पछिया हवा ने बढ़ा दी कनकनी, जनजीवन अस्त- व्यस्त, गेहूं फसल के लिए फायदेमंद
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :14 Jan 2020 8:47 AM (IST)
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मधेपुरा : सुबह से ही पछिया हवा चलने लगी और कनकनी बढ़ा दी. एक बार फिर हाड़ कंपाती ठंड ने जिलेवासियों को बेदम कर दिया है. अधिकतम पारा 18 डिग्री तक पहुंच गया. वहीं न्यूनतम तापमान भी 10 डिग्री पर पहुंच गया. मौसम विभाग के मुताबिक सर्द पछिया हवा के कारण अभी मकर संक्रांति तक […]
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मधेपुरा : सुबह से ही पछिया हवा चलने लगी और कनकनी बढ़ा दी. एक बार फिर हाड़ कंपाती ठंड ने जिलेवासियों को बेदम कर दिया है. अधिकतम पारा 18 डिग्री तक पहुंच गया. वहीं न्यूनतम तापमान भी 10 डिग्री पर पहुंच गया. मौसम विभाग के मुताबिक सर्द पछिया हवा के कारण अभी मकर संक्रांति तक ठंड से राहत की कोई उम्मीद नहीं है या ठंड बुजुर्गों व बच्चों के लिए जानलेवा भी हो रही है.
सदर अस्पताल समेत अन्य नर्सिंग होम में कोल्ड डायरिया व ठंड लगने से बीमार लोगों के भर्ती होने का सिलसिला लगा हुआ है. सदर अस्पताल व निजी नर्सिंग होम में पहुंच रहे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. ठंड का कहर जिले में बरकरार है. ठंड जनित बीमारी से लोग अधिक प्रभावित हो रहे है. बच्चों व बूढ़ों के लिए ठंड जानलेवा बनी हुई है.
गेहूं के लिए है लाभकारी, मक्का में हो सकता है सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी : वहीं कृषि वैज्ञानिक के अनुसार जनवरी महीना में सर्दी बढ़ना रबी फसल के लिए लाभकारी माना जा रहा है. विशेषकर गेहूं अच्छी जमने की उम्मीद हो रही है इस बाबत कृषि वैज्ञानिक डॉ विपुल कुमार मंडल ने बताया कि कोहरा पड़ने से व तापमान में गिरावट से रबी फसलों की अच्छी पैदावार की उम्मीद है.
प्रमुख फसल गेहूं, सरसों, चना, मसूर, मटर, लहसुन आदि को फायदा होगा. उन्होंने बताया कि अभी जो ठंड बढ़ी है. वह गेहूं के साथ-साथ प्याज व लहसुन को भी फायदा पहुंचाएगी.
हालांकि उन्होंने कहा कि मक्का फसल में बड़ी ठंड से सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी होती है. फलस्वरूप पत्तों का रंग सफेद व गुलाबी होने लगता है. सक्षम किसान को सूक्ष्म पोषक तत्व का छिड़काव करना चाहिए. ताकि फसल बेहतर रहे. हालांकि मौसम में गर्माहट आने के बाद यह समस्या खुद-ब-खुद कम हो जाती है.
यातायात है प्रभावित, कनकनी की वजह से दुबके हैं लोग : मौसम वैज्ञानिक के मुताबिक सुबह-शाम कुहासे का असर रहेगा और कनकनी बनी रहेगी. बताया कि बुधवार को बादल छाये रह सकते हैं. घना कोहरा के कारण यातायात भी प्रभावित रहेगी. शीतलहर और कनकनी भरी ठंड अब भी जारी है.
कभी कभी दिन में धूप निकल जाने के कारण लोगों को थोड़ी राहत भले ही मिल रही है, लेकिन शाम होते ही हवा बहने से कनकनी बढ़ जाती है. लोग ठंड से बचने के लिए तरह- तरह के उपाय में जुटे हैं.
एनएच पर रफ्तार हुई धीमी : वहीं कोहरे के कोहराम पर अब भी विराम नहीं लगा है. शाम होते ही कोहरे की घने चादर से पूरा इलाका ढक सा जाता है. इसका सबसे अधिक प्रभाव तो यातायात पर पड़ रहा है. घने कोहरे के कारण शाम के बाद सुबह आठ बजे तक लोगों को यातायात में परेशानी हो रही है.
कोहरे की वजह से जहां सड़कों चलने वाले वाहनों की रफ्तार धीमी हो जाती है, वहीं रेल मार्ग की कई ट्रेनों की आवाजाही में भी विलंब दर्ज किया जा रहा है. एनएच 106 व 107 पर शाम होते ही रफ्तार धीमी हो रही है. इसके कारण सुबह के 10 बजे तक सड़क और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है.
फुटपाथ पर रहने वालों के लिए आफत है ठंड : संपन्न लोगों की ठंडक रजाई व कंबलों से भी नहीं कट पा रही और वे रूम हीटर व ब्लोअर के सहारे ठंड का आनंद ले रहे, लेकिन सबसे बड़ी परेशानी फुटपाथ पर जिंदगी गुजार रहे लोगों व दिहाड़ी मजदूर को हो रही है.
जिन्हें दो वक्त की रोटी के लिए ठिठुरते ठंड में भी जोखिम भरा कार्य करना पड़ रहा है. प्रशासन द्वारा अलाव की व्यवस्था नहीं करने से भी लोग हलकान हैं. हालांकि कुछ प्रखंड में अलाव कि कहीं कहीं व्यवस्था की गयी है.
बढ़ती ठंड हमारे स्वास्थ्य को कर सकती है खराब
मधेपुरा. मौसम के लिहाज से हमें अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना पड़ता है. बढ़ती ठंड हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है, ठंड के मौसम में होने वाली बीमारियों के बारे में विश्वविद्यालय चिकित्सक फिजीशियन डॉ असीम प्रकाश ने बताया कि इसका मुख्य कारण तापमान कम और हवा में नमी का होना है. इसमें मरीज को सिरदर्द, थकार, बुखार होने के साथ ही नाक में स्राव होता है. गले में खरास तो सर्दियों में आम बात है जो वायरस से होने वाली बीमारी है.
गले में ठंड लगने से सिकुड़ जाती है सांस की नली
डॉ असीम ने कहा कि ठंड में दमा का अटैक बढ़ जाता है, क्योंकि गले में ठंड लग जाती है, जिसके प्रभाव से सांस की नली सिकुड़ जाती है और मरीज की सांस फूलने लगती है. कोल्ड डायरिया के बारे में उन्होंने बताया कि इसके लगने से उल्टी व दस्त होती है. ठंडी में जोड़ों का दर्द होना तय है, क्योंकि इस मौसम में व्यायाम करना लोग कम कर देते हैं.
बचे कोल्ड हैंड बीमारी से, दस्ताना का करें इस्तेमाल
उन्होंने बताया कि सर्दी के मौसम में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि खून की नलियां सिकुड़ने लगती हैं, जिससे रक्तचाप बढ़ जाता है. कोल्ड हैंड नामक बीमारी के बारे में उन्होंने बताया कि इसको रेनाड फिनामेना भी कहते हैं.
उन्होंने कहा कि इस बीमारी का कारण है- हाथ-पैर की अंगुलियों में खून का संचार कम होना. इन बीमारियों से बचने का उपाय बताते हुए उन्होंने कहा कि गर्म कपड़े पहने जाए, पैर, नाक व कान को ढककर रखें, सफाई पर विशेष ध्यान दें, विटामिन ‘सी’ युक्त फल सहित जूस, पानी, सूप का ज्यादा प्रयोग करें.
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