Lakhisarai: गाड़ी महेशपुर की अनूठी पहल: स्कूल और घर मिलकर गढ़ेंगे बच्चों का कल
Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 14 May 2026 12:22 PM
बच्चों के घर पहुंच अभिभावकों से मिलती शिक्षिका
Lakhisarai: उत्क्रमित मध्य विद्यालय गाड़ी महेशपुर के शिक्षकों ने शाम के समय छात्र-छात्राओं के घर जाकर उनकी पढ़ाई का जायजा लिया. 'होम विजिट' के इस अनोखे अभियान के जरिए शिक्षक और अभिभावक मिलकर बच्चों का भविष्य संवारने की मुहिम में जुट गए हैं.
Lakhisarai: पीरी बाजार (लखीसराय ) से रविराज आनंद की रिपोर्ट. शिक्षा का उद्देश्य केवल स्कूल की चारदीवारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे बच्चों की जीवनशैली का हिस्सा बनाना है. इसी संकल्प को चरितार्थ करते हुए पीरी बाजार थाना क्षेत्र अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय गाड़ी महेशपुर की टीम ने एक अनूठी मिसाल पेश की है. विद्यालय की प्रधानाध्यापिका शारदा सुमन के नेतृत्व में शिक्षकों की एक विशेष टीम ने शाम के समय ‘होम विजिट’ (गृह दौरा) अभियान चलाया.
शाम को बच्चों के घर पहुंची शिक्षकों की टीम
इस अभियान के तहत सहायक शिक्षिका आभा कुमारी, निशा सिन्हा एवं शिक्षक वेणु व्यास ने छात्र-छात्राओं के घर-घर जाकर उनके होमवर्क और पढ़ाई की आदतों का बारीकी से निरीक्षण किया. शिक्षकों ने मौके पर जाकर देखा कि क्या बच्चे खेल-कूद के बाद शाम को अपनी पुस्तकों के साथ समय बिता रहे हैं या नहीं. शिक्षकों को अपने घर और पढ़ाई के टेबल पर देखकर बच्चे भी उत्साहित नजर आए.
अभिभावकों को दी गई जिम्मेदारी, साझा किए टिप्स
निरीक्षण के साथ-साथ शिक्षकों ने बच्चों के माता-पिता और अभिभावकों के साथ बैठक की. टीम ने अभिभावकों को प्रेरित करते हुए निम्नलिखित मुख्य बातों पर जोर दिया:
- बच्चों को बिना नागा किए प्रतिदिन स्कूल भेजें.
- घर में पढ़ाई के लिए एक शांत और बेहतर वातावरण उपलब्ध करायें.
- शाम के समय बच्चे क्या कर रहे हैं, उनकी गतिविधियों पर नजर रखें.
जब स्कूल और घर मिलेंगे, तभी चमकेगा भविष्य
इस अनूठी पहल पर प्रकाश डालते हुए प्रधानाध्यापिका शारदा सुमन ने कहा, “हमारा उद्देश्य बच्चों की सतत शैक्षणिक प्रगति सुनिश्चित करना है. जब स्कूल और घर मिलकर प्रयास करेंगे, तभी बच्चों का भविष्य उज्ज्वल होगा. इस पहल से न केवल बच्चों की पढ़ने में रुचि बढ़ेगी, बल्कि अभिभावकों में भी शिक्षा के प्रति जिम्मेदारी का भाव जगेगा.”
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प्रयास देख गद्गद हुए ग्रामीण
शिक्षकों के इस समर्पण और परिवार की सक्रियता को देखकर ग्रामीण और अभिभावक गद्गद हैं. ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षकों का खुद चलकर बच्चों के घर तक आना यह दर्शाता है कि वे बच्चों के भविष्य को लेकर कितने गंभीर हैं. स्थानीय लोगों ने इसे क्षेत्र के लिए एक सराहनीय कदम बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों से सरकारी स्कूलों के प्रति समाज का विश्वास और अधिक मजबूत होगा.
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