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कैंसर के खिलाफ जिले में महाअभियान, प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने मिलाया हाथ

Updated at : 10 Feb 2026 7:20 PM (IST)
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कैंसर के खिलाफ जिले में महाअभियान, प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने मिलाया हाथ

कैंसर के खिलाफ जिले में महाअभियान, प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने मिलाया हाथ

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04 से 11 फरवरी तक चलेगा जागरूकता सप्ताह; समय पर जांच और संयमित जीवनशैली से संभव है बचाव

किशनगंज. बदलती जीवनशैली, तनाव व खान-पान में लापरवाही के कारण समाज में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां चुपचाप पैर पसार रही हैं. अक्सर जानकारी के अभाव में यह बीमारी तब पता चलती है जब वह गंभीर अवस्था में पहुंच चुकी होती है. इसी चुनौती से निपटने के लिए किशनगंज जिले में चार से 11 फरवरी तक ”कैंसर जागरूकता सप्ताह” का आयोजन किया जा रहा है. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर यह संदेश देना है कि कैंसर से डरना नहीं, बल्कि समझदारी से लड़ना जरूरी है.

कलेक्ट्रेट में विशेष कार्यक्रम का आयोजन

अभियान के तहत जिलाधिकारी के कक्ष में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस मौके पर जिलाधिकारी विशाल राज, सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी सहित स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारी मौजूद रहे. बैठक में कैंसर की रोकथाम व जन-जागरूकता को लेकर एक विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा की गयी.

जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार : जिलाधिकारी

कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी विशाल राज ने कहा कि कैंसर गंभीर अवश्य है, लेकिन लाइलाज नहीं. उन्होंने जोर देकर कहा कि सही समय पर जांच व जागरूकता के जरिए इसे नियंत्रित किया जा सकता है. लोग लक्षणों को नजरअंदाज न करें व तुरंत स्वास्थ्य केंद्रों से संपर्क करें. प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि जांच की सुविधा हर व्यक्ति तक पहुंचे. उन्होंने आमजन से अपील की कि वे इस सप्ताह के दौरान उपलब्ध निःशुल्क जांच सेवाओं का लाभ उठाएं.

खान-पान में सुधार व समय पर जांच है जरूरी

सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने स्वास्थ्य के प्रति सचेत करते हुए कहा कि जंक फूड, तंबाकू व धूम्रपान कैंसर के मुख्य कारक हैं. संतुलित आहार, हरी सब्जियां व फलों का सेवन इस जोखिम को कम कर सकता है. जिले के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर जांच की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है. वहीं, गैर-संचारी रोग पदाधिकारी डॉ देवेंद्र कुमार ने बताया कि अधिकांश मामलों में मृत्यु का कारण जांच में देरी होना है. उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक अवस्था में पहचान होने पर इलाज पूरी तरह संभव है.

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AWADHESH KUMAR

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By AWADHESH KUMAR

AWADHESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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