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जच्चा-बच्चा किट वितरण अभियान शुरू

Updated at : 05 Jun 2025 7:08 PM (IST)
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जच्चा-बच्चा किट वितरण अभियान शुरू

जच्चा-बच्चा किट वितरण अभियान शुरू

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किशनगंज. स्वस्थ मां ही स्वस्थ शिशु की जननी होती है व एक स्वस्थ शिशु ही समाज की सशक्त नींव रखता है. इसी मूल मंत्र को आधार बनाते हुए बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जच्चा-बच्चा किट वितरण योजना की शुरुआत की गयी है. योजना का शुभारंभ गुरूवार को किशनगंज जिले में सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी, डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ अनवर हुसैन, डीपीएम डॉ मुनाजिम, डीपीसी विश्वजीत कुमार, एचएम, स्टाफ नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति में किया गया. चार माताओं को किट देते हुए सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने कहा कि यह पहल राज्य भर में जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत चलाई जा रही है, जिसका उद्देश्य मातृत्व को सुरक्षित बनाना, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना, प्रसवोत्तर जटिलताओं में कमी लाना तथा नवजातों को जीवन के आरंभ से ही उचित पोषण और चिकित्सा सुविधा देना है.

मातृत्व के प्रति संवेदनशील कदम

डीपीएम डॉ मुनाजिम ने बताया कि भारत में हर साल हजारों महिलाएं प्रसव के दौरान या उसके बाद उचित देखभाल न मिलने के कारण जटिलताओं का शिकार होती हैं. खासकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाएं पोषण की कमी, संक्रमण और आवश्यक औषधियों के अभाव में प्रसवोत्तर समस्याओं से जूझती हैं. दूसरी ओर नवजात शिशुओं की मृत्यु दर भी तब बढ़ जाती है जब जन्म के बाद उन्हें समय पर आवश्यक दवाएं और स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलती. इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जच्चा-बच्चा किट का वितरण एक सशक्त पहल है. यह योजना सुनिश्चित करती है कि हर प्रसव के बाद मां और शिशु को पोषणयुक्त आहार एवं आवश्यक दवाएं तत्काल और निःशुल्क मिलें, जिससे उनकी प्रारंभिक रिकवरी और स्वास्थ्य बेहतर हो सके.

मां के लिए संजीवनी समान आहार

सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने बताया कि प्रसव के बाद महिला का शरीर बेहद कमजोर होता है और उसे तुरंत ऊर्जा, प्रोटीन, और पोषक तत्वों की जरूरत होती है. इसी को ध्यान में रखते हुए किट में मां के लिए निम्न पोषण सामग्री दी जाती है जिसमें 200 मिली घी, 500 ग्राम चना सत्तू, 3 पैकेट चटनी या पेस्ट (प्रत्येक 30 ग्राम), 2 प्रोटीन बार, 350 ग्राम ड्राई फ्रूट मिक्स, 350 ग्राम राइस-खीर प्रीमिक्स उन्होंने बताया कि इन पोषण वस्तुओं के नियमित सेवन से प्रसवोत्तर कमजोरी दूर होती है, स्तनपान में सहायता मिलती है और मां की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है.

योजना मातृत्व को देगी सम्मान और सुरक्षा

कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने कहा कि प्रसव के बाद मां और शिशु दोनों अत्यंत संवेदनशील अवस्था में होते हैं. यह किट दोनों को न केवल पोषण और औषधीय सुरक्षा देती है, बल्कि उन्हें एक स्वस्थ जीवन की शुरुआत का अवसर भी प्रदान करती है. किशनगंज में यह पहल हमें मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने में मदद करेगी. सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ अनवर हुसैन ने बताया कि इस योजना से माताओं को अस्पताल से प्रसव उपरांत पोषण और औषधीय सुविधा उपलब्ध होगी. वहीं शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद रोग प्रतिरोधक सहायता प्राप्त होगी. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में मातृत्व और प्रसव के प्रति जागरूकता बढ़ेगी जिससे संस्थागत प्रसव की संख्या में बढ़ोतरी होगी साथ ही प्रसवोत्तर जटिलताओं में कमी और इलाज की सुगमता होगी.

सामुदायिक सहभागिता की आवश्यकता

इस योजना की सफलता तभी संभव है जब आम लोग, विशेषकर महिलाएं, इसकी जानकारी लें और इसका लाभ उठाएं. आशा एवं एएनएम कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है कि वे घर-घर जाकर महिलाओं को इस योजना के प्रति जागरूक करें. समाज में यदि मातृत्व को सम्मान मिले तो आने वाली पीढ़ी भी स्वस्थ और सशक्त बनेगी.

जच्चा-बच्चा किट एक सुरक्षित जीवन की शुरुआत

यह किट सिर्फ एक स्वास्थ्य सामग्री नहीं, बल्कि मां और बच्चे के जीवन की रक्षा का कवच है. किशनगंज जिले में इस पहल के साथ एक नई शुरुआत हुई है जो आने वाले समय में पूरे बिहार को मातृत्व सुरक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AWADHESH KUMAR

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AWADHESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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