बाबा विशु राउत स्थान में सच्ची श्रद्धा से मांगे जाने वाली हर मनोकामना होती है पूरी

Published by :Kumar Ashish
Published at :14 Apr 2026 7:12 PM (IST)
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बाबा विशु राउत स्थान में सच्ची श्रद्धा से मांगे जाने वाली हर मनोकामना होती है पूरी

बाबा विशु राउत स्थान में सच्ची श्रद्धा से मांगे जाने वाली हर मनोकामना होती है पूरी

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एसडीएम व एसडीपीओ ने ऐतिहासिक मेला का किया उदघाटन चौसा . पचरासी स्थान में मंगलवार से चार दिवसीय राजकीय मेला शुरू हो गया. मेला का उद्घाटन उदाकिशुनगंज एसडीएम पंकज कुमार घोष और एसडीपीओ अविनाश कुमार ने किया. एसडीएम घोष ने कहा कि बाबा विशु राउत की समाधि स्थल ऐतिहासिक है. उन्होंने कहा कि बाबा आदि शक्ति के रूप में भी पूजनीय हैं. इनकी पूजा-अर्चना से मवेशियों के साथ लोगों की मनोकामना पूरी होती आ रही है. उन्होंने कहा कि बाबा विशु राउत की महिमा सर्वत्र है. इनके मंदिर में सच्ची श्रद्धा से मांगे जाने वाली हर मनोकामना पूरी होती है. एसडीपीओ ने कहा कि मेला में आए श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए जगह-जगह मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस अधिकारियों को तैनात किया गया है. मौके पर अवर निर्वाचन पदाधिकारी अजित कुमार, डीसीएलआर सौरभ कुमार भारती, बीडीओ सरीना आजाद, थानाध्यक्ष रवि कुमार पासवान, चरवाहा कल्याण संघ के अध्यक्ष विश्वनाथ यादव, सचिव कैलाश यादव, उपेंद्र यादव, अमरेंद्र सिंह, रामदेव सिंह, प्रमोद यादव, उमेश यादव, सुबोध यादव, महेंद्र यादव, यदुनंदन यादव आदि मौजूद थे. ढाई लाख लीटर दूध से किया बाबा का दुग्धाभिषेक कोसी के कछार पर स्थित चौसा प्रखंड के लौवालगान पचरासी बहियार स्थित बाबा विशु राउत की समाधि स्थल पर मंगलवार से चार दिवसीय राजकीय मेला शुरू हुआ. सर्वोच्च मेला समिति और चरवाहा संघ के पदाधिकारियों की मानें तो पहले दिन लगभग सवा लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा की समाधि पर लगभग ढाई लाख लीटर कच्चे दूध से बाबा का अभिषेक किया. दुग्धाभिषेक करने के लिए अहले सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटने लगी थी. मेले के भीड़ को नियंत्रण पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर स्थानीय सैकड़ों वोलेंटियर व्यवस्था को संभाले रखा. पूरे दिन बाबा विशु के जयकारे और उनकी महिमा का गुणगान होता रहा. पचरासी स्थान जाने के सभी रास्तों पर अहले सुबह से ही बाबा विशु को ही मानने वाले दिख रहे थे, अनुमान है कि चार दिनों में पांच लाख से अधिक श्रद्धालु दुग्धाभिषेक करेंगे. समाधि पर चढ़ाए गए दूध का संग्रह कर महाप्रसाद बनाकर लोगो में वितरण किया गया. इसके अलावा जो दूध बांटे गए, उसे आसपास के 20 से 25 गांव के लोग संचय कर अपने घर ले गए और खीर, पेड़ा बनाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया. बाबा को प्रिय था बताशा और गांजा