आधा दर्जन पहाड़ी गांवों में गहराया जलसंकट

Published at :12 May 2016 6:08 AM (IST)
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आधा दर्जन पहाड़ी गांवों में गहराया जलसंकट

नहीं है भूमिगत जल स्तर का अता-पता डेढ़ से दो किलोमीटर दूर से पानी लाने को हैं मजबूर क्षेत्र के निवासी पीएचइडी विभाग के पास मरम्मती के लिए नहीं है ढाई इंच पाइप कुछ पहाड़ी गांव में पीएचइडी विभाग भेज रहा पानी टैंकर सूर्यगढ़ा : प्रखंड के आधा दर्जन पहाड़ी गांव में जल स्तर काफी […]

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नहीं है भूमिगत जल स्तर का अता-पता

डेढ़ से दो किलोमीटर दूर से पानी लाने को हैं मजबूर क्षेत्र के निवासी
पीएचइडी विभाग के पास मरम्मती के लिए नहीं है ढाई इंच पाइप
कुछ पहाड़ी गांव में पीएचइडी विभाग भेज रहा पानी टैंकर
सूर्यगढ़ा : प्रखंड के आधा दर्जन पहाड़ी गांव में जल स्तर काफी नीचे चले जाने से स्थानीय लोगों को पेयजल के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. प्रखंड के बुधौली बनकर एवं उरैन पंचायत के कई गांव के लोग एक से दो किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर हो रहे हैं. बुधौली बनकर पंचायत के खैरा, मंझीयावां, चंपानगर व उरैन पंचायत के बसुहार, नवकाडीह सहित कई ऐसे गांव हैं जहां गांव में पानी तक नहीं है. चापाकल फेल हो चुका है. गांव से दूर कुछ इंडिया मार्का चापाकल लगा हुए है
जो थोड़ा-बहुत पानी दे रहा है. जिसके लिए ग्रामीणों को डेढ़ से दो किलोमीटर दूर से पानी जाना पड़ता है. पीएचइडी विभाग के कर्मी रामवृक्ष पासवान के मुताबिक पहाड़ी गांव में इंडिया मार्का चापाकल लगा है. इनमें से 50 प्रतिशत चापाकल खराब पड़ा है. चापाकल मरम्मती के लिए विभाग के पास ढाई इंच का पाइप उपलब्ध नहीं है. स्थानीय लोगों के मुताबिक इन गांवों के लोग प्रतिवर्ष गरमी के समय में भयानक जल संकट से जूझते हैं. विभाग द्वारा जल संकट से स्थायी निजात दिलाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है.
क्या है उपाय
उक्त पहाड़ी गांव के बाहर कुछ चिह्नित जगहों पर भूमिगत जल स्रोत उपलब्ध है. विभागीय कर्मी रामवृक्ष पासवान के मुताबिक एक माह पूर्व अधीक्षण अभियंता द्वारा प्रभावित गांव जाकर जल संकट की जानकारी ली गयी थी. जिन जगहों पर भूमिगत जल मिलने की संभावना है उन्हें चिह्नित करने का निर्देश दिया गया है.
अगर ऐसे जल स्रोतों का पता लगाकर वहां डीप बोरिंग एवं मोटर लगाकर पाइप से जलापूर्ति की व्यवस्था की जाय तो स्थानीय लोगों को जल संकट से निजात मिल सकता है. लेकिन किसी भी स्तर से इस ओर ध्यान नहीं दिया गया. गरमी के दिनों में जब जल संकट अधिक गहरा जाता है तो विभाग प्रभावित इलाकों में पानी का टेंकर भेजकर सिर्फ खानापूर्ति करता है.
कहते हैं सहायक अभियंता पीएचइडी
सहायक अभियंता पीएचइडी पवन कु मार के मुताबिक सूर्यगढ़ा प्रखंड के खैरा, मंझीयावा, बसुीार,चंपानगर आदि ंकुछ पहाड़ी गांव में भूमिगत जल स्तर में गिरावट की वजह से चापकल फेल हो रहा है. प्रभावित गांव में जलसंकट से निवटने के लिए टैंकर से जलापूर्ति की जा रही है. फिलहाल विभाग के पास पानी का सात टैंकर उपलब्ध है. इनमें से दो टैंकर खराब है जिसकी मरम्मती हो रही है. अभी पांच टैंकर से जलापूर्ति की जा रही है.
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