35 वर्षों से मुफ्त में शिक्षा दान कर रहे प्रो दीनानाथ
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 05 Sep 2019 7:36 AM
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मधेपुरा : कोसी क्षेत्र के छात्रों को लगभग 35 वर्षों से मुफ्त में शिक्षा दान कर रहे प्रो दीनानाथ मेहता आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है. नगर परिषद अंतर्गत वार्ड तीन निवासी प्रो दीनानाथ वर्ष 1985 में साहुगढ़ स्थित बीएनएमवी कॉलेज में अध्यापक के पद पर नियुक्त हुये. तब से कॉलेज में पढ़ाने के […]
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मधेपुरा : कोसी क्षेत्र के छात्रों को लगभग 35 वर्षों से मुफ्त में शिक्षा दान कर रहे प्रो दीनानाथ मेहता आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है. नगर परिषद अंतर्गत वार्ड तीन निवासी प्रो दीनानाथ वर्ष 1985 में साहुगढ़ स्थित बीएनएमवी कॉलेज में अध्यापक के पद पर नियुक्त हुये. तब से कॉलेज में पढ़ाने के साथ-साथ घर पर छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क शिक्षादान करते आ रहे हैं.
विभिन्न व्यस्ताओं के बावजूद वे अनवरत इस कार्य में लगे हुए हैं. वे छात्रों को छात्रों को रसायन विज्ञान की शिक्षा देते हैं. लगभग 60 वर्ष के हो चुके प्रो मेहता वर्ष 2017 तक प्रतिदिन आठ घंटे पढ़ाया करते थे. बीएनएमयू में डिप्टी रजिस्ट्रार बनने के बाद कार्यों की अधिकता के चलते इन दिनों में छात्रों को सुबह 5 से 10 बजे तक पढ़ाते हैं. उनके पास प्रतिदिन सौ से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ाई के लिए आते हैं.
प्रो मेहता बताते हैं कि पिताजी शिवगुलाम मेहता भी एक शिक्षक थे. उन्हीं से प्रभावित होकर उन्होंने शिक्षा देने की सोची. पढ़ाने के दौरान विद्यार्थियों को रसायन विज्ञान के साथ-साथ जीवन जीने के तौर-तरीकों को बताया जाता हैं. विवि बनने के बाद सुदूर क्षेत्र के अभिभावक अपने बच्चों को शहर पढ़ने भेज तो देते थे. लेकिन उनके पास सीमित पैसा होता है. छात्र अपनी इच्छा दबा लेते थे.
पिता की चुनौती को देखते यहां के छात्रों के साथ-साथ सुदूर क्षेत्र से आये बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाना शुरू कर दिया. शिक्षा देने के बदले वे किसी कुछ नहीं लेते. प्रो दीनानथ कहते हैं कि वे रसायन की शिक्षा देता हूं. परिश्रम का ही फल है कि गरीब से गरीब बच्चे आज दर्जनों की संख्या में डॉक्टर, इंजीनियर, सरकारी व निजी संस्थानों में पदस्थापित हैं.
विषय का उच्चतम मानक को पढ़ाई में शामिल नहीं किया जाता, क्योंकि गरीब व सुदूर क्षेत्र से आए बच्चे पहले उच्च मानक की शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते हैं. वैसे बच्चों को उच्च मानक पढ़ाने का मतलब केवल ज्ञानी बनना. मेरा मानना है कि पहले इस इलाके का बड़ा युवा समूह पढ़ने की प्रवृति व उच्च शिक्षा तो प्राप्त कर लें, फिर आगे का रास्ता स्वयं चुन लेंगे.
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