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पहले खारिज व तीन घंटे बाद बदल गया अविश्वास प्रस्ताव का परिणाम

Updated at : 05 Jul 2019 6:28 AM (IST)
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पहले खारिज व तीन घंटे बाद बदल गया अविश्वास प्रस्ताव का परिणाम

मधेपुरा : अविश्वास प्रस्ताव के परिणाम के बाद माहौल गरमा गया है. पूरी प्रक्रिया का वीडियो वायरल होने व मामला न्यायालय में जाने से कई तरह के चर्चे होने लगे हैं. आरोप है कि 25 जून को नगर परिषद सभागार में अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के बाद मतों की गिनती कर पीठासीन पदाधिकारी द्वारा बहुमत […]

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मधेपुरा : अविश्वास प्रस्ताव के परिणाम के बाद माहौल गरमा गया है. पूरी प्रक्रिया का वीडियो वायरल होने व मामला न्यायालय में जाने से कई तरह के चर्चे होने लगे हैं. आरोप है कि 25 जून को नगर परिषद सभागार में अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के बाद मतों की गिनती कर पीठासीन पदाधिकारी द्वारा बहुमत के अभाव में मुख्य पार्षद पर अविश्वास प्रस्ताव गिर जाने की घोषणा कर दी गयी. इसके ठीक तीन घंटे बाद अध्यक्षता कर रहे वार्ड पार्षद से मतदान कराया गया.

उस मत की गिनती कर मुख्य पार्षद पर अविश्वास प्रस्ताव पारित होने की बात कही गयी. कुछ नेता, पदाधिकारी पर अनैतिक कार्य करने का आरोप लगाते तत्कालीन मुख्य पार्षद द्वारा हाई कोर्ट में मामला भी दायर किया गया है. संपूर्ण मामले का सीसीटीवी फुटेज व वीडियो फुटेज वायरल भी हुआ है. इसी आधार पर चुनाव आयोग व उच्च न्यायालय से न्याय की मांग की गयी है.
गुरुवार को प्रेसवार्ता कर सीसीटीवी फुटेज व वीडियो फुटेज के साथ पूर्व मुख्य पार्षद सुधा यादव ने कई आरोप लगाये. उन्होंने कहा कि वीडियो फुटेज देखने से स्पष्ट है कि किस तरह एक गलत मत पत्र जिस पर गुणा की जगह प्लस का निशाान है, उसे नगर परिषद के एक कर्मी व पदाधिकारी द्वारा मिलाकर कुल 13 मत अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में पड़ने की जानकारी दी जा रही है.
वहां एक पदाधिकारी स्पष्ट रूप से कहते नजर आ रहे हैं कि मुख्य पार्षद मामले में अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 13 मत पड़ा है, जो बहुमत से एक कम है. लिहाजा अविश्वास प्रस्ताव खारिज किया जा रहा है. सुधा यादव नेेे जोर देकर कहा कि वह मत अवैध था. लिहाजा उसकी गिनती नहीं होनी थी, लेकिन उसके गिनती के बाद भी अविश्वास प्रस्ताव पारित कराने के लिए आवश्यक मत नहीं मिल सका.
हल्ला का दौर हुआ शुरू
वीडियो में दिख रहा है कि अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने की जानकारी मिलने के साथ हॉल में हो हल्ला शुरू होता है. इसके कुछ देर बाद कई पार्षद हॉल से बाहर निकल जाते हैं. यहीं पर वीडियो बंद भी हो जाता है, लेकिन सीसीटीवी में दिखता है कि हॉल में मौजूद एक महिला पार्षद अविश्वास प्रस्ताव की बैठक की अध्यक्षता कर रही पार्षद चंद्रकला देवी को मतदान करने के लिए प्रशिक्षण दे रही हैं.
तीन घंटे बाद बाद वीडियो जब प्रारंभ होता है, तो नजर आता है कि वह महिला पार्षद चंद्रकला देवी के साथ वोटिंग एरिया तक जाती है और उन्हें वोट करवाती है. वीडियो में वोट से संबंधित निर्देश देने की ऑडियो भी स्पष्ट है.
सुधा यादव ने आरोप लगाया कि वीडियो स्पष्ट करता है यह देश का पहला मामला है जहां मतदान होने के बाद मतगणना हुई, परिणाम घोषित हुआ. परिणाम में जब हार की घोषणा कर दी गयी तो पुनः एक वोट कराया गया और परिणाम को पलट दिया गया. इस मामले में संबंधित पदाधिकारी व दूसरे पक्ष की आेर से किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं मिल पायी.
उच्च न्यायालय व चुनाव आयोग में दर्ज कराया मामला
सुधा यादव ने कहा उन्हें न्यायपालिका पर पूरी आस्था है. उन्होंने उच्च न्यायालय में मामला दर्ज कराया है और इस ऐतिहासिक मामले में ऐतिहासिक निर्णय आयेगा. इसके अलावा चुनाव आयोग को भी पूरे मामले की सूचना दे दी गयी है.
उनका दावा है कि पहली बार मतदान परिणाम का घोषणा करके लगभग 3 घंटा बाद में उसे अविश्वास प्रस्ताव के लिए मात्र एक वोटर से मतदान करवाना दोबारा मतगणना के परिणाम का घोषणा करना असंवैधानिक गैरकानूनी व नियम विरुद्ध है. केवल एक वोटर का मतदान करवाने से चंद्रकला देवी का मतदान गुप्त नहीं रहा. वहीं अविश्वास प्रस्ताव के विशेष बैठक की वीडियोग्राफी व प्रोसीडिंग में भारी विरोधाभास व बुनियादी अंतर है.
महत्वपूर्ण बिंदुओं को अंकित नहीं किया गया है या पूरी तरह चुनाव पर्यवेक्षक जिला प्रशासन के वरीय पदाधिकारी नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी के द्वारा किया गया आपराधिक षड्यंत्र है. जिसकी लड़ाई सड़क से लेकर न्यायालय तक लड़ी जायेगी. एक बड़ी विसंगति की ओर ध्यान दिलाते हुए सुधा यादव ने कहा प्रथम बार मतगणना व रिजल्ट के बाद वीडियोग्राफी बंद करा दी गई.
पुन: दूसरे दौर के मतदान प्रक्रिया प्रारंभ करने के समय वीडियोग्राफी करवाई गई. जो सभी के मिलीभगत व अपराधिक षड्यंत्र का खुलासा करता है. प्रेस वार्ता में कार्यकारी मुख्य पार्षद अशोक यदुवंशी, पूर्व मुख्य पार्षद डॉ विशाल कुमार बबलू, सशक्त स्थाई समिति सदस्य रेखा देवी, वार्ड पार्षद शफीक आलम, इसरार अहमद, अशोक श्रीवास्तव, नारायण तांती, पार्षद प्रतिनिधि सदानंद पासवान, कूलानंद यादव, चंदन रजक, दीपक कुमार आदि मौजूद थे.
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