दूर-दूर तक फैली है देवों के देव महादेव सर्वेश्वर नाथ की महिमा

Updated at : 11 Aug 2024 8:31 PM (IST)
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दूर-दूर तक फैली है देवों के देव महादेव सर्वेश्वर नाथ की महिमा

महादेव सर्वेश्वर नाथ की महिमा

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फोटो – मधेपुरा-05 आलमनगर स्थित महादेव सर्वेश्वर नाथ की मंदिर.

ब्रजेश आलमनगर, मधेपुरा

देवों के देव महादेव सर्वेश्वर नाथ की महिमा की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है. क्षेत्र के लोगों का आस्था का सैलाब बाबा सर्वेश्वर नाथ है, सर्वेश्वर नाथ के दरबार में जो भी आते हैं, उनका मुराद अवश्य पूरा होती है. किदवंती है कि सर्वेश्वर नाथ महादेव के शिवलिंग अपने आप प्रकट हुए है. इस कारण क्षेत्र के लोग इसे आप रूपी भोले बाबा भी कहते हैं. क्षेत्र के बूढ़े-बुजुर्ग सहित पंडित अलख मिश्र का कहना है कि बाबा सर्वेश्वर नाथ स्वयं प्रकट हुए हैं.

घने जंगल में था शिवलिंग

आलमनगर से लगभग दो किमी दक्षिण पूर्व में कभी घनघोर कांटा का जंगल हुआ करता था. लगभग 1930 ई में राजस्थान से आये एक महात्मा स्वामी माधवानंद भटकते-भटकते आलमनगर आये. वे जड़ी-बूटी से लोगों का कुष्ठ रोग का इलाज एवं साधना भी करते थे. इसी क्रम में जड़ी बूटी की खोज करते-करते वे घने जंगल में चले गये, जहां उन्हें एक विशालकाय पीपल के वृक्ष के छेद में प्रकाश दिखाई पड़ा, वे हैरत एवं आश्चर्य चकित होकर पीपल के वृक्ष के पास गये. वहां शिवलिंग था उस पर फूल एवं बेलपत्र ताजा चढ़ा हुआ था. उन्हें घोर आश्चर्य हुआ कि इस भयावह जंगल में कौन शिवलिंग का पूजा करता है.

माय स्वयं करती थी दुग्धाभिषेक

स्वामी माधवानंद ने यह देखने के लिए दूसरे दिन इंतजार करते रहे. परंतु कोई दिखाई नहीं दिया. फिर फूल एवं बेलपत्र चढ़ा पाया एवं गाय आई और शिवलिंग पर अपने स्तन से दूध गिरा कर चली गयी. स्वामी माधवानंद ने सभी लोगों को इस बाबत बताया व पीपल के पैर को उन्होंने अपने हाथों से हटा कर वहां एक झोपड़ी बनाकर पूजा करने लगे. उसी के पास गांव के लोगों को शिक्षा के लिए उन्होंने विद्यालय भी खोला. लोगों का आना-जाना शुरू हुआ. हालांकि कहा जाता है कि गाय चराने चरवाहा जब अपने गाय को लेकर जाते थे तो गाय जंगल की और चली जाती थी और शिवलिंग पर रोज दूध अर्पित कर देती थी. धीरे-धीरे यह बात गांव के लोगों के बीच फैलने लगी लोगों का आस्था बढ़ने लगा. जंगल को काटा गया कुछ लोगों द्वारा पूजा करना शुरू किया गया,

स्वामी माधवानंद ने बनाया था छोटा मंदिर

स्वामी माधवानंद के द्वारा एक छोटा सा मंदिर बनाया गया एवं धीरे-धीरे सर्वेश्वर नाथ की ख्याति फैलती गई. कहा जाता है कि रात के वक्त सर्वेश्वर नाथ के मंदिर के पास जाने में लोगों को भय लगता था. कई लोगों ने रात को देखा कि मध्य रात्रि कलश के टकराने की आवाज के साथ उस पर नागराज बैठ कर आते हैं और मंदिर में जल चढ़ाकर फिर कलश को कुएं में डाल देते हैं. जिससे लोगों में भय बना रहता था. लोग रात को नहीं जाते थे. धीरे-धीरे बाबा सर्वेश्वर नाथ की आस्था क्षेत्र के लोगों में फैलती गयी और लोगों की असीम आस्था के कारण आज वहां विशाल मंदिर है एवं लोगों की भीड़ लगी रहती है. हालांकि जिस जगह सर्वेश्वर नाथ का मंदिर है उस जगह के पास पोखर की खुदाई होने लगी तो कई मूर्ति भी मिली जो मंदिर में विराजमान हैं. आलमनगर के गांव से ऊंची जगह है जहां सर्वेश्वर नाथ मंदिर है. लोगों के आस्था के कारण विशाल मंदिर बना यह जगह शाह आलमगीर की सल्तनत के समय महल था. आज भी खुदाई के दौरान मोटे मोटे दीवार के अवशेष जमीन में मौजूद हैं. वही जब स्कूल के बगल में 90 के दशक में दूसरे पोखर की खुदाई होने लगी तो सात कुआं के साथ अन्य अवशेष भी खुदाई के दौरान जमीन के नीचे पाये गये. हालांकि अब घनघोर जंगल मनोरम एवं दर्शनीय दृश्य में बदल चुकी है. लोगों के आस्था के कारण आज सर्वेश्वर नाथ का विशाल मंदिर है कहा जाता है कि जिसने भी बाबा सर्वेश्वर की पूजा कि उसकी बाबा सभी मनोकामना पूर्ण कर देते हैं लोगों की आस्था के कारण यहां कई मंदिर विवाह भवन एवं धर्मशाला बन गये है. खासकर सावन में लाखों लोग जलाभिषेक करते है एवं क्षेत्र से दूर-दूर से लोग बाबा सर्वेश्वर नाथ के शरण में आते हैं. हजारों डाक बम जल चढ़ाते है. इनकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली हुई है.

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