बिन रैन बसेरा, कहां डालें डेरा

Published at :29 Jul 2017 3:30 AM (IST)
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बिन रैन बसेरा, कहां डालें डेरा

उदासीनता . चौसा प्रखंड की सीमाएं भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार व खगड़िया जिलों से मिलती हैं चौसा : चौसा प्रखंड की सीमाएं भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार व खगड़िया से मिलती है. इन सभी जिले वासियों को यत्र-तत्र जाने के लिए चौसा बस पड़ाव से गुजरना पड़ता है. कई सीमाओं से सटे होने के कारण चौसा में यात्रियों […]

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उदासीनता . चौसा प्रखंड की सीमाएं भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार व खगड़िया जिलों से मिलती हैं

चौसा : चौसा प्रखंड की सीमाएं भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार व खगड़िया से मिलती है. इन सभी जिले वासियों को यत्र-तत्र जाने के लिए चौसा बस पड़ाव से गुजरना पड़ता है. कई सीमाओं से सटे होने के कारण चौसा में यात्रियों का आवागमन अधिक होता है, लेकिन कोसी नदी पर निर्मित बाबा विशु राउत सेतु पर परिचालन शुरू होने के पश्चात यात्रियों की संख्या में वृद्धि हुई है. क्योंकि भागलपुर व उसके आसपास के वासियों के लिए सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, वीरपुर, नेपाल आदि जगह पर जाने के लिए सबसे सुगम रास्ता चौसा होकर गुजरता है. गाड़ी की प्रतीक्षा में कई बार यात्रियों का ठराव चौसा बस पड़ाव पर होता है.
ऐसे में शौचालय की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. शौचालय की मुकम्मल व्यवस्था नहीं होने के कारण यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. शौचालय वर्षों से अतिक्रमित है, जहां पूरे देश में खुले में शौच मुक्त भारत का अभियान चल रहा है. वहीं आज भी चौसा बस पड़ाव पर शौचालय की व्यवस्था नहीं है. इसके प्रति न तो जनप्रतिनिधि व न ही स्थानीय प्रशासन सजग है.
मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, भागलपुर, कटिहार, पूर्णिया आदि जगहों के लिए कई बसे यहां से खुलती है. चौसा प्रखंड व आसपास के लोगों को यात्रा क्रम में जब कभी चौसा पहुंचने में रात हो जाती है, तो धनाभाव के कारण उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. रात्रि विश्राम के लिए मंदिर या अन्य जगहों का सहारा लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है तथा शौच के लिए खुले में जाना मजबूरी होती है.
प्रतिदिन लगभग 10 से 15 हजार यात्रियों का आवागमन होता है. बस पड़ाव पर दुकानदारों व यात्रियों को प्यास बुझाने एक चापाकल है. लोग दूषित पानी को पीने के लिए लोग मजबूर है. दुकानदार किसान मिष्ठान भंडार के संचालक मनोहर मोदी, अखिलेश मेहता का कहना है कि वर्ष 2004-05 में तत्कालीन जिला परिषद सदस्य सीमा गुप्ता के द्वारा यात्री शेड के निकट महिला बाथरूम दो कमरे का निर्माण करवाया गया था, लेकिन रख-रखाव के अभाव में वर्तमान हालात बिल्कुल खस्ता हो गया. 12 वर्ष बीत चुका है, लेकिन इसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है. सड़क किनारे एक मात्र चापाकल है, जिसकी उपयोगिता बढ़ने से खराब पड़ा रहता है.
रख-रखाव के अभाव में जीर्ण-शीर्ण है शौचालय : चौसा निवासी अधिवक्ता सह लेखक विनोद आजाद ने कहा कि वर्ष 1995-96 में ग्राम पंचायत चौसा पश्चिमी के तत्कालीन मुखिया अविनाश चंद्र यादव ने जवाहर रोजगार योजना के तहत चौसा बस पड़ाव पर एक शौचालय व पेयजल के लिए एक चापाकल गड़वा. कुछ दिनों तक तो शौचालय का उपयोग होता रहा, लेकिन बाद के दिनों में रख-रखाव के अभाव में जीर्ण-शीर्ण हो गया.
वर्ष 2001 में ग्राम पंचायत का चुनाव हुआ, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधियों के द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया गया. वर्ष 2010 में छठ पर्व के अवसर पर प्रभाष कुमार यादव के नेतृत्व में एकलव्य युवा फाउंडेशन, चौसा के तत्वावधान में सफाई अभियान चलाया गया. अभियान में तत्कालीन चौसा थानाध्यक्ष सुरेश राम, अधिवक्ता सह लेखक विनोद आजाद, जिला पार्षद प्रतिनिधि मनोज राणा, राजेश पासवान व अन्य समाजसेवियों ने समर्थन किया. इसी दौरान चौसा बस पड़ाव पर स्थित शौचालय का भी साफ-सफाई करवाया गया तथा चौसा थानाध्यक्ष सुरेश राम (वर्तमान में उदाकिशुनगंज अनुमंडल के पुलिस इंस्पेक्टर) के पहल पर उक्त शौचालय का जीर्णोद्धार हो पाया तब से लेकर अभी तक टूटी-फूटी अवस्था में आमजन व यात्रियों के लिए यह शौचालय उपयोगी साबित हो पा रहा है.
बस पड़ाव पर जलजमाव व गड्ढा दुर्घटना को आमंत्रण दे रहा है. बारिश होने पर पानी जमा हो जाता है. इससे यात्रियों व वाहन चालकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
कहते हैं बीडीओ
प्रखंड विकास पदाधिकारी मो इरफान अकबर ने कहा कि शौचालय, पेयजल की समस्या के बारे में जानकारी नहीं है. एक सप्ताह के अंदर देखकर बस पड़ाव में शुद्ध पेयजल के लिए पीएचइडी से चापाकल लगा दिया जायेगा. शौचालय का भी व्यवस्था जल्द करा दिया जायेगा.
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