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विभाग हैरान . सदर अस्पताल में खुला है 10 बेड का नशामुक्ति केंद्र केंद्र में अबतक आये हैं मात्र 19 मरीज मरीजों की कमी से व्यवस्था पर सवाल सदर अस्पताल में नशा मुक्ति केंद्र का संचालन होने के बाद वहां पर मरीजों का नहीं पहुंचना व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है. यह सोचने वाली […]

विभाग हैरान . सदर अस्पताल में खुला है 10 बेड का नशामुक्ति केंद्र

केंद्र में अबतक आये हैं मात्र 19 मरीज
मरीजों की कमी से व्यवस्था पर सवाल
सदर अस्पताल में नशा मुक्ति केंद्र का संचालन होने के बाद वहां पर मरीजों का नहीं पहुंचना व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है. यह सोचने वाली बात है कि शराब छोड़ने के बाद इसके आदी लोगों को परेशानियां नहीं हो रही है या फिर कोई वैकल्पिक व्यवस्था ढूंढ़ ली है. ये लोग शराब का सेवन नहीं कर रहे हैं या फिर चोरी छिपे इन्हें आसानी से उपलब्ध हो पा रहा है. जानकारों का कहना है कि झारखंड के सीमावर्ती इलाकों में शराब बिकने की वजह से जरूरतमंदों का काम आसानी से हो जा रहा है.
स्वास्थ्य विभाग ने जिनकी मेहमानबाजी के लिये सदर अस्पताल में नशा मुक्ति केंद्र की स्थापना की, चिकित्सक व कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी गयी. नशा मुक्ति केंद्र में आनेवाले मरीजों की सुविधाओं का विशेष ख्याल रखा गया. लेकिन केंद्र में मरीजों की काउंसलिंग नहीं होने से आज उनकी कमी अस्पताल प्रबंधन को खल रही है.
लखीसराय : मरीजों के बिना नशा मुक्ति केंद्र में सन्नाटा पसरा है. स्थिति यह है कि विभाग के उम्मीद के मुताबिक मेहमान के वहां नहीं पहुंचने से विभाग हैरान है. सिविल सर्जन डा राज किशोर प्रसाद कहते हैं कि इक्के दुक्के मरीज आ रहे हैं उन्हें ओपीडी में ही सलाह दे दी जा रही है. भरती होने लायक मरीज कहां आ रहे हैं.
दरअसल सूबे में शराब बंदी करने जा सरकार ने यह सोचा कि इसको बंद करने के बाद इसके आदी लोगों को भारी परेशानी के दौर से गुजरना पड़ सकता है. ऐसे में अस्पतालों में नशा मुक्ति केंद्र की स्थापना की गयी. जिले में 10 बेड का एक असपताल बनाने की घोषणा हुई जिसे अब 20 बेड का किया जा रहा है. लेकिन उसमें मरीज नहीं पहुंच रहे हैं. विभाग भी इसको लेकर आश्चर्य जता रहा है.
सीएस कहते हैं कि यहां भरती करने लायक मरीजों की संख्या काफी कम है. विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो सदर अस्पताल में संचालित नशा मुक्ति केंद्र में एक अप्रैल से सोमवार 18 अप्रैल तक मात्र 19 मरीज ही पहुंचे थे. मंगलवार को एक भी मरीज इलाज कराने के लिये नहीं आया. स्वास्थ्य समिति से जुड़े श्याम किशोर प्रसाद सिंह ने बताया कि अभी तक एक भी मरीज ऐसा नहीं आया जिसे रेफर किया जा सके. यहां आये सभी मरीजों को काउंसेलिंग कर ही छोड़ दिया गया.
बोले नोडल अधिकारी
नोडल पदाधिकारी डा एके भारती ने कहा कि शराब के आदि लोगों के इलाज के लिये नशा मुक्ति केंद्र का संचालन किया जा रहा है. लेकिन वहां पर मरीजों की संख्या बहुत ही कम है. जो मरीज आ रहे है वे ओपीडी के लायक रहते हैं और उन्हें वहीं पर सलाह दे दी जाती है. एक भी मरीज एेसा नहीं आया जिसे रेफर किया जा सके.
Prabhat Khabar Digital Desk
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