सात साल से छात्र लिखते रहे हैं सफलता की इबारत

Published at :08 Apr 2017 9:10 AM (IST)
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सात साल से छात्र लिखते रहे हैं सफलता की इबारत

सदर प्रखंड के बालमगढिया गांव में सरकारी स्कूल के 11 बच्चों ने इस वर्ष राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा में सफलता हासिल की हैं. लगातार सात साल से इस विद्यालय के दर्जनों छात्र इस परीक्षा में सफलता की इबारत लिखते रहे हैं. मधेपुरा : मधेपुरा के सदर प्रखंड के बालमगढिया गांव में एक सरकारी स्कूल के […]

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सदर प्रखंड के बालमगढिया गांव में सरकारी स्कूल के 11 बच्चों ने इस वर्ष राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा में सफलता हासिल की हैं. लगातार सात साल से इस विद्यालय के दर्जनों छात्र इस परीक्षा में सफलता की इबारत लिखते रहे हैं.
मधेपुरा : मधेपुरा के सदर प्रखंड के बालमगढिया गांव में एक सरकारी स्कूल के 11 बच्चों ने इस वर्ष राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा में सफलता हासिल की है. इन दस सफल प्रतिभागियों में पांच छात्राएं हैं.
गौरतलब है कि विगत वर्ष इस विद्यालय से 32 छात्रा-छात्रों ने इस परीक्षा में सफलता हासिल की थी. लगातार सात वर्ष से यहां के बच्चे लगातार इस परीक्षा में अपनी सशक्त मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं. बच्चों की इस सफलता की कहानी अचानक नहीं लिखी गयी है बल्कि गांव के ही एक शिक्षक संजय कुमार की अहम भूमिका है. उन्होंने इस गांव के वंचित तबके के छात्र-छात्राओं का भविष्य संवारने को ही अपना लक्ष्य बना लिया है. संजय इन छात्राओं एवं छात्रों को विद्यालय के बाद घर पर ही नि:शुल्क पढ़ाया करते हैं. इस काम में स्कूल के ही अन्य शिक्षक मनीष मददगार हैं. परीक्षा का रिजल्ट इंटरनेट पर आ चुका है. जिला मुख्यालय से करीब नौ किमी दूर है बालमगढिया पंचायत का गढिया गांव. इस पंचायत में ही चार गांव हैं बालम, गढिया, श्रीपुर और चकला. इस पंचायत को सांसद शरद यादव ने गोद लिया हुआ है. इसे आदर्श पंचायत घोषित किया गया है.
कहते हैं मुखिया: पंचायत के मुखिया अनिल अनल कहते हैं कि उन्हें खुशी है कि उनके पंचायत में इतने प्रतिभावान छात्राएं और छात्र हैं. वे उनकी हरसंभव सहायता के लिये हमेशा तैयार रहते हैं. बच्चों की यह सफलता उन्हें उंचाइयों पर ले जायेगी.
मौसम संजय सर की कक्षा में दूसरे बच्चों को विषय का अभ्यास कराती है. संजय सर ने बताया कि उन्हें विगत छह माह से मौसम को पढ़ाया भी नहीं. उसकी मेहनत और प्रतिभा पर उन्हें पूरा भरोसा था. मनीषा के पिता ऑटो चलाते हैं. बेटी ने उनका मान बढ़ाया है. कहते हैं बेटी जब तक पढ़ना चाहेगी, वह पढ़ायेंगे. इन बच्चों की सफलता पर पूरा गांव खुश है. गांव के बच्चों में राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा में सफल होने की धुन सवार हो गई है. अब तो इस गांव का हाल यह है कि यहां पांचवीं में जाते ही बच्चे इस परीक्षा के लिए सिलेबस कंठस्थ कर लेते हैं. शिक्षक संजय कहते हैं कि वे इन बच्चों पर काफी मेहनत करते हैं लेकिन इस बार इस विद्यालय से केवल 11 बच्चों ने ही सफलता हासिल की है इससे वे निराश हैं. लेकिन हताश नहीं हैं. अगले साल इस संख्या में कई गुणा की वृद्धि होगी.
बेटियों से गौरवान्वित है मौसम की मां : गढिया गांव की आठवीं की छात्रा मौसम कुमारी के पिता की मौत एक सड़क हादसे में हो गयी थी.
तब मौसम काफी छोटी थी. लेकिन मां ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी तीनों बेटियों को पढ़ाने का संकल्प लिया. तीनों बेटियों ने मां की इस मेहनत का सिला भी दिया. बड़ी बेटी पूजा को मैट्रिक परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने के लिये तत्कालीन डीएम गोपाल मीणा ने सम्मानित भी किया था. सबसे छोटी मौसम को राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा में 115 अंक प्राप्त हुए हैं. विगत वर्ष इस परीक्षा के टॉपर को 113 अंक हासिल हुए थे जबकि दूसरे स्थान पर इसी विद्यालय की छात्रा रही थी. मौसम का इरादा यहीं रूकने का नहीं है. वहीं इसी विद्यालय की मनीषा को 92 अंक और मधुप्रिया को 88 अंक हासिल हुए हैं. निशु ने 81 अंक प्राप्त किया है. शांति ने 79 अंक हासिल किया है. वहीं छात्रों में मौसम कुमार को 104, राहुल को 100, रूपेश को 79 अंक हासिल हुए हैं. वहीं राजभूषण कुमार, राजू कुमार आदि इस परीक्षा में सफल हुए हैं. मौसम की मां रीता देवी की आंखों में उसकी इस सफलता ने नया भरोसा पैदा कर दिया है. उसकी मेहनत रंग लायी है.
कहते हैं डीइओ
सरकारी विद्यालय में पढ़ रहे बच्चों की प्रतिभा में कोई कमी नहीं होती है. बस उन्हें तराशने वाले समर्पित शिक्षक होने चाहिए. मैं स्वयं खुद को पहले शिक्षक मानता हूं, फिर अधिकारी. हर सरकारी विद्यालय के शिक्षक से बस यही अपील है कि इस विद्यालय के तर्ज पर अपने-अपने विद्यालय में छात्रों के बेहतरी के लिए प्रयासरत हो जायें. एक छात्र का निर्माण राष्ट्र के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है. शिक्षक समाज को इसे करने का गौरव हासिल है. लिहाजा अपनी भूमिका निर्वाह करें.
शिवशंकर राय, जिला शिक्षा पदाधिकारी, मधेपुरा.
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