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एक दर्जन से अधिक पहाड़ी गांवों से मां काली के दर्शन करने आते हैं श्रद्धालु

Updated at : 25 Oct 2024 8:11 PM (IST)
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एक दर्जन से अधिक पहाड़ी गांवों से मां काली के दर्शन करने आते हैं श्रद्धालु

नक्सल प्रभावित क्षेत्र कजरा के लगभग आधा दर्जन गांवों में मां काली की पूजा आराधना होती रही है.

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कजरा. नक्सल प्रभावित क्षेत्र कजरा के लगभग आधा दर्जन गांवों में मां काली की पूजा आराधना होती रही है. जिसमें कजरा रेलवे परिसर स्थित मां काली का अपना गौरवमयी इतिहास रहा है. मां की प्रतिमा का दर्शन एवं मेले का आनंद उठाने कजरा क्षेत्र के दर्जन भर से अधिक सुदूरवर्ती पहाड़ी गांव से हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं. कजरा रेलवे परिसर स्थित मां काली की पूजा सन 1884 से होते आ रही है.

इस बार आयोजक करेंगे खासा इंतजाम

काली पूजा समिति के अध्यक्ष बंटी कुमार व कार्यकारी अध्यक्ष सन्नी कुमार ने बताया इस साल लगभग 45 फीट ऊंचा पंडाल होगा जो क्षेत्र के लोगों को लुभायेगा. इस वर्ष काफी आर्कषक व भव्य रूप में पंडाल का निर्माण कार्य सूर्यगढ़ा के सोनी टेंट हाउस द्वारा पांच कारीगरों के साथ मिलकर बनाया जा रहा है.

मूर्ति को तराशने का चल रहा कार्य

वहीं मां काली की मूर्ति को तराशने में मुंगेर जिला के दरियापुर गांव निवासी उमेश पंडित एवं अन्य कारीगर दिन रात मेहनत कर रहे है.

मेले में खास होगा मनोरंजन

यज्ञ स्थल पर बड़े-बड़े खेल तमाशा, मारुति, सर्कस, मौत का कुआं, तारामाची, झूला सजने लगी है. वहीं मीना बाजार के अलावा अन्य खिलौने की दुकान से लेकर खाने पीने तक की दुकाने भी लगेगी.

मूर्ति-पंडाल के अलावा भी मेला में बहुत कुछ रहेगा खास

मूर्ति व पूजा पंडाल के अलावा इस बार मेला भी यहां खास रहने वाला है. बच्चों व युवाओं के साथ महिलाओं को लुभाने के लिए मीना बाजार, कीचन के सामान, चीनी मिट्टी के बर्तन, बच्चों के खेलने व खाना के लिए पर्याप्त व्यवस्था रहेगी. कजरा रेलवे परिसर में मां काली का पंडाल को देखने के लिए मेले में आये सभी श्रद्धालुओं को आने के लिए मजबूर करेंगे.

इसलिए की जाती रही है मां काली की पूजा

कजरा रेलवे में कार्यरत कर्मियों व ग्रामीणों के सहयोग से कजरा रेलवे परिसर में स्थापित मां काली की पूजा का अनुष्ठान किया जाता रहा है. बुजुर्गों ने बताया कि जब कजरा में रेल का कार्य शुभारंभ किया गया था, तब उस समय अनेकों तरह की बाधाएं कार्य करने में उत्पन्न हो रही थी, जिससे कर्मी ही नहीं पदाधिकारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था. उन्होनें बताया कि बंगाल के एक कर्मी के मन में आया कि रेल परिसर में ही मां काली की प्रतिमा का आराधना कर कार्य शुरू कर कार्य को पुनः शुभारंभ किया गया, तब से कार्य में किसी भी तरह की बाधाएं उत्पन्न नहीं हुई. आज तक मां काली की आराधना हर वर्ष रेल कर्मियों व ग्रामीणों के सहयोग से धूमधाम से मनाया जा रहा है. वहीं आदर्श काली पूजा समीति कजरा कोषाध्यक्ष सत्यम कुमार, व्यवस्थापक प्रियांशु कुमार, लक्ष्मण कुमार, नवनीत निशांत, स्वराज, अमित कुमार, अभिषेक राज, साकेत के अलावा दर्जनों सदस्य व सहयोगी लोग दिन-रात एककर मां के पंडाल सजाने से लेकर अन्य कार्य में पूरे जोर शोर से लगे है, ताकि क्षेत्र के लोग काली पूजा का लुत्फ उठा सके.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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