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Madhepura news : अधिक कीमत में किसानों को मिल रहा यूरिया व डीएपी

Updated at : 13 Jan 2025 6:11 AM (IST)
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Madhepura news : अधिक कीमत में किसानों को मिल रहा यूरिया व डीएपी

दुकानदार खाद की किल्लत बता वसूलते है अधिक कीमत, डीएओ ने बताया नहीं है दिक्कत

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मधेपुरा/बिहारीगंज. जिले में यूरिया खाद की कमी से किसान परेशान है. गेहूं की पहली सिंचाई के बाद यूरिया का छिड़काव आवश्यक है, लेकिन यूरिया की किल्लत है. वहीं दुकानदारों का कहना है कि कंपनी द्वारा यूरिया के साथ-साथ कई अन्य उत्पाद जबरन दिये जा रहे हैं. इसके कारण सही तरीके से उठाव करना मुश्किल है पूंजी फंस जा रहा है. जिले के बिहारीगंज प्रखंड के किसानों को यूरिया उंचे दाम में खरीदना पड़ रहा है. यहां के किसान को 350 रुपये से लेकर चार सौ के दर में खरीदना पड़ रहा है. किसानों डीएपी भी 17 सौ दर लेना पर खुले बजार में किसानों को लेना पड़ता है. एफसीआइ में थोड़ा खाद आता है जो तीन चार दिन में समाप्त हो जाता है. इफको के गोदाम के पास लोगों को रात्रि में खाद लेने के लिए कतार में लगना पड़ता है. वहीं विक्रेताओं की मनमानी इस कदर बनी है कि यूरिया को किसी अन्य गोदाम में स्टॉक कर लेते है और खाद की किल्लत बता कर किसानों से अधिक राशि वसूली करते हैं. जिला कृषि पदाधिकारी की माने तो यूरिया की दिक्कत नहीं.

सरकारी दर है 266.50, लेकिन सामान को टैग करके लिया जा रहा है अधिक मूल्य

किसान नंदन पासवान ने बताया कि यूरिया कहीं भी सरकारी दर पर उपलब्ध नहीं है अधिकतर दुकानदार यूरिया देने के लिए भी तैयार नहीं हो रहे हैं और जो तैयार हो रहे हैं उसका मूल्य चार सौ बोरा बताते हैं. किसान ताहिर ने कहा गेहूं की पहली पटवन हो गई है यूरिया का छिड़काव आवश्यक है किसी भी मूल्य पर खरीद कर किसानों को यूरिया खेत में डालना पड़ रहा है.

चहेते दुकानदारों को देखकर होता है आवंटन

बाजार में उपलब्ध कई विश्वसनीय खाद विक्रेता होलसेलर व कंपनी की मनमानी के कारण यूरिया का उठाव नहीं करते हैं क्योंकि वह जानते हैं तय मूल्य से अधिक पर बेचने से उनके ग्राहक प्रभावित होंगे. इसका रास्ता ढूंढते हुए गांव देहात के छोटे-छोटे दुकानदार एवं चहेते दुकानदार को यूरिया का उठाव कर दिया जाता है और आवंटन पूरा करते हुए मनमानी कीमत भी वसूली जाती है.

सीजन का दबाव परिस्थिति के कारण किसान राे रहे हैं रोना

किसान की हालत स्थिति एवं सीजन के दबाव के कारण बिल्कुल दयनीय हैं. वह बगैर यूरिया के फसल के बेहतर होने की कल्पना नहीं कर पा रहे हैं और किसी भी दाम पर खरीदने को मजबूर है. उनका कहना है कि फसल यूरिया खाद के अभाव में खराब न हो इस मजबूरी में महंगे दामों पर यूरिया खाद खरीदने को मजबूर हैं किसानों ने इस ओर जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए जांच कर कृत्रिम अभाव पैदा करने वालों पर कार्रवाई की मांग की है.

हम अभी नये आये हैं, किसानों को किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी. इसका पूरा ध्यान रखा जायेगा. खाद की किल्लत नहीं है, जहां किसानों को परेशानी होगी जांच कर समस्या का समाधान किया जायेगा.

रितेश रंजन, जिला कृषि पदाधिकारी, मधेपुराB

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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