ठंड ने बदला गियर, ठिठुरी जिंदगी लोग परेशान, जनजीवन अस्त-व्यस्त
Updated at : 19 Dec 2019 8:54 AM (IST)
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मधेपुरा : साल के अंतिम समय में ठंड ने सितम ढाना शुरू कर दिया है. दो-तीन दिनों से कड़ाके की पड़ रही सर्दी से बुधवार को वातावरण में कोहरे का दबाव बढ़ा हुआ था. दिन के आधे पहर तक सूर्यदेव भी कोहरे की आगोश में छिपे रहे. बढ़ी ठंड गलन का अहसास करा रही थी. […]
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मधेपुरा : साल के अंतिम समय में ठंड ने सितम ढाना शुरू कर दिया है. दो-तीन दिनों से कड़ाके की पड़ रही सर्दी से बुधवार को वातावरण में कोहरे का दबाव बढ़ा हुआ था. दिन के आधे पहर तक सूर्यदेव भी कोहरे की आगोश में छिपे रहे. बढ़ी ठंड गलन का अहसास करा रही थी. इसका सीधा असर परिचालन पर भी पड़ा. दूर-दराज से बाजार में लोगों का आगमन भी कम हुआ. इसकी तस्दीक बसों में आ रही सवारी से भी हो रही थी.
ठंड के चलते अन्य दिनों की अपेक्षा शहर में चहल-पहल भी कम थी. व्यवसायियों ने बताया कि ग्राहकी कमजोर होने से उनका व्यवसाय भी प्रभावित हुआ है. इस दौरान कुछ व्यवसायी एकत्रित हो अलाव जलाकर हाथ सेंकते भी दिखे. कुल मिलाकर फिलहाल बढ़ी ठंड ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर रखा है.
गत वर्ष से अधिक पड़ रही ठंड: कई लोग यह मानते हैं कि इस बार ठंड कम पड़ रही है, जबकि पूर्व के वर्षों में ठंड अधिक पड़ती थी, लेकिन ऐसा नहीं है. कृषि विज्ञान केंद्र से मौसम संबंधित मिली जानकारी के अनुसार इन तारीखों में इस बार सर्दी कड़ाके की पड़ रही है.
आंकड़े बताते हैं कि साल 2017 में जहां अधिकतम तापमान का ग्राफ लगभग 33 डिग्री सेल्सियस बना हुआ था.
वो इस वर्ष 16 से 17 डिग्री सेल्सियस बना हुआ है. वहीं, न्यूनतम तापक्रम इन तारीखों में जहां गत वर्ष 10 से 11 डिग्री सेल्सियस के इर्द-गिर्द आंका गया था. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार कोहरा गत वर्ष की तुलना में बीते दिनों में कम पड़ा है.
सड़कों पर कम हुई आवाजाही: हड्डी को गलाने वाली ठंड का साइड इफेक्ट सड़कों पर दिखने लगा है. दिन ढ़लने के बाद भी ग्रामीण इलाके से आने वाले लोगों की आवाजाही कम दिखी. सबसे खास बात यह रही कि इन दिनों दुकानदार भी अपनी दुकान देर से खोल रहे है.
हालांकि गर्म कपड़ों के बाजार में ग्राहक जरूर पहुंचते है. ठंडा का व्यापक असर भारतीय रेल से लेकर राज्यमार्ग पर देखी जा रही है. बाइक सवार लोगों की तादाद कम होने लगी है. लोग भी सामान्य कार्य को टाल रहे है.
सीएल बन रहा सरकारी कर्मियों का कवच: दिसंबर का आखिरी सप्ताह शुरू होने वाली है. ऐसे में ठंड का प्रकोप सरकारी कार्यालय में काम करने वाले कर्मियों पर भी आफत बन कर आयी है. ऐसे में सरकार द्वारा प्रत्येक कर्मी को दिया जाने वाला आकस्मिक अवकाश (सीएल) मौसम के हमले में कवच बन कर सामने आया है.
अचानक सभी सरकारी स्कूलों में अवकाश के आवेदन ज्यादा बढ़ गये है. लोग वर्षांत से पहले अपने अवकाश को भी निबटा लेना चाहते है. हालांकि निजी सेक्टर में काम करने वाले कर्मियों की परेशानी बरकरार है.
बीमार होने की संभावना बढ़ी: अचानक ही मौसम के यू टर्न लेने से लोगों की फजीहत भी खूब हो रही है. हाफ स्वेटर व इनर में काम चलाने वाले लोगों को अचानक फुल ड्रेस में आना पड़ा है. ऐसे में संक्रमण से संभल कर रहने की आवश्यकता है.
चिकित्सक डॉ असीम प्रकाश बताते है कि इस मौसम में बुढ़े व बच्चों को एहतिहात बरतने की आवश्यकता है. इस मौसम में उबला हुआ पानी सभी लोगों के लिए आवश्यक है.
अलाव की होने लगी जरूरत: शीतलहर में लोगों को अलाव की जरूरत महसूस होने लगी है. खासकर शहर के स्टेशन, बस स्टैंड, कर्पुरी चौक, जयपाल पट्टी चौक, पूर्णिया गोला, सुभाष चौक, पानी टंकी चौक, थाना चौक, कॉलेज चौक, टी प्वायंट सहित मस्जिद चौक पर भी अलाव की व्यवस्था होनी चाहिए. स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद व अंचल प्रशासन को शीघ्र ही पहल करनी चाहिए.
सड़कों पर कम दिखी आवाजाही
ग्वालपाड़ा : सुबह से सर्द हवा के चलने से प्रखंड क्षेत्र में ठंड में बढ़ोत्तरी हो गयी. बढ़ी हुई ठंड से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है. रूक-रूक कर चल रही सर्द हवा से ठंड में बढ़ोत्तरी होने से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है. ठंड के कारण सड़कों पर आवाजाही कम देखी जा रही है.
इस मौसम में गर्म कपड़ा पहनने व गर्म भोजन का सेवन जरूरी होता है. किसान बुदुर सिंह, शंभू सिंह, संतोष झा, नुनु झा, वेदानंद ठाकुर, रंजन यादव आदि ने कहा ठंडी का असर फसल पर भी पड़ने की संभावना है. खास कर मकई का जो पौधा उग गया है.
उसमें पीलापन, आलू में पाला लगने लगा है. गेहूं फसल को लाभ होने की संभावना जतायी जा रही है. किराना कारोबारी राजो दास, लड्डू साह, वासुकी साह, उदय कुमार आदि का कहना है कि जाड़े की वजह से बाजार में लोगों की आवाजाही कम होने से कारोबार पर भी असर देखा जा रहा है.
महुआ बाजार प्रतिनिधि के अनुसार, मंगलवार की सुबह से सर्द हवा के चलने से लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. दिन भर सूर्य देवता का दर्शन लोगों को दुर्लभ रहा. सड़कों पर लोग का चलना बिल्कुल कम रहा. इस मौसम में गर्म कपड़ा पहनने व गर्म भोजन का सेवन जरूरी होता है. खास कर मकई का जो पौधा उग गया है उसमें पीलापन, आलू में पाला लगने लगा है. गेहूं फसल को लाभ होने की संभावना जतायी जा रही है.
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