मैं मुहब्बत करूं...तुम अदावत करो काव्य संध्या

Published at :22 Sep 2016 5:51 AM (IST)
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मैं मुहब्बत करूं...तुम अदावत करो  काव्य संध्या

मधेपुरा साहित्यकार क्लब की ओर से आयोजित की गयी काव्य संध्या में राज्य के मशहूर कवि व शायरों ने नज्मों से दिल जीता मुंगेर, खगड़िया, पूर्णिया, लखीसराय आदि जगहों से आये शायर और कवियों ने रचनाओं से माहौल बनाया खुशनुमा मधेपुरा : …ये मेरे ख्वाब हैं, लो हिफाजत करो… तुम बड़े लोग हो कुछ सियासत […]

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मधेपुरा साहित्यकार क्लब की ओर से आयोजित की गयी काव्य संध्या में राज्य के मशहूर कवि व शायरों ने नज्मों से दिल जीता

मुंगेर, खगड़िया, पूर्णिया, लखीसराय आदि जगहों से आये शायर और कवियों ने रचनाओं से माहौल बनाया खुशनुमा
मधेपुरा : …ये मेरे ख्वाब हैं, लो हिफाजत करो… तुम बड़े लोग हो कुछ सियासत करो… अपने-अपने नजरिये पर कायम रहो… मैं मुहब्बत करूं तुम अदावत करो..! मधेपुरा में आयोजित काव्य संध्या में बारिश के साथ-साथ नज्मों की बरसात हो रही थी. पटना, मुंगेर, पूर्णिया सहित अन्य जिलों से आये कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से माहौल को खुशनुमा बना दिया था. जिला मुख्यालय के एक आरामगाह में आयोजित काव्य संध्या की अध्यक्षता पटना से आये शायर जनात संजय कुमार कुंदन ने की.
इस मौके पर उन्होंने कहा कि काव्य केवल जीवन का साक्षात्कार नहीं करता, मनुष्य को सुसंस्कृत एवं मानवीय अस्मिता को स्वर भी देता है. जीवन का आंदोलित करता है और क्रांति का मार्ग आलोकित करता है. काव्य संध्या की औपचारित शुरूआत करने से पहले कश्मीर के उड़ी सेक्टर में सेना के जवानों की शहादत को सलामी दी गयी. मुंगेर से आये कवि अनिरुद्ध सिन्हा ने लोकतांत्रिक मूल्यों के क्षरण पर चोट करती अपनी रचना . मैं मुहब्बत करूं तुम अदावत करो.. पढ़ कर श्रोताओं का दिल जीत लिया.
पूर्णिया से आयीं शायरा मंजुला उपाध्याय ने कहा – …चांद तारों से दोस्ती अब न रही…अब तो सूरज में रोशनी न रही…तुमसे मिल कर मिला आज एहसास ये…मंजुला अब तेरी जां नशीं ना रही..! वहीं डा सिद्धेश्वर काश्यप ने सांप्रदायिक सौहार्द को स्वर देते हुए कहा … जो वतन तुम्हारा है वही वतन हमारा है… राम और रहमां ने प्यार से संवारा है…! वहीं लखीसराय से आये कवि राजेंद्र राज ने लोकतंत्र के दोहरे चेहरे पर चोट करते हुए कहा… नया है वक्त ये रहबर भी नया है अपना… वतन के जिस्म से कपड़े उतार लेता है…! उजियारपुर के शायर सुधीर प्रोग्रामर ने कहा कि … बोलो उगती शाम कहां है… गांधी- खुदीराम कहां हैं…पैसा पर पानी तक है बिकता …
लेकिन खून का दाम कहां है…! खगड़िया से आये शायर शिवकुमार सुमन ने प्यार को स्वर देते हुए कहा … नफरतों का दौर है कुछ प्यार लिखना चाहिए…! कार्यक्रम को आनंद जी, डा विनय, हर्षवर्द्धन, कृष्णमुरारी, शहंशाह, सियाराम, सियाशरण, सारंग तनय आदि की मौजूदगी ने विशेष बना दिया.
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