बहनों ने मांगी भाई की लंबी उम्र व समृद्धि की दुआ

मधेपुरा : भाई बहन के प्रेम व स्नेह का प्रतीक पर्व सामा चकेवा मिथिलांचल व कोसी क्षे़त्र में पूरे धूमधाम से मनाया गया. इस दौरान बहनों ने साम चक्के साम चक्के अईल हे…अईल हे…जोतला खेत में बसिहअ हे…बसिहअ हे… गीत गायी. यह पर्व कार्तिक शुक्ल पंचमी से प्रारंभ होकर कार्तिक पूर्णिमा को समाप्त हो गया. […]
मधेपुरा : भाई बहन के प्रेम व स्नेह का प्रतीक पर्व सामा चकेवा मिथिलांचल व कोसी क्षे़त्र में पूरे धूमधाम से मनाया गया. इस दौरान बहनों ने साम चक्के साम चक्के अईल हे…अईल हे…जोतला खेत में बसिहअ हे…बसिहअ हे… गीत गायी. यह पर्व कार्तिक शुक्ल पंचमी से प्रारंभ होकर कार्तिक पूर्णिमा को समाप्त हो गया.
इस दस दिनों की समयावधि में बहनें गीत गाकर अपने भाई की लंबी आयु व सुख समृद्धि की आशीष मांगी. इस दौरान बहनें भाई द्वारा लाए गए मिट्टी से पक्षी स्वरूप सामा व चकेवा की मूर्ति बनायी. साथ में वृंदावन, सतभईया, बटतकनी, श्रीसामा, झांझी कुत्ता, भंवरा, बजनियां आदि विभिन्न तरह के आकर्षक मूर्तियां बनायी.
इसके अतिरिक्त पटसन के बाल एवं दाढ़ी वाला भयानक चुगला की मूर्ति भी बनायी. पूर्णिमा की रात्रि पहर बहनें कई तरह के भाई बहन के प्रेम पर आधारित गीत गायी. अंत में चुगला की दाढ़ी में आग लगाकर हंसी ठिठोली होती रही. रात को पक्षी स्वरुप सामा को खुले आसमान में ओस पीने के उद्देश्य से छोड़ दिया. खाने के लिए धान की बाली दी गयी.
पूर्णिमा की रात सामा चकेवा की मूर्ति के साथ अन्य मूर्तियों को भाई अपने ठेईना के भार पर तोड़ कर विदा कर दिया. जिस तरह मिथिला क्षेत्र में बेटी विदाई के समय गला हाड़ा, पान सुपारी, पुड़ी पकवान, फूल, कपड़ा दिया जाता है. विदाई के समय मैथिलानी करुण भाष में समदाउन गाती है एवं जोते हुए खेतों में पुन: अगले वर्ष आने का न्योता देते हुए सभी अपने अपने घर को लौट गयी.
जिला मुख्यालय के स्टेडियम मैदान सहित अन्य जगहों पर समा फोरने के दौरान मेला का दृष्य उत्पन्न हो गया था. — इनसेट– प्रखंड क्षेत्र में बड़े ही उत्साह के साथ महिलाओं ने मनया समा चकेवा प्रतिनिधि, सिंहेश्वर बहन भाई का पवित्र पर्व सामा चकेवा बड़े ही धूम धाम से सिंहेश्वर मंदिर परिसर स्थित शिव गंगा तट पर चुगला को बुधवार की देर रात्रि चुगला के मुंह में आग लगा कर मनाया गया.
हीं कार्तिक शुक्ल पक्ष में शुभ नक्षत्र योग में पंचमी अथवा किसी शुभ तिथि मे खड़ एवं मिटटी से समा चकेवा का निर्माण किया गया था. महिलाओं ने अनेक प्रकार के आकर्षक रंगौली से रंगाया, सधवा नारी गौरी एवं विधवा नारी विष्णु भगवान की पूजा कर, दूभ,अक्षत एवं विधवा पुष्प, तील, जल लेकर पूजा किया. वहीं दही चुड़ा मिठाई भोग लगा कर दीप प्रज्वलित कर चुगला के मुंह में आग लगाया. समा को ओश चटाया गया.
जिसमें महिलाओं के द्वारा विभिन्न प्रकार के हास्य विनोद वाला गीत गाया गया. कहा जाता है कि सामा कि पूजा जो स्त्री विधि विधान से करती है उसके जीवन वैधव्य नहीं आता है. तथा अपने प्राण प्रिया- पुत्र पौत्र आदि से संपन्न एवं भाई की आयु की वृद्धि करती है. भाई के समान संसार में बंधु नहीं, भाई के समान दूसरा सुख नहीं वह स्त्री सौभाग्य शाली है जिसका सौहोदर भाई. जाम वती की लड़की समा श्राप से मुक्त होने के बाद ही पृथ्वी पर सामा चकेवा की परंपरा प्रारंभ हुई. परंपरा और रीति रिवाज के साथ महिलाओं के द्वारा प्रखंड क्षेत्र में हर्षोल्लास के साथ सामा चकेवा पर्व समाप्त हो गया.
जीतापुर प्रतिनिधि अनुसार मुरलीगंज प्रखंड के भतखोरा बाजार एवं आसपास के क्षेत्र में भाई बहन का पर्व सामा चकेवा बड़े ही धूमधाम से मनाया गया. जिसमें चुगला को आग लगा कर जलाने की परंपरा है. सभी बहनों ने भाई को आशीर्वाद दी.
इस मौके पर नीतू देवी, प्रिया, गुडि़या, सोनी देवी, पूनम देवी, प्रीतम, खुशी, गुड्डी, जोती, काजल, पारो, निधि, दिलखुश, मुस्कान आदि ने अपने भाईयों को आशीर्वाद दी. ग्वालपाड़ा प्रतिनिधि अनुसार प्रखंड क्षेत्र में बुधवार को बाई बहन का पर्व समा चकेवा हर्षोल्लास के साथ चुगला के मुंह में आग लगाने के बाद संपन्न हो गया. इस दौरान सभी बहनों ने भाइयों से आशीर्वाद लिया.
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