मधेपुरा में सिविल सर्जन का कथित रिश्वत लेते वीडियो वायरल, DM ने दिए जांच के आदेश
सिविल सर्जन विजय कुमार | Prabhat Khabar Network
मधेपुरा सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार का कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए वीडियो वायरल हुआ है. इस वीडियो ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है. जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं.
Madhepura News: मधेपुरा सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार का कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है. वीडियो में एक व्यक्ति के सामने कथित रूप से रुपये दिये जाने का दृश्य दिखाई दे रहा है. वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर तरह-तरह के दावे किये जा रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाये जा रहे हैं.
हालांकि, अभी तक प्रशासन ने वायरल वीडियो की सत्यता या उसमें दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिये हैं. अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वायरल वीडियो वास्तविक है या उसमें किसी तरह की छेड़छाड़ की गयी है.
DM ने दिए जांच के आदेश
मामले की जानकारी मिलने के बाद डीएम अभिषेक रंजन ने जांच के आदेश दिये हैं. प्रशासन की ओर से वायरल वीडियो की सत्यता, उसमें दिखाई देने वाले घटनाक्रम और वीडियो में शामिल लोगों के संबंध में जानकारी जुटायी जा रही है.
जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश होगी कि वीडियो कब और कहां बनाया गया था. साथ ही वीडियो में दिखाई देने वाले कथित लेन-देन का वास्तविक कारण क्या था, इसकी भी जांच की जायेगी.
प्रशासनिक जांच में संबंधित लोगों से पूछताछ और उपलब्ध तथ्यों की पड़ताल भी की जा सकती है.
एडिटिंग हुई या वीडियो असली, यह भी जांच का हिस्सा
इस मामले में सबसे अहम सवाल वायरल वीडियो की प्रमाणिकता का है. सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे वीडियो को सही मानने से पहले उसकी तकनीकी जांच जरूरी है.
जांच के दौरान यह देखा जा सकता है कि वीडियो मूल रूप में है या उसमें किसी तरह की कटिंग, एडिटिंग अथवा छेड़छाड़ की गयी है. वीडियो की रिकॉर्डिंग का समय, स्थान और उसमें दिखाई देने वाले घटनाक्रम की भी पड़ताल की जा सकती है.
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान संबंधित पक्षों से जानकारी ली जायेगी. यदि वीडियो में लगाये गये आरोप सही पाये जाते हैं तो नियमानुसार संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.
वहीं, यदि वीडियो भ्रामक या छेड़छाड़ किया हुआ पाया जाता है, तो उसके प्रसार और उससे जुड़े अन्य पहलुओं पर भी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है.
इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी मानना उचित नहीं होगा.
Madhepura News: सिविल सर्जन ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
वायरल वीडियो को लेकर सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार ने आरोपों को खारिज किया है. उन्होंने कहा कि पूरा मामला बेबुनियाद है. उनका कहना है, "काम करने वाले को इसी तरह त्रस्त किया जाता है."
अब प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल वीडियो में दिख रहा घटनाक्रम वास्तव में क्या है और उस कथित लेन-देन का पूरा संदर्भ क्या था.
जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
जिला प्रशासन की ओर से जांच के आदेश के बाद अब इस मामले में अगली तस्वीर जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही साफ होगी.
जांच में वीडियो की प्रमाणिकता के साथ यह भी पता लगाया जायेगा कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति कौन है, कथित रुपये किसने और किस उद्देश्य से दिये तथा पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता क्या है.
फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने स्वास्थ्य विभाग में हलचल जरूर बढ़ा दी है, लेकिन आधिकारिक जांच पूरी होने तक इस मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी.
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