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मुरादें पूरी होती हैं बड़ी दुर्गामंदिर में

शारदीय नवरात्र. 150 वर्षों से यहां हो रही है माता की पूजा-अर्चना, उमड़ रहे हैं श्रद्धालु लखीसराय : रेलवे स्टेशन से महज 400 मीटर की दूरी पर दक्षिण दिशा में शहर के नया बाजार स्थित बड़ी दुर्गा स्थान में पिछले 150 वर्ष से मां की पूजा अर्चना की जा रही है. शारदीय नवरात्रा में मां […]

शारदीय नवरात्र. 150 वर्षों से यहां हो रही है माता की पूजा-अर्चना, उमड़ रहे हैं श्रद्धालु

लखीसराय : रेलवे स्टेशन से महज 400 मीटर की दूरी पर दक्षिण दिशा में शहर के नया बाजार स्थित बड़ी दुर्गा स्थान में पिछले 150 वर्ष से मां की पूजा अर्चना की जा रही है. शारदीय नवरात्रा में मां की पूजा अर्चना पूरी भक्ति भाव से की जा रही है. मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है. बड़ी दुर्गा मंदिर कमेटी द्वारा शैक्षणिक दिशा में भी वर्षों से कार्य किया जा रहा है.
व्यवसायियों की सहायता से दुर्गा मंदिर द्वारा शहर में श्री दुर्गा बालिका उच्च व मध्य, श्री दुर्गा बालक उवि एवं गेंदी साव मध्य विद्यालय की स्थापना की जा चुकी है. इसमें गेंदी साव मध्य विद्यालय को छोड़ कर सभी स्कूलों का सरकारीकरण किया जा चुका है. लोगों के अनुसार लगभग 150 वर्ष पूर्व व्यवसायिक मंडी के रूप में बालगुदर प्रसिद्ध हुआ करता था. उस वक्त नया बाजार स्थित बड़ी दुर्गा मां एक पीपल के पेड़ के नीचे अवस्थित थीं. मान्यता है कि इस मंदिर में मां की विशेष कृपा है. लोग की मुरादें मांगते जरूर पूरी होती है.
मो जमाल करते हैं शहनाई वादन: मंदिर के सचिव देवनंदन प्रसाद एवं अध्यक्ष केदार प्रसाद ने बताया कि मां की विशेष कृपा के कई उदाहरण दृष्टिगोचर हो चुके हैं. उन्होंने बताया कि तेलंगा बंधु द्वारा मंदिर का जीर्णोद्धार व नवीकरण का कार्य वर्ष 2001 में शुरू किया गया. एक दिन वज्रपात हुआ, लेकिन सभी बच गये. वहीं मंदिर निर्माण में जुड़े मजदूर गुंबद के समीप से गिर गया,
लेकिन उसे सिर्फ खरोंच आयी. नि:संतान यदु गोलादार को संतान की प्राप्ति हुई. इस मंदिर में मां के प्रति अटूट श्रद्धा के कारण सभी समुदाय के लोग पूजा अर्चना करते हैं. पिछले 50 वर्षों से शारदीय नवरात्रा के दौरान पहली पूजा से अंत तक मो जमाल एवं उनके पुत्र मो जसीम शहनाई वादन करते हैं. पूजा के बाद मूर्ति विसर्जन के लिए प्रशासनिक स्तर पर बनने वाले लाइसेंस अनिल कुमार नेता के नाम से बनाया जाता है.
मंदिर परिसर में नहीं है बलि का प्रावधान: मंदिर के मुख्य पुरोहित आचार्य महेंद्र मिश्रा ने बताया कि मंदिर में पूजा के अवसर पर मुंडन व बलि का संकल्प किया जाता है. उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में बलि देने का प्रावधान नहीं है केवल संकल्प लिया जाता है. बेहद आकर्षक ढंग से बनाये गये मंदिर में टाइल्स व मारबल लगाया गया है. ऊंचा गुंबद मंदिर को काफी आकर्षक बनाता है. मंदिर के नवीकरण में वास्तुकला का विशेष ध्यान रखा गया है. सचिव देवनंदन प्रसाद ने बताया कि नव दुर्गा मंदिर बन कर तैयार है एवं प्रतिमा भी उपलब्ध हो चुकी है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 के मध्य तक उन प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा होने की संभावना है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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