अब हम न जहर उपजायेंगे, न खायेंगे और न ही खिलायेंगे

Published at :24 Jan 2017 4:37 AM (IST)
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अब हम न जहर उपजायेंगे, न खायेंगे और न ही खिलायेंगे

मधेपुरा : जहर न उपजायेंगे, न खायेंगे और न खिलायेंगे… कृषि में नये आंदोलन का सूत्रपात हो चुका है. रासायनिक खाद ने धरती की उर्वर क्षमता का क्षरण तो किया ही है, लेकिन वर्मी कंपोस्ट भी स्वास्थ्य के लिए कम खतरनाक नहीं. किसान और आम लोग इस सच से वाकिफ नहीं हैं. जैविक खेती का […]

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मधेपुरा : जहर न उपजायेंगे, न खायेंगे और न खिलायेंगे… कृषि में नये आंदोलन का सूत्रपात हो चुका है. रासायनिक खाद ने धरती की उर्वर क्षमता का क्षरण तो किया ही है, लेकिन वर्मी कंपोस्ट भी स्वास्थ्य के लिए कम खतरनाक नहीं. किसान और आम लोग इस सच से वाकिफ नहीं हैं.

जैविक खेती का तात्पर्य है बैक्टीरिया का इस प्रकार प्रबंधन ताकि उनका इस्तेमाल कृषि की बेहतरी के लिए किया जा सके और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव भी न पड़े. राष्ट्रीय किसान समागम महाअभियान के प्रमुख नीरज कुमार सिंह जिला मुख्यालय स्थित किसान संसद कार्यालय के प्रांगण में आयोजित बैठक में किसानों को संबोधित कर रहे थे. किसान संसद के सचिव शंभू शरण भारतीय की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में उन्होंने इस अभियान के बारे में किसानों को विस्तार से बताया.
शून्य लागत से खेती है संभव : बैठक में नीरज सिंह ने कहा कि उनके दल ने ऐसी कृषि का पद्धति को विकसित किया है जिस पर शून्य लागत आयेगी. उपज में भी कमी नहीं होगी और कृषि उत्पाद स्वास्थय के लिये भी हर लिहाज से बेहतर होगा. शून्य लागत प्राकृतिक कृषि में हर फसल का लागत मूल्य शून्य होता है. उत्पादन रासायनिक एवं जैविक कृषि से बिल्कुल कम नहीं होती. बल्कि इस पद्धति से सही तरीके से खेती करने पर ज्यादा उपज मिलेगी. किसानों को जहर मुक्त प्राकृतिक अनाज, फल और सब्जी का डेढ़ या दोगुना दाम मिलता है जबकि पानी और बिजली की खपत केवल दस फीसदी होती है.
प्राकृतिक रूप में मौजूद हैं तत्व : उन्होंने कहा कि फसल को नेत्रजन, फास्फोरस, पोटाश, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक, बोरान आदि जैसे सत्रह तत्वों की जरूरत होती है. इस जरूरत को हम रासायनिक खाद डाल कर पूरा करते हैं. लेकिन ये तत्व वातावरण में प्राकृतिक रूप से मौजूद है. जिस प्रकार हम कच्ची सब्जी को बिना पकाये नहीं खा सकते हैं. उसी प्रकार इन तत्वों को पौधों के लिये पकाने का कार्य मित्र कीट करते हैं. रासायनिक खाद डालने के बजाय अगर इन मित्र कीट का उपयोग किया जाये तो पौधों को ये चीजें प्राकृतिक रूप में मिल सकेगी.
नुकसानदेह है वर्मी कंपोस्ट : वर्मी कंपोस्ट के बारे में उन्होंने बताया कि इसमें आयसेनिया फोटिडा होता है. यह कैडमियम, आर्सेनिक, पारा व सीसा इत्यादि विषैली तत्व छोड़ती है, जो हमारे खेत और अनाज के लिये हानिकारक है. लेकिन देसी केचुआ किसान के मित्र हैं. इनसे फसल को नुकसान नहीं होता और न इनसे विषैले तत्वों का उत्सर्जन होता है. इसलिये फसल कटाई के बाद अवशेष में आग न लगायें, इससे सूक्ष्म जीवाणु नष्ट होते हैं.
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