रो राजीव कुमार मल्लिक ने कहा कि शिक्षक अपने छात्रों से जाने जाते हैं. छात्रों की सफलताओं से शिक्षकों की पहचाने जुड़ी होती है. हमें शिक्षकों का हमेशा सम्मान करना चाहिये.

छात्र के हित की कामना करते हैं शिक्षक

प्रो राजीव कुमार मल्लिक ने कहा कि शिक्षक हमेशा अपने छात्र के हित तथा उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं. जब एक छात्र सफल होता है, तो उसके माता-पिता से भी ज्यादा प्रसन्नता उसके शिक्षक को होती है. इसके पूर्व अतिथियों ने अतिथियों ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित किया. दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया. अतिथियों को पौधा देकर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम का संचालन एमएड विभागाध्यक्ष डाॅ शिवेंद्र प्रताप सिंह ने किया. कार्यक्रम में डाॅ माधुरी कुमारी, संतोष कुमार, डाॅ अंजू प्रभा, डाॅ राम सिंह यादव, डाॅ वीर बहादुर, डाॅ प्रिंस फिरोज अहमद, डाॅ रूपा कुमारी, डाॅ शैलेश कुमार आदि उपस्थित थे.

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