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मॉडल बस स्टैंड में अव्यवस्थाओं का अंबार, असामाजिक तत्वों का बना अड्डा

Updated at : 28 Dec 2025 7:15 PM (IST)
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मॉडल बस स्टैंड में अव्यवस्थाओं का अंबार, असामाजिक तत्वों का बना अड्डा

अत्याधुनिक बस स्टैंड आज विकास की मिसाल नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, बदइंतजामी और करोड़ों की बर्बादी का प्रतीक बनता जा रहा है.

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प्रशासनिक लापरवाही, बदइंतजामी व करोड़ों की बर्बादी का प्रतीक बन रहा अत्याधुनिक बस स्टैंड

मधेपुरा.

जिला मुख्यालय के पश्चिमी बायपास पर करोड़ों की लागत से बना अत्याधुनिक बस स्टैंड आज विकास की मिसाल नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, बदइंतजामी और करोड़ों की बर्बादी का प्रतीक बनता जा रहा है. यात्रियों की सुविधा के नाम पर बनाये गये इस बस स्टैंड पर आज हालात ऐसे हैं कि न तो यात्री के लिए कोई व्यवस्था है और न ही बस संचालक नियमित बस का संचालन को तैयार हैं. नतीजतन बस स्टैंड वीरान, सुविधाएं जर्जर एवं असामाजिक तत्वों का डेरा बन गया है.

सिर्फ कागजों में मौजूद हैं सुविधाएं

बस स्टैंड पर वेटिंग हॉल, प्लेटफॉर्म, रैंप, पेयजल, शौचालय, यूरिनल, रोशनी एवं सुरक्षा जैसी तमाम सुविधाएं कागजों में तो मौजूद हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है. वायरिंग उखड़ी हुई, बिजली बोर्ड टूटे पड़े हैं. कई जगहों पर शॉर्ट सर्किट का खतरा मंडरा रहा है. प्लेटफॉर्म और प्रतीक्षालय में गंदगी का अंबार है. बताया जा रहा है कि महीनों से यहां नियमित सफाई तक नहीं हुई. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यहां से सिर्फ पटना रूट की बसें दिन में लगती है, शाम होते ही निकल जाती हैं. जबकि अन्य जगहों के लिए बसों का संचालन नहीं होता है. मधेपुरा से होकर गुजरने वाली कई बसें तो बस स्टैंड में प्रवेश ही नहीं करतीं, बल्कि सड़क किनारे यात्रियों को उतार-चढ़ाव कराती है. इससे एक ओर जहां यात्रियों की सुरक्षा खतरे में है, वहीं दूसरी ओर सड़क जाम और दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गयी है.

करीब 22 लाख का शौचालय बना खंडहर

बस स्टैंड परिसर में करीब 22 लाख रुपये की लागत से बने शौचालय को लेकर भी सवालों का बाढ़ है. लोगों का आरोप है कि शौचालय या तो बंद रहता है या फिर उसकी हालत इतनी बदहाल है कि उपयोग करना किसी सजा से कम नहीं. गंदगी, बदबू और अव्यवस्था ने दिन में लगे बस के ड्राइवर एवं कंडक्टर सहित अन्य लोगों को मजबूर कर दिया है कि वे खुले में शौचालय जाने को विवश हों.

प्रशासनिक देखरेख के अभाव में उजड़ता बस स्टैंड

नव-निर्मित बस स्टैंड में यात्रियों के बैठने के लिए स्टील चेयर लगायी गयी थी, शेड और रैंप बनाये गये थे, ताकि बुजुर्ग, दिव्यांग और महिलाएं आसानी से बस तक पहुंच सकें, लेकिन रखरखाव के अभाव में ये सभी सुविधाएं अनउपयोगी हो चुकी हैं. रात होते ही बस स्टैंड अंधेरे में डूब जाता है, जिससे असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने लगता है. प्रशासन एवं नगर परिषद की उदासीनता के कारण बस स्टैंड का उद्देश्य ही समाप्त होता जा रहा है. स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये खर्च तो कर दिये गये, लेकिन न गुणवत्ता का ध्यान रखा गया और न रख-रखाव की कोई ठोस व्यवस्था की गयी.

सवालों के घेरे में प्रशासन की चुप्पी

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट के बावजूद प्रशासन आखिर मौन क्यों है? क्या करोड़ों की लागत से बना बस स्टैंड सिर्फ उद्घाटन और फोटो सेशन के लिए था? यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो यह बस स्टैंड पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो जायेगा.

नाला निर्माण में अनियमितता को लेकर उठी आवाज, तो बस स्टैंड के लिए अब तक क्यों नहीं ?

शहर में इन दिनों नाला निर्माण में अनियमितताओं को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं नेता लगातार आवाज बुलंद कर रहे हैं. जगह-जगह धरना-प्रदर्शन, बयानबाजी और प्रशासन को घेरने की कोशिशें हो रही हैं, लेकिन इसी बीच एक बड़ा और असहज सवाल खड़ा होता है कि क्या शहर की समस्याएं केवल वहीं तक सीमित हैं, जहां राजनीतिक लाभ दिखता है. कई वर्षों से वीरान पड़ा नया बस स्टैंड, आज भी बदहाली की मार झेल रहा है. इसको लेकर न तो सत्ता पक्ष, न ही विपक्षी दलों एवं न ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इसे नियमित रूप से चालू करवाने के लिए कोई ठोस और संगठित आवाज उठाई. अगर नाला निर्माण में गड़बड़ी जनता की समस्या है, तो बस स्टैंड की बदहाली भी उतनी ही गंभीर समस्या है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Kumar Ashish

लेखक के बारे में

By Kumar Ashish

Kumar Ashish is a contributor at Prabhat Khabar.

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