शिक्षा के प्रति समर्पित हैं सत्यनारायण झा

Published at :21 Aug 2015 3:51 AM (IST)
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शिक्षा के प्रति समर्पित हैं सत्यनारायण झा

मधेपुरा : राष्ट्रपति सम्मान के लिए चयनित शिक्षक सत्यनारायण झा जिले के गम्हरिया प्रखंड स्थित बभनी में पारसमणि उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक के पद से हाल ही में सेवानिवृत्त हुए हैं. इससे पहले उन्हें राजकीय सम्मान दिया जा चुका है. श्री सत्यनारायण झा ने शिक्षा को समाज से जोड़ने में उल्लेखनीय भूमिका निभायी है. विद्यालय […]

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मधेपुरा : राष्ट्रपति सम्मान के लिए चयनित शिक्षक सत्यनारायण झा जिले के गम्हरिया प्रखंड स्थित बभनी में पारसमणि उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक के पद से हाल ही में सेवानिवृत्त हुए हैं.

इससे पहले उन्हें राजकीय सम्मान दिया जा चुका है. श्री सत्यनारायण झा ने शिक्षा को समाज से जोड़ने में उल्लेखनीय भूमिका निभायी है. विद्यालय में समाज से सहयोग ले कर जहां कई जरूरी आधारभूत संरचनाओं का निर्माण कराया वहीं छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों को भी उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराने में सफल रहे हैं.

यही कारण रहा कि इस वर्ष जिले में सबसे ज्यादा प्रथम रहने वाले विद्यार्थी पारसमणि उच्च विद्यालय के ही होते हैं. जब राज्य में पोशाक योजना शुरू नहीं हुई थी तब सत्यनारायण झा ने पारसमणि स्कूल में घर-घर जा कर अभिभावकों से बातचीत कर यूनीफार्म लागू कराया.

जिला ही नहीं शायद यह राज्य के उन गिने चुने विद्यालयों में से है जहां नित्य 3.55 में राष्र्टीय गान लाउडस्पीकर पर बजाया जाता है. जन सहयोग से ही विद्यालय में लाउडस्पीकर की व्यवस्था की गयी है. सुबह की प्रार्थना भी इस पर की जाती है.

विद्यालय के बाहर भी जगा रहे हैं शिक्षा का अलख

सत्यनारायण झा ने अपनी जिम्मेदारी केवल विद्यालय तक ही नहीं बाहर भी शिक्षा की अलख जगा रहे हैं. वर्ष 2007 में पत्नी रेणु देवी के कैंसर से निधन के बाद उन्होंने रेणु बाल सुधार केंद्र की स्थापना की. इसमें गरीब बच्चों को नि: शुल्क शिक्षा मुहैया करायी जाती है.

हर वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रेणु बाल सुधार केंद्र में पढ़ने वाले मेधावी बच्चे व मैट्रिक में प्रथम रहने वाले बच्चों को रेणु मेधा छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत प्रशस्ति पत्र व छात्रवृत्ति की राशि प्रदान की जाती है. श्री झा ने कहा कि जब उनकी शादी हुई तो उनकी पत्नी नौवीं पास थी. उनमें पढ़ने की इतनी ललक थी कि मैट्रिक, इंटर व स्नातक करने के बाद शिक्षक का प्रशिक्षण लिया. मरने से पहले उन्होंने वाद लिया कि वे गरीब बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी हमेशा उठाते रहेंगे.

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