अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं होने से मरीज परेशान

Published at :20 Jun 2016 7:44 AM (IST)
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अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं होने से मरीज परेशान

जिला मुख्यालय स्थित अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीजों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है़ जिले का मुख्य अस्पताल होने के बावजूद यहां अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं है़ यहां प्रतिदिन सैकड़ों मरीज जिले के सभी प्रखंडों से इलाज के लिए आते है़ं मधेपुरा : सरकार द्वारा गरीब मरीजों के इलाज […]

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जिला मुख्यालय स्थित अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीजों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है़ जिले का मुख्य अस्पताल होने के बावजूद यहां अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं है़ यहां प्रतिदिन सैकड़ों मरीज जिले के सभी प्रखंडों से इलाज के लिए आते है़ं
मधेपुरा : सरकार द्वारा गरीब मरीजों के इलाज के िलए अस्पताल में मुफत दवाई व भोजन की व्यवस्था है़ लेकिन अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ता है़ बाहर से अल्ट्रासाउंड कराने पर मरीजों को ज्यादा पैसे वहन करना पड़ता है़ आर्थिक रूप से कमजोर मरीज पैसे के अभाव में अल्ट्रासाउंड नहीं करवा पाते है़ं जिस कारण आधे-अधूरे ईलाज के बाद ही वे घर वापस लौट जाते है़ं कुछ ऐसे मरीज आते है़ं जिसका बिना अल्ट्रासाउंड के सही ईलाज संभव नहीं हो पाता है़
इस संबंध में अस्पताल प्रशासन भी उदासीन बना हुआ है़ और अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था को लेकर कोई ठोस कदम उठते नहीं दिख रहा है़ वर्षों से अल्ट्रासाउंड के बगैर ही अधिकांश मरीजों का ईलाज होता आ रहा है़ आर्थिक रूप से संपन्न मरीज को बाजार से अल्ट्रासाउंड करवा कर अपना सही ईलाज करवाने में सक्षम है़ लेकिन गरीब मरीज पैसे के अभाव में बाजार से महंगे फीस देकर अल्ट्रासाउंड कराने में समक्ष नहीं है़
कहते हैं मरीजों के परिजन : कुमारखण्ड निवासी संजीव कुमार अपनी मां का ईलाज सदर अस्पताल में करवाने आया, उनकी मां के पेट में कई दिनों से दर्द का अनुभव हो रहा था, उन्होने बताया कि डॉक्टरों द्वारा दर्द निवारक दवाई दी गई लेकिन कुछ दिन आराम होने के बाद फिर दर्द शुरू हो गया़
तब जाकर डाक्टर ने अल्ट्रासाउंड कराने बोला़ लेकिन अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं होने के कारण बाजार का रूख अख्तियार करना पड़ा, बाजार में अल्ट्रासाउंड का फीस 600 रूपया वहन करना पड़ा़ उन्होंने बताया कि यदि सदर अस्पताल में ही अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था रहती तो शायद ज्यादा रूपया बाहर नहीं देना पड़ता और जेब भी भारी नहीं होता़ वहीं जीतापुर निवासी बमबम यादव ने बताया उसे लीवर में परेशानी है एक महीना से ईलाज चल रहा है़ अल्ट्रासाउंड बाजार कराना पड़ा और 600 रूपया वहन करना पड़ा़ उन्होंने बताया बाहर अल्ट्रासाउंड के लिए भटकना पड़ता है़ सही तरीके से अल्ट्रासाउंड भी नहीं होता है साथ में ज्यादा पैसे भी खर्च हो जाता है़
वहीं पिठाई निवासी रामशरण ने बताया अपनी पत्नी का ईलाज कराने सदर अस्पताल आया लेकिन पैसों के अभाव में बाजार में महंगे अल्ट्रासाउंड के कारण सही ईलाज कराये बिना घर वापस लौट आया़ बाद में पैसे की व्यवस्था कर बाजार से अल्ट्रासाउंड करवाया तब जाकर इलाज संभव हो पाया़ एक तरफ सरकार कहती है बीपीएल परिवारों को अस्पताल में सारी सुविधा उपलब्ध होगी लेकिन जिले का मुख्य अस्पताल होने के बावजूद यहां अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ता है़ सवैला निवासी श्याम कुमार, मुरलीगंज निवासी सोहन मुखिया, मानिकपुर निवासी छोटेलाल साह, सुखासन निवासी प्रमोद प्रसाद, कार्तिक ऋिषदेव आदि ने अस्पताल प्रशासन से अस्पताल में ही अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था करने की मांग किया है़ इससे गरीब मरीजों का पूरा ईलाज संभव हो सके़
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