धड़ल्ले से जारी है बालू का अवैध उत्खनन व ढुलाई

Published at :19 Apr 2017 2:55 AM (IST)
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धड़ल्ले से जारी है बालू का अवैध उत्खनन व ढुलाई

क्राइम. जिन पर अंकुश लगाने की जिम्मेवारी, वही हैं सहयोगी 30 दिसंबर 2015 से बालू के उत्खनन पर रोक के बावजूद आज भी यह धड़ल्ले स जारी है. प्रशासन की लाख कोशिश के बावजूद इस पर अंकुश नहीं लगाया जा सका है. सूर्यगढ़ा : लखीसराय जिला में 30 दिसंबर 2015 के बाद से बालू उत्खनन […]

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क्राइम. जिन पर अंकुश लगाने की जिम्मेवारी, वही हैं सहयोगी

30 दिसंबर 2015 से बालू के उत्खनन पर रोक के बावजूद आज भी यह धड़ल्ले स जारी है. प्रशासन की लाख कोशिश के बावजूद इस पर अंकुश नहीं लगाया जा सका है.
सूर्यगढ़ा : लखीसराय जिला में 30 दिसंबर 2015 के बाद से बालू उत्खनन पर रोक है. टेंडर की पेंच में फंस कर बालू उत्खनन का कार्य प्रारंभ नहीं हो पाया है लेकिन बालू उत्खनन पर रोक के 16 माह बाद भी रियल स्टेट का कारोबार बिना किसी परेशानी के चल रहा है. बालू माफिया अवैध तरीके से बालू साइड पर धड़ल्ले से बालू का उत्खनन व परिवहन कर रहे हैं. दिन में बालू की सौदेबाजी तो रात के अंधेरे में खुलेआम डिलीवरी हो रही है.
बालू के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने में जिला प्रशासन पूरी तरफ असफल रहा है. जिनके कंधों पर बालू के इस काले कारोबार को रोकने की जिम्मेवारी है उन्हीं के संरक्षण में यह कारोबार फल फूल रहा है.
क्या है परेशानी
किऊल नदी से बालू उठाव का टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण सरकार को करोड़ों रुपया का चपत लग रहा है. जानकारी के अनुसार किऊल नदी के बालू नीलामी के लिए लखीसराय व जमुई जिला का बालू घाटों का संयुक्त रुप से 2016-19 के लिए 49 करोड़ में पांच वर्ष के लिए टेंडर हुआ. बेस्टलक ट्रेडिंग प्रा लि के द्वारा टेंडर के लिए लगभग दस माह बीत गया लेकिन बालू उठाव प्रारंभ नहीं हुआ.वित्तीय वर्ष 2016 में बालू उठाव पूर्णतया बंद रहा.
जिससे सरकार को करोड़ों की क्षति हुई. जानकारों के मुताबिक टेंडर लेने वाले का प्रत्येक वर्ष 20 प्रतिशत अधिक राशि देनी होती है. ऐसे में टेंडर घारक के ऊपर अतिरिक्त बोझ बढ़ जाता है. जबकि किऊल नदी के बालू साइड में बालू की उपलब्धता लगातार कम हो रही है. इधर बालू का अवैध कारोबार नौकरशाहों की भी मोटी कमाई का जरिया बन गया है. इसलिए आंख मूंद बैठे हैं अफसर, कार्रवाई कौन करें?
थाने के आगे से पुलिस ने पास कराया अवैध बालू लदा ट्रैक्टर
आमतौर पर सूर्यगढ़ा पुलिस द्वारा रात्रि गश्ती नहीं के बराबर की जाती लेकिन सेामवार की रात 12:10 बजे थाना परिसर के मुख्य गेट के समीप लगाये गये बेरिकेटिंग के समीप पुलिस का गश्ती वाहन खड़ा था. रात के अंधेरे में तीन चार पुलिस वाले हाथ में टॉर्च लिए एनएच पर आने-जाने वाले वाहनों पर नजर रख रहे थे. खास कर टॉर्च से रोशनी कर मालवाहक वाहनों पर बिना रोके नजर रखी जा रही थी. तकरीबन 50 गज की दूरी से प्रभात खबर प्रतिनिधि रात के अंधेरे में वाहनों की रोशनी से स्थिति को जानने की कोशिश की.
रात 12:15 बजे अवैध बालू लदा एक ट्रैक्टर एनएच से होकर गुजर रहा था जिसे रोक कर पुलिस वालों ने कुछ बात की. फिर ट्रैक्टर लखीसराय की ओर से मुंगेर की ओर चलते बना. तकरीबन 15 मिनट बाद पुन: 12:30 बजे एक बालू लदा ट्रैक्टर सूर्यगढ़ा थाना पुलिस से संपर्क करते हुए गुजरा. पुलिस ने अवैध बालू लदे ट्रैक्टर को गेट पास दे दिया.
12:40 बजे तीसर ट्रैक्टर बालू लेकर सूर्यगढ़ा बाजार की ओर आया. रात्रि गश्ती में सूर्यगढ़ा थाना के आगे खड़ी पुलिस ने उसे भी जाने दिया. ट्रैक्टर पुरानी बाजार सूर्यगढ़ा की ओर बालू डिलीवरी के लिए मुड़ा. इसी बीच 12:42 बजे पुलिस गश्ती वाहन भी धीरे-धीरे निस्ता की ओर प्रस्थान कर गया.
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