कम गहराई तक चापाकल गाड़ने की वजह से जल्द होता है खराब
विभागीय पदाधिकारियों की मिली भगत से राशि की होती है बंदरबांट
लखीसराय : गरमी की दस्तक के साथ ही जिले भर में पेयजल संकट गहराने लगा है. खराब पड़े अधिकतर चापाकल को ठीक करने की प्रक्रिया नहीं हो रही. विभिन्न योजना मद से गाड़े गये चापाकल प्राक्कलन के मुताबिक नहीं गाड़े जाने की वजह से वह जल्द ही खराब हो जाते हैं. पीएचइडी विभाग के आंकड़े पर गौर करें तो जिले में लगभग 2922 चापाकल स्थायी रूप से खराब हैं. मात्र 8450 चापाकल ही चालू अवस्था में है,
जो जिले की 10.5 लाख की जनसंख्या के लिए नाकाफी है. जिले के सात प्रखंड व दो नगर परिषद लखीसराय, नगर पंचायत बड़हिया में त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि, सांसद, विधायक, पार्षद व पीएचइडी विभाग से लोगों के प्यास बुझाने के लिये हजारों की संख्या में चापाकल गड़ाया जाता है. परंतु प्राक्कलन के अनुसार चापाकल नहीं गड़ाये जाने से गरमी आते ही और पानी स्तर नीचे जाते ही सैकड़ों चापाकल पानी देना बंद कर देते हैं.
जिसके परिणामस्वरूप सैकड़ों चापाकल खराब हो जाते हैं. खराब चापाकल जानवरों के खूंटा बांधने के काम आने लगा है. सूत्रों की मानें तो विभाग चापाकल गड़ाने का प्राक्कलन 180-190 फिट पाइप की स्वीकृति देती है, लेकिन ठेकेदार पदाधिकारी की मिली भगत से 130 फिट गाड़कर, राशि निकाल लेते हैं. जिसके परिणाम स्वरूप एक ही वर्ष में चापाकल खराब हो जाते हैं. बड़हिया के राजीव पांडेय, नंदनामा के अजय कुमार, पिपरिया के प्रह्लाद सिंह, पीरीबाजार के राज किशोर सिंह, बड़हिया के बबलू कुमार सहित दर्जनों लोगों ने बताया कि कोई चापाकल प्राक्कलन के अनुसार नहीं गड़ाने से गड़ाये चापाकल खराब हो रहे हैं.
क्या कहते हैं पीएचइडी के सहायक अभियंता
पीएचइडी विभाग के सहायक अभियंता पवन कुमार ने बताया कि प्राक्कलन के मुताबिक ही चापाकल गाड़ा जाता है. अलग-अलग जगहों में पानी की लेयर भी भिन्न-भिन्न होती है. बड़हिया में 150 फिट, सूर्यगढ़ा में 130 से 140 फिट पर पानी निकल जाता है. उन्होंने बताया कि इन जगहों पर 130 से 150 फिट तक पाइप डालकर चापाकल गाड़ा जा रहा है.
