ठंड के कारण थमी जिले की रफ्तार

Published at :25 Jan 2016 3:44 AM (IST)
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ठंड के कारण थमी जिले की रफ्तार

घने कोहरे के बीच बहती पछिया हवा के कारण मौसम का पारा रविवार को गिर कर 05 डिग्री पर पहुंच गया. रविवार की सुबह शुरू हुए सर्द हवा के बीच हांड़ कपकपा देने वाली ठंड से आम लोगों को दिन भर भी निजात नहीं मिल सकी. सूर्य देवता भी दिन भर निकले ही नहीं. जिले […]

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घने कोहरे के बीच बहती पछिया हवा के कारण मौसम का पारा रविवार को गिर कर 05 डिग्री पर पहुंच गया. रविवार की सुबह शुरू हुए सर्द हवा के बीच हांड़ कपकपा देने वाली ठंड से आम लोगों को दिन भर भी निजात नहीं मिल सकी. सूर्य देवता भी दिन भर निकले ही नहीं. जिले में पिछले तीन दिनों से ठंड का कहर जारी है.

लेकिन जिला प्रशासन इस जान लेवा ठंड में लोगों की जान जाने का इंतजार कर रही है. ठंड से ठिठुर रहे गरीबों के बीच बांटने के लिए प्रशासन ने कंबल का अब तक टेंडर नहीं कराया है. वहीं जिले के किसी भी प्रखंड में अलाव भी नहीं जल सका है. उधर, मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे तक ठंड का प्रकोप जारी रहने की आशंका व्यक्त किया है.मौसम वैज्ञानिकों ने कहा कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई बारिश से ठंड बढ़ा है.

मधेपुरा/उदाकिशुनगंज : बह रही तेज पछुआ हवा व अकाश में छाये घने कोहरों के कारण विगत एक सप्ताह से पड़ रही कड़ाके की ठंड से जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है. इस ठंड से खास कर वृद्ध बच्चे व पशु प्रभावित हुए है. यहां तक कि तेलहन और सब्जी की खेती पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है वैसे 11 व 12 बजे दिन के बाद सूरज निकलता भी है तो वो कनकनी को कम नहीं कर पाता है. ठंड के कारण लोगों को घर में गर्म कपड़ों से बदन ढक कर रहना मजबूरी बन गयी है. घने कोहरों के कारण वाहनों के परिचालन पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है.
ठंड व कुहासों से प्रभावित हो रही हैं फसलें : ठंड से वैसे किसानों के चेहरे मुरझा गया है जो किसान तेलहन व आलू गोभी की खेती कर रखें है, चूंकि सरसों फसल पर लाही रोग तो आलू गोभी फसल को झुलसा रोग का खतरा बना हुआ है. ऐसे फसल के बचाव के लिए किसान ठंड में भी अपने शारीरिक पीड़ा भूल कर प्रतिदिन ऐसे फसलों के बचाव के लिए रोड रोधक दवा से झिड़काव कर रहे है. दलहन में मटर, मोसरी, अरहर, जैसे अन्य दलहन फसल को लाही रोग का खतरा बना हुआ है.
लेकिन अभी तक किसान दवा छिड़काव कर बचाव कार्य में प्रतिदिन जुटे हुए है. अगर ठंड व कुहासे लंबी अवधि तक रहा तो इन फसलों का बचाव कर पाना किसानों के लिए कठिन हो जायेगा. चूंकि प्रतिदिन रोग रोधक दवा करने से आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है.
वाहन के परिचालन पर पड़ा प्रभाव : असहनीय ठंड के कारण वाहनों का परिचालन भी प्रभावित हुआ है. चूंकि अधिक ठंड की वजह से लोग आवश्यक कार्य से घर से बाहर नहीं निकलते है जिससे वाहनों को पर्याप्त संख्या में यात्री नहीं होते है ऐसी स्थिति में वाहन यंूही खड़ा रह जाता है. अचानक ठंड इस कदर बढ़ गयी है कि हाथ का ठिठूरन लोगों को आग का सेवन करते रहने पर मजबूर कर रहा है. सरकारी स्तर पर चौक चौराहों पर अलाव का व्यवस्था प्रशासन द्वारा किया गया है.
किंतु आपदा प्रबंधन मंत्री के गृह जिला होने के नाते लोगों को उम्मीद थी कि इस कड़ाके की पड़ रही ठंड में सभी बेसहारा लोगों को शासन द्वारा कंबल की आपूर्ति की जाती. हालांकि लगभग तीन दर्जन लोगों के बीच प्रशासन द्वारा कंबल का वितरण किया जा चुका है. लेकिन और कंबल चाहिए ऐसी इच्छा कमजोर लोगों की है.
पशु हो रहा है प्रभावित : ठंड की वजह से हरा चारा पशुओं को नहीं मिल पा रहा है. जिसके कारण भरपेट भोजन तक पशु को नसीब नहीं हो पाता है. फलस्वरूप अच्छा – अच्छा पशु भी शारीरिक तौर पर कमजोर हो गया है. जबकि दुधारू पशु दूध देना बंद कर दी है तो दूध देना कम कर चुकी है. वजह कि उसे भरपेट भोजन नहीं मिल पा रहा है. इस तरह ठंड के वजह से लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है.
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