कहीं फसल डूबी, तो कहीं सुखाड़

Published at :21 Aug 2016 1:29 AM (IST)
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कहीं फसल डूबी, तो कहीं सुखाड़

संकट. जिले के किसानों को इस बार प्रकृति ने दी दोहरी मार एक ओर नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई प्रखंडों में पानी घुस गया, जिससे फसल बर्बाद हो गयी तो दूसरी ओर बारिश कम हुई. बारिश कम होने से भी फसल प्रभावित हुई है. विभाग के अनुसार इस बार सामान्य से 62.76 मिमी कम […]

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संकट. जिले के किसानों को इस बार प्रकृति ने दी दोहरी मार

एक ओर नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई प्रखंडों में पानी घुस गया, जिससे फसल बर्बाद हो गयी तो दूसरी ओर बारिश कम हुई. बारिश कम होने से भी फसल प्रभावित हुई है. विभाग के अनुसार इस बार सामान्य से 62.76 मिमी कम बारिश हुई है.
मधेपुरा : राज्य के मुख्यमंत्री के आदेशानुसार रोज जिले से प्रखंडवार बारिश की रिपोर्ट भेजी जानी है. इससे पता लग सकेगा कि बारिश कितनी हुई और जरूरत अनुसार योजना बनायी जायेगी. हालांकि प्रखंडों को डीजल अनुदान की राशि विमुक्त की जा रही है. लेकिन पंपिंग सेट से पटवन करना भी आसान कहां. मनहुंडा यानी लीज पर खेती करने वालों के पास जमीन के कागज नहीं होते जबकि डीजल अनुदान के लिये जमीन की रसीद जरूरी है. वहीं दूसरी ओर नेपाल क्षेत्र में हुई बारिश के कारण छोटी नदियां भी उफना गयी और कई प्रखंडों में धान की फसल डूब गयी. महज दस दिन पहले हुई कृषि टास्क फोर्स की बैठक में मिली रिपोर्ट के अनुसार डीएम मो सोहैल ने आगे की तैयारी शुरू कर दी है.
62.76 मिमि कम हुई है बारिश
आम तौर पर जिले में सामान्य वर्षापात का रिकार्ड 310 मिमि है. इसमें से अगस्त माह के मध्य तक 90.8 मिमि वर्षा का रिकार्ड रहा है. इस समय तक इतनी बारिश धान की खेती के लिये मुफीद मानी जाती रही है. लेकिन इस साल यह बारिश अब तक केवल 27.3 मिमि ही हुई है. सामान्य तौर पर देखें तो यह बारिश 62.76 मिमि कम हुई है.
सूखे की बढ़ी आशंका
कृषि विशेषज्ञों की मानें तो इतनी कम बारिश से धान की फसल को थोड़ा नुकसान का खतरा उत्पन्न हो गया है. लेकिन अगर पंप से पटवन किया जाये तो स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सकता है.
लक्ष्य से कम हुई धान की रोपनी: सरकारी आकड़े को देखें तो जिले में इस वर्ष 63 हजार हेक्टेयर में धान की रोपनी का लक्ष्य रखा गया है. लेकिन अब तक केवल 60259 हेक्टेयर में ही रोपनी की जा सकी है. हालांकि चौसा और आलमनगर प्रखंड में धान की रोपनी होने के बाद बाढ़ आने से फसल पानी में डूबगयी है. आलमनगर में 2403 हेक्टेयर और चौसा में 867 हेक्टेयर में लगी फसल प्रभावित हुई है. आलमनगर में 3400 किसान प्रभावित हुए हैं वहीं चौसा में 2634 किसान प्रभावित हैं.
बाढ़ से परेशान हैं किसान: जिले में यह अजीब विरोधाभास है कि कहीं सूखे के आसार हैं तो कहीं नदियों के उफनाने से निचले इलाकों में पानी फैल जाने से धान की फसल प्रभावित हो गयी है. मुरलीगंज, बिहारीगंज, कुमारखंड, पुरैनी, एवं ग्वालपाड़ा आदि प्रखंडों के प्रखंड कृषि पदाधिकारी ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट भी दी है. नेपाल क्षेत्र में अतिवृष्टि होने के कारण बिहार आने वाली छोटी नदियों में भी उफान आ गया है. सुरसर नदी का पानी उफना गया. यह नदी जिले के कुमारखंड, मुरलीगंज, ग्वालपाड़ा, आदि क्षेत्र से गुजरती हुई कोसी में मिल जाती है.
चिंतित हैं किसान सामान्य से 62.76 मिमी कम बारिश
ये हैं बाढ़ से
प्रभावित पंचायत
रिपोर्ट के अनुसार नदियों के उफनाने के कारण मुरलीगंज में 302 हेक्टेयर, कुमारखंड में 481 हेक्टेयर, बिहारीगंज में 43, पुरैनी में 445 हेक्टेयर एवं ग्वालपाड़ा में 460 हेक्टेयर में लगी फसल प्रभावित हो गयी है. कुमारखंड में मंगरवारा सबसे अधिक प्रभावित पंचायत है. वहीं कम प्रभावित में बेलारी एवं लक्ष्मीपुर चंडीस्थान पंचायत है. मुरलीगंज में दीनापट्टी एवं जीतापुर सबसे अधिक प्रभावित हैं तथा रजनी एवं तमौट परसर कम प्रभावित हैं. ग्वालपाड़ा में शाहपुर और रेशना पंचायत अधिक प्रभावित हैं और वीरगांव चतरा एवं पीरनगर कम प्रभावित हैं.
बारिश के रिकार्ड पर नजर रखी जा रही है. आवश्यकतानुसार डीजल अनुदान की राशि किसानों को मुहैया करायी जायेगी. नदी में आये उफान के कारण प्रभावित होने वाले पंचायत में जांच करायी जा रही है. जल्द ही आकलन कर संभव सहायता मुहैया करायी जायेगी.
– यदुनंदन प्रसाद यादव, जिला कृषि पदाधिकारी, मधेपुरा
जिले में इस समय तक 90.8 मिमि वर्षा का रहा है रिकार्ड लेकिन हुई है केवल 27.3 मिमि बारिश
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