दूध के साथ समाधि पर बाबा का प्रिय बताशा चढ़ाया जाता है. कहते हैं कि बाबा विशु को बताशा प्रिय था. इस कारण से बाबा की समाधि पर श्रद्धालु दुग्धाभिषेक के साथ बताशा और गांजा भी चढ़ाते हैं. लोगों की मानें तो हर दूध चढ़ाने वाले दस-20 रुपये का गांजा खरीदते हैं और दूध के साथ ही बाबा की समाधि पर चढ़ाते हैं. श्रद्धालुओं संख्या से देखे तो चार दिनों में चार से पांच क्विंटल तक की बिक्री हो जाती है. वैदिक मंत्रोचारण से हुआ बाबा का दुग्धाभिषेक सर्वोच्च मेला समिति चरवाहा कल्याण संघ और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने बताया कि अहले सुबह तीन बजे से समाधि स्थल का कपाट खोल कर वैदिक मंत्रोचारण कर बाबा की समाधि पर पूजा के पश्चात दुग्धाभिषेक किया गया. मंदिर का कपाट खुलते ही दुग्धाभिषेक के लिए भक्तों की लंबी कतार लग गयी. इसमें बिहार के कोने-कोने से आए लोगों के अलावा नेपाल, पश्चिम बंगाल, झारखंड, यूपी के भी सैकड़ों लोग शामिल थे. पूजा और दुग्धाभिषेक के बाद पशुपालकों ने अपने पशु के लिए स्वस्थ रहने और वंश वृद्धि की कामना की. परिसर स्थित करुणा धाकड़, शिव मंदिर और हनुमान मंदिर, बरगद के पेड़ पर लोगों ने दुग्धाभिषेक किया. कमेटी के लोगों का कहना है कि यहां की व्यवस्था दिन प्रतिदिन सदृढ़ की जा रही है. आने वाले दिनों में व्यवस्था को और सदृढ़ किया जाएगा. दूध को सुरक्षित कर खीर बनाया जाता है. बावजूद लगभग 20 से 30 फीसदी दूध बह जाता है. समाधि पर 425 वर्षों से लगता आ रहा है मेला चौसा प्रखंड मुख्यालय से आठ किलोमीटर दक्षिण लौआलगान पश्चिमी पंचायत के पचरासी में लोक देवता बाबा विशु राउत का समाधि स्थल है. विगत 425 वर्षों से प्रत्येक वर्ष में सतुआ मकर क्रांति पर 14 से 17 अप्रैल तक यहां चार दिवसीय मेला लगता है. इस दौरान विभिन्न राज्यों व जिलों से आने वाले श्रद्धालु बाबा की समाधि पर अपने पशु के दूध से दुग्धाभिषेक करते हैं. इसके अतिरिक्त सालों भर हर शुक्रवार और सोमवार को बैरागन होता है. वार्षिक मेला में प्रत्येक दिन कम से कम एक लाख पशुपालक व बैरागन के दिन पांच हजार पशुपालक कच्चे दूध का अभिषेक करते हैं. श्रद्धालुओं को ठहरने के लिए समुचित व्यवस्था राजकीय मेला घोषित होने के बाद राजस्व व भूमि सुधार विभाग से प्राप्त आवंटन के आलोक में जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं के ठहराव, स्वास्थ्य, रोशनी, पंडाल, शौचालय, स्वच्छ पेयजल आदि की व्यवस्था की है. बाबा विशु राउत पचरासी मेले में सुदूर क्षेत्रों से आने वाले पशुपालक स्टॉल और दुकान पर घरेलू समान और सौंदर्य प्रसाधनों के अलावा बर्तन फर्नीचर पत्थरों की बनी मूर्तियां खरीदते हैं. मेला में जादूगर, मौत का कुआं, टावर झूला, ब्रेक झूला व सिनेमाघर भी आकर्षक का केंद्र है. यहां विगत कई वर्षों से तारा मांझी व शहीद तूफान योगेंद्र की स्मृति में दंगल कुश्ती का भी आयोजन किया जाता है, जिसमें नामचीन पहलवानों का जमावड़ा लगता है.

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