शीतलहर का प्रकोप जारी, गांवों में अलाव की कमी, पाला पड़ने से फसलें हो रही प्रभावित

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 05 Jan 2025 6:27 PM

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शरीर में कंपन सी महसूस हो रही है. सड़कें सूनी-सूनी सी दिख रही है. ठंढ का प्रकोप बढ़ने से लोग घरों में दुबके हुए हैं.

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पछिया हवा बढ़ा रही है ठंड, ठिठुरन व कंपकंपी से लोग परेशान- -कुहासे ने रोक दी सड़कों पर वाहनों की रफ्तार, लोगों की काफी कम हुई आवाजाही- ग्वालपाड़ा सप्ताह भर से लगातार चल रही तेज पछुआ हवा एवं कोहरे से ठंढ़ में हो रही बढोतरी से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है. संपूर्ण जिला शीतलहर की चपेट में है. शनिवार को कुहासे में थोड़ी कमी हुई एवं कुछ घंटे के लिए निकली दबी हुई धूप से लोगों को राहत मिली थी. वहीं शनिवार के दोपहर बाद से ही पछुआ हवा में तेजी आ जाने से रविवार की सुबह से ही कड़ाके की ठंढ़ शुरू हो गई है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है, शरीर में कंपन सी महसूस हो रही है. सड़कें सूनी-सूनी सी दिख रही है. ठंढ का प्रकोप बढ़ने से लोग घरों में दुबके हुए हैं. सड़कों पर लोगों की आवाजाही कम हो गई है. बाजार से गांव तक जरूरतमंद लोग ही घर से बाहर निकलने का प्रयास कर रहे हैं. -वाहन दुर्घटना की बढ़ी आशंका- कोहरे की वजह से सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही कम हो गई है. आगे का रास्ता दिखाई नहीं दे रहा है. गाड़ी चालकों को संयम एवं सावधानी से गाड़ी चलाने की जरूरत है. थोड़ी सी असावधानी दुर्घटना का कारण बन सकती है. कोहरे से सबसे बड़ी चुनौती दो पहिया वाहन वालों के लिए है. चालकों को भी रौशनी जलाकर गाड़ी चलाने की परेशानी बनी हुई है. रविवार की सुबह से ही आसमान में कोहरा छाये रहने व पछिया हवा के बहने से शरीर में कंपकंपी महसूस हो रही है. हालांकि लोगों की परेशानी को देखते हुए सीओ देवकृष्ण कामत द्वारा जगह-जगह अलाव की व्यवस्था की गई है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अलाव की तलाश कर रहे हैं. लोग अलाव के नजदीक से उठाना नहीं चाहते हैं. एकाएक ठंढ़ के बढ़ जाने से लोगों के बीमार होने की भी संभावना बनी हुई है. -फसलों पर पड़ रहा नकारात्मक प्रभाव- एक तरफ लगातार तेजी से चल रहे पछुआ हवा से खेतों की नमी जल्द खत्म हो जाने से निजी पंप सेट से अधिक पैसा देकर मक्का फसल की सिंचाई करने की परेशानी है, वहीं गिर रहे पाले से मक्के का पौधा पीला पड़ने से भी किसानों की परेशानी बनी हुई है. पौधे में कीड़ा खोरी होने लगी है, जिससे फसलों के पैदावार में कमी होने की आशंका से किसानों का हलक सूखने लगा है. घर का अनाज बेचकर, साहूकारों से कर्ज लेकर कड़ाके की ठंढ़ की परवाह किए बगैर फसलों को बचाने की कोशिश में किसान खून पसीना बहा रहे हैं. अगर फसल प्रभावित हो जायगा तो, किसान कर्ज के बोझ से दब जाएगा. यही आशंका किसान को सता रही है. बाबजूद इसके भी फसल को बचाने का प्रयास किया जा रहा है.

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