जलसंकट से निबटने की नहीं हो रही कारगर तैयारी

Published at :03 Apr 2016 6:01 AM (IST)
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जलसंकट से निबटने की नहीं हो रही कारगर तैयारी

वित्तीय वर्ष 2015-16 में मुख्यमंत्री चापाकल योजना मद का 490 में से मात्र 85 नया चापाकल गाड़ा जा सका पहाड़ी इलाके में जलसंक ट से निबटने की नहीं है कोई व्यवस्था लखीसराय : गरमी शुरू होते ही भूमिगत जलस्तर में गिरावट आने से जगह-जगह पेयजल संकट गहराने लगा है. इधर पीएचइडी विभाग के द्वारा जलसंकट […]

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वित्तीय वर्ष 2015-16 में मुख्यमंत्री चापाकल योजना मद का 490 में से मात्र 85 नया चापाकल गाड़ा जा सका

पहाड़ी इलाके में जलसंक ट से निबटने की नहीं है कोई व्यवस्था
लखीसराय : गरमी शुरू होते ही भूमिगत जलस्तर में गिरावट आने से जगह-जगह पेयजल संकट गहराने लगा है. इधर पीएचइडी विभाग के द्वारा जलसंकट से निबटने के लिए मुकम्मल तैयारी नहीं की गयी है. जिले में लगभग साढ़े आठ हजार चापाकल ही फिलहाल चालू अवस्था में हैं, जो जिले की साढ़े दस लाख की आबादी के लिए काफी कम है.
पिछले वित्तीय वर्ष में राज्य योजना अंतर्गत मुख्यमंत्री चापाकल योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में कुल 400 नया चापाकल गाड़ने का लक्ष्य था. लेकिन इनमें से मात्र 85 चापाकल ही गाड़ा जा सका. सहायक अभियंता पवन कुमार के मुताबिक बीच में ही सरकार द्वारा उक्त योजना का कार्य बंद करने का निर्देश दिया गया.
लखीसराय नप क्षेत्र में उक्त योजना के तहत 66 व बड़हिया नगर पंचायत क्षेत्र में 24 नये चापाकल गाड़ा जाना था लेकिन इनमें से एक भी चापाकल नहीं गाड़ा जा सका. पीएचइडी विभाग के द्वारा वित्तीय वर्ष 2015-16 में 320 पुराने चापाकल की जगह नया चापाकल गाड़ा गया.
वित्तीय वर्ष 2014-15 का बकाया मुख्यमंत्री चापाकल योजना मद का कुल 400 नये चापाकलों में से 388 चापाकल व स्कूलों में 98 नया चापाकल भी पिछले वित्तीय वर्ष में गाड़ा गया. इधर कजरा व चानन के कई पहाड़ी गांव में भूमिगत जलस्तर में तेजी से गिरावट होने की वजह से चापाकल ने पानी देना कम कर दिया है. कुआं का जलस्तर पाताल पहुंचने लगा है. इन इलाकों में ग्रामीण जलापूर्ति योजना का क्रियान्वयन नहीं हो पाया है.
भीषण गरमी में इन इलाके के लोग दो से तीन किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर होते हैं. पिछले वर्ष गरमी में कजरा के उरैन, बसुहार आदि इलाके में पानी के टेंकर भेजकर जलपूर्ति की व्यवस्था नहीं हो पायी थी. बुधौली बुनकर पंचायत के निवर्तमान मुखिया पंकज कुमार के मुताबिक आने वाले दिनों में इन इलाके में जलसंकट गहराने से परेशानी बढ़ेगी. लगातार आश्वासन के बावजूद इन इलाकों में जलसंकट से निबटने की मुकम्मल तैयारी नहीं की गयी.
क्या कहते हैं अधिकारी : पीएचइडी विभाग के सहायक अभियंता पवन कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री चापाकल योजना का कार्य बीच में ही बंद कर दिया गया जिससे लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया. वित्तीय वर्ष 2014-15 का बकाया 388 चापाकल व स्कूलों में कुल 98 चापाकल गाड़ने का कार्य वित्तीय वर्ष 2015-16 में पूरा किया गया. पुराने चापाकल की जगह 320 नया चापाकल गाड़ा गया. इसके अलावे चापानल गाड़ने की कोई योजनाएं नहीं थी.
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