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मधेपुरा रेल इंजन कारखाने ने रचा इतिहास, भारतीय रेलवे को सौंपा 500वां इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव  

Updated at : 26 Mar 2025 7:16 PM (IST)
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प्राइमा टी8 डब्ल्यूएजी12बी ई-लोकोमोटिव

प्राइमा टी8 डब्ल्यूएजी12बी ई-लोकोमोटिव

मधेपुरा : बिहार के मधेपुरा में मौजूद एल्सटॉम के रेल इंजन कारखाने ने बुधवार को इतिहास रचते हुए 500वां पूरी तरह से मेक इन इंडिया प्राइमा टी8 डब्ल्यूएजी12बी ई-लोकोमोटिव भारतीय रेलवे को सौंप दिया.

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मधेपुरा में के विश्व स्तरीय फैक्ट्री ने बुधवार को इतिहास रच दिया. फैक्ट्री से आज 500वां पूर्णतया भारत निर्मित प्राइमा टी8 डब्ल्यूएजी12बी ई-लोकोमोटिव हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया. इस अवसर पर भारतीय रेलवे के मनीष कुमार, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी और एल्सटॉम के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहें.

800  डब्ल्यूएजी-12बी  नाम के इंजन का होना है निर्माण 

3.5 बिलियन यूरो के इस डील के तहत एल्सटॉम द्वारा माल ढुलाई के लिए 12,000 एचपी (9 मेगावाट) के 800  हाई पावर वाले डबल-सेक्शन प्राइमा टी8 इंजनों की आपूर्ति की जानी है. भारतीय रेलवे द्वारा डब्ल्यूएजी-12बी नाम के या इंजन 120 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति से 6,000 टन रेक खींचने में सक्षम हैं. भारत के सबसे आधुनिक मालवाहक इंजनों की उच्च उपलब्धता सुनिश्चित करने और रखरखाव लागत को कम करने के लिए, एल्सटॉम ने पूर्वानुमानित तकनीक की मदद से सहारनपुर और नागपुर में दो अत्याधुनिक रखरखाव डिपो भी बनाए हैं.

पूरी तरह से भारत में बनाए गए हैं इंजन

इस उपलब्धि के बारे में एल्सटॉम इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर, ओलिवियर लॉयसन ने कहा, “हमारे डब्ल्यूएजी12बी इलेक्ट्रिक इंजनों की टेक्नोलॉजी अत्याधुनिक है. ये पूरी तरह से भारत में बनाए गए हैं और देश में माल ढुलाई की ज़्यादा गति, एफिशिएंसी और विश्वसनीयता प्रदान करते हैं. हमारे 500वें ई-लोको की डिलीवरी से भारत में माल ढुलाई में रेलवे को मदद मिलेगी.  

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खास देश की लिस्ट में पहुंचा भारत

यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ पहल की एक अच्छी मिसाल है. यहां 85 प्रतिशत से अधिक घटक स्थानीय स्तर पर प्राप्त किए जाते हैं, जिससे भारत की स्थानीय विनिर्माण क्षमताएं मजबूत होती हैं. इस परियोजना के साथ भारत उन देशों के समूह में शामिल हो गया है जो उच्च-हॉर्सपावर के इंजनों का उत्पादन अपने देश में ही कर सकते हैं. साथ ही, देश के अंदर टेक्नोलॉजिकल विशेषज्ञता को बढ़ावा दे रहे हैं. ये ई-लोको पूरे देश में 120 मिलियन किलोमीटर से अधिक की दूरी तक माल ढुलाई कर चुके हैं. इन वस्तुओं में कोयला, सीमेंट, खाद्यान्न, उर्वरक, पेट्रोकेमिकल उत्पाद, खनिज, और डाक/पार्सल आदि शामिल हैं.

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Prashant Tiwari

लेखक के बारे में

By Prashant Tiwari

प्रशांत तिवारी डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत पंजाब केसरी से करके राजस्थान पत्रिका होते हुए फिलहाल प्रभात खबर डिजिटल के बिहार टीम तक पहुंचे हैं, देश और राज्य की राजनीति में गहरी दिलचस्पी रखते हैं. साथ ही अभी पत्रकारिता की बारीकियों को सीखने में जुटे हुए हैं.

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