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बाजार क्षेत्र से खाली कराया गया अतिक्रमण प्रशासन को झेलना पड़ा लोगों का आक्रोश

Updated at : 18 Feb 2020 6:15 AM (IST)
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बाजार क्षेत्र से खाली कराया गया अतिक्रमण प्रशासन को झेलना पड़ा लोगों का आक्रोश

राघोपुर : सिमराही बाजार स्थित एनएच 57 किनारे से अतिक्रमण हटाने को लेकर शनिवार से जारी अभियान के दूसरे दिन अधिकारियों को लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ा. इस दौरान भूमिहीन परिवारों ने एनएच 57 को जामकर नारेबाजी भी किया. दरअसल सिमराही बाजार को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए जारी अभियान के तहत जब […]

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राघोपुर : सिमराही बाजार स्थित एनएच 57 किनारे से अतिक्रमण हटाने को लेकर शनिवार से जारी अभियान के दूसरे दिन अधिकारियों को लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ा. इस दौरान भूमिहीन परिवारों ने एनएच 57 को जामकर नारेबाजी भी किया.

दरअसल सिमराही बाजार को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए जारी अभियान के तहत जब रविवार को एसडीएम सुभाष कुमार, सीओ जगन्नाथ चौधरी एवं थानाध्यक्ष सरोज कुमार सशस्त्र बलों के साथ स्थल पर पहुंचे और एनएच 57 किनारे स्थित महादलित के घरों को तोड़ने का प्रयास किया तो महादलित परिवार के लोग आक्रोशित हो उठे और सड़क जामकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे. महादलितों का कहना था कि अन्यत्र बसने के लिए उनलोगों के पास भूमि नहीं है. जब तक सरकार द्वारा अन्यत्र कहीं उनलोगों के लिए भूमि आवंटित नहीं किया जाता.
वे लोग अपने घर को नहीं हटा सकते. हालांकि एसडीएम द्वारा समझाने के बाद जामकर्ता शांत हुए और जाम को तोड़ दिया. जिसके बाद पुनः यातायात बहाल हो सकी. एसडीएम ने महादलितों को आश्वस्त किया कि जल्द उनलोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी. वहीं अभियान को बाजार की ओर आगे बढ़ाने के बाद प्रशासन को बाजार वासियों के आक्रोश का भी सामना करना पड़ा.
बाजार के रैयतों का कहना था कि उनलोगों के अधिग्रहित जमीन का भुगतान अभी तक नहीं हो सका है. कुछ लोगों के अधिग्रहित जमीन का भुगतान वर्षों पूर्व सामान्य दर ही कर दिया गया. बताया कि सिमराही बाजार 70 वर्षों से बाजार के रूप में विकसित है और यहां के लोग व्यावसायिक दर पर जमीन का रसीद, बिजली बिल आदि का भुगतान करते आ रहे हैं. बावजूद इसके यहां के रैयतों को उनके जमीन का भुगतान व्यावसायिक दर पर नहीं किया जा रहा है.
इसके लिए यहां के रैयत वर्षों से भूअर्जन कार्यालय, जिलाधिकारी कार्यालय व न्यायालय का चक्कर काट रहे हैं. लेकिन अभी भी मामला लंबित है. रैयतों का कहना था कि जबतक उन्हें अधिग्रहित जमीन का भुगतान नहीं हो जाता, वे लोग जमीन से संरचना नहीं हटाएंगे.
इसके बाद एसडीएम सुभाष कुमार ने रैयतों से बातचीत किया और उन्हें जल्द मामले के निपटारा का भरोसा दिलाया. एसडीएम श्री कुमार ने कहा कि जिनके जमीन का भुगतान नहीं हो सका है. वे इस मामले में पहल कर 15 दिनों में भुगतान करवाने का प्रयास करेंगे.
जिन रैयतों का भुगतान हो चुका है और जिन रैयतों की मांग व्यावसायिक दर से भुगतान की है. उन्हें एसडीएम ने सोमवार को जिलाधिकारी सुपौल से मिलकर अपनी बात रखने को कहा. एसडीएम सुभाष कुमार ने रैयतों को समझाने के बाद अतिक्रमण हटाने की अभियान को जारी रखा और बिना कारण अतिक्रमण किए जमीन से पुनः अतिक्रमण हटाने का काम शुरू हो गया.
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