आत्मा की आत्मनिर्भरता पर महिलाओं को गर्व
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :04 Feb 2016 3:59 AM (IST)
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जिला कृषि कार्यालय के आत्मा सभागार में ग्रामीण प्रशिक्षु महिलाओं को मिला प्रमाण पत्र महिलाओं को डेयरी किसान गाइड, टमाटर कैचप, कृषक संदेश की तैयारी की दी जानकारी मधेपुरा : जिला कृषि कार्यालय के आत्मा सभागार में ग्रामीण प्रशिक्षु महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रमाण पत्र वितरित किया गया. तकनीकी सहायक विकास कुमार व […]
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जिला कृषि कार्यालय के आत्मा सभागार में ग्रामीण प्रशिक्षु महिलाओं को मिला प्रमाण पत्र
महिलाओं को डेयरी किसान गाइड, टमाटर कैचप, कृषक संदेश की तैयारी की दी जानकारी
मधेपुरा : जिला कृषि कार्यालय के आत्मा सभागार में ग्रामीण प्रशिक्षु महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रमाण पत्र वितरित किया गया. तकनीकी सहायक विकास कुमार व प्रगतिशील औषधीय किसान शंभुशरण भारतीय ने प्रमाणपत्र दिया. रोजगार सृजन व ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से आत्मा के परियोजना निदेशक राजन बालन द्वारा 52 महिलाओं के समूह को 31 जनवरी को प्रशिक्षण के लिए कृषि विवि सबौर भागलपुर भेजा गया था.
वहां पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में व्यावहारिक प्रशिक्षण महिलाओं का दिया गया. इसमें मुरब्बा, जैम, जेली, आचार व पापड़ बनाने की विधि बतायी गयी. प्रशिक्षण के बाद सभी प्रशिक्षु को प्रमाण पत्र दिया गया. मौके पर उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के बाद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने, स्वरोजगार को बढ़ावा देने में काफी सहायता मिलेगी.
उन्होंने कहा कि आत्मा द्वारा स्वरोजगार को बढ़ावा देने महिलाओं को आत्मनिर्भरता प्रदान करने के लिए समय समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा. इससे कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं को अधिक लाभ मिल सके. उन्होंने कहा कि जिले के सभी प्रखंडों की महिलाओं के लिए किसान डेयरी, किसान गाइड, टमाटर कैचप, कृषक संदेश तैयार करने की भी जानकारी दी गयी.
इन समूहों से आयी महिलाएं . सभी 52 महिलाएं मां भगवती विलेज समूह भतरंधा घैलाढ़, महादेव कृषक महिला हितार्थी समूह इटवा जीवछपुर, सावित्री माई फूले कृषक महिला समूह नेहालपटटी, मां संतोषी महिला कृषक समूह दीनापटटी, विकास महिला हितार्थी समूह गोढियापटटी से है. ये सभी समूह आत्मा से पंजीकृत हैं.
कहती हैं प्रशिक्षित महिलाएं . मौके पर प्रशिक्षण प्राप्त गुंजन प्रकृति ने अपनी बात कह कर प्रशिक्षु महिलाओं का हौसला बढ़ाया. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पद्धति से जैम, जेली, मुरब्बा, आचार एवं पापड़ बनाने का प्रशिक्षण मिलने के बाद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में मददगार साबित होगा. महिलाएं घर पर ही रहकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकती हैं. प्रशिक्षण प्राप्त बभनगामा की रिंकी कुमारी ने कहा कि यह मेरा पहला प्रशिक्षण था और इसके बाद मेरा आत्मविश्वास बढ़ा. प्रशिक्षण से हम ग्रामीण महिलाओं को काफी फायदा मिला.
अब घर पर ही रहकर अनेक घरेलु उत्पाद बनाकर आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो सकती हैं. वहीं सिंपल कुमारी ने कहा कि प्रशिक्षण के बाद घर पर ही गृह उद्योग लगा कर कार्य कर सकते हैं. निहालपट्टी की निधि ने कहा कि समय समय पर इस तरह के प्रशिक्षण से महिलाओं में जहां आत्मविश्वास में वृद्धि होगी वहीं आर्थिक रूप से भी महिलाएं सबल होगी. मौके पर प्रखंड तकनीकी सहायक अमरेश कुमार, बीटीएम कुणाल किशोर, कार्यालय सहायक रामबल्लभ कुमार, बीटीएम विनोद कुमार, किसान आज्ञानंद यादव समेत कई अन्य किसान मौजूद थे.
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