किसानों की फसल बर्बाद, याचना भरी कहानी भला कौन सुने

Published by : RAUSHAN BHAGAT Updated At : 12 Aug 2025 9:08 PM

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जिले के किसानों की हजारों एकड़ में लगी धान की फसल को बाढ़ के पानी ने बर्बाद कर दिया है.

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लखीसराय. जिले के किसानों की हजारों एकड़ में लगी धान की फसल को बाढ़ के पानी ने बर्बाद कर दिया है. फसल के नष्ट होने से किसान काफी चिंतित हैं. किसान अब अपने घर परिवार को कैसे चलायेंगे, इसकी चिंता उन्हें सता रही है. फसल के साथ फसल लगाने में लगी पूंजी भी बाढ़ की पानी ने बर्बाद कर दिया है. खासकर सदर प्रखंड के अमहरा, बालगुदर, साबिकपुर, गढ़ी विशनपुर के अलावा सूर्यगढ़ा के रामपुर, चंदनपुरा, अलीनगर पंचायत के उतरी दिशा की ओर खेत में लगी धान की फसल बर्बाद हो चुकी है. बालगुदर निवासी व किसान सुबोध सिंह का कहना है कि उनके द्वारा इस बार पांच एकड़ में धान का फसल लगाया गया था, लेकिन सभी फसल को हरूहर नदी के पानी ने लील गया. शंकर सिंह ने बताया कि हरूहर नदी इस बार किसान को रोड पर ला दिया है. किसान अब अपने परिवारों के साथ जीवन-यापन कैसे करेंगे, यह एक किसान के लिए यक्ष सवाल बनकर रह गया. सुलो यादव ने कहा कि हमलोगों की धान की खेती से ही सालभर के लिए चावल हो जाता है, लेकिन किसान के पास जीवनयापन के लिए कोई रास्ता ही नहीं बचा है. धान की खेती बाढ़ में पूरी तरह से नष्ट हो चुका है. राधे यादव ने बताया कि धान का पौधा कमजोर होने के कारण अब पानी निकलने के बाद भी कुछ नहीं बचेगा. किसानों द्वारा 10 से 15 दिन पूर्व ही रोपनी की गयी थी, जिसके बाद हरूहर नदी के पानी ने सब कुछ बर्बाद कर छोड़ दिया. हम गरीब किसान का भला दुख भरी कहानी कोई नहीं सुनने वाला है. गंगा व सहायक नदियों के जलस्तर में कमी, पीड़ित परिवार का दर्द कम नहीं गंगा व सहायक नदियों के जलस्तर में कमी तो आयी है, लेकिन बाढ़ पीड़ितों की दुख भरी दास्तां अभी भी बरकरार है. कई घरों में पिछले दो तीन दिन से घर का चूल्हा भी नहीं जला है. लोग पानी में प्रवेश कर दुकान से चूड़ा, मुढ़ी व सत्तू आदि जैसे सूखे भोजन को खाकर व दूषित जल पीकर जान बचा रहे है. सोमवार तक जिला प्रशासन के द्वारा सूखा भोजन भी उपलब्ध नहीं कराया है. एक-आध जनप्रतिनिधि द्वारा बड़हिया एवं पिपरिया में सूखा भोजन की पोटली उपलब्ध कराया गया है, जबकि अधिकांश जगह घर के चूल्हे पानी में डूब जाने के कारण जला ही नहीं है. कुछ पीड़ित परिवार का घर दो मंजिला होने पर लोग ऊपरी तल्ला पर भोजन तैयार करते है एवं किसी तरह गुजारा कर रहे है. जिला प्रशासन ने मंगलवार से भोजन का पैकेट व सूखा खाना की पोटली पहुंचाना शुरू किया है, इस कारण लोगों को कुछ राहत मिली है. शहर के आरलाल कॉलेज के समीप सम्राट भवन में विभिन्न वरीय उपसमाहर्ता की देखरेख में पूड़ी सब्जी का पैकेट, चूड़ा गुड़ एवं सतू का पैकेटों को तैयार कर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है. बोले अधिकारी किसानों के धान की फसल में बाढ़ का पानी प्रवेश किया है. किऊल, हरूहर एवं गंगा के पानी में कमी आयी है. जल्द ही घरों से पानी निकलना शुरू हो जायेगा. राहत सामग्री तैयार कर वितरण किया जा रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